साफ पानी हर व्यक्ति की बुनियादी जरूरत है. प्रदूषित पानी बेहद घातक साबित हो सकता है. साफ पानी को यूनाइटेड नेशंस द्वारा मनुष्य का मूल अधिकार माना गया है, बावजूद इस के दुनिया भर में लगभग 1.8 मिलियन लोग प्रदूषित पानी के कारण मर जाते हैं. पानी के बारे में 4 महत्त्वपूर्ण बातें.

मात्रा: हर व्यक्ति को रोजाना पीने, खाना पकाने, सैनिटेशन और हाइजीन के लिए 20 से 50 लिटर पानी की जरूरत होती है.

विश्वसनीयता: पानी की उपलब्धता भरोसेमंद होनी चाहिए. मौसम चाहे कोई भी हो, व्यक्ति को हर स्थिति में पानी मिलना चाहिए. अगर पानी के स्रोत भरोसेमंद न हों या मौसमी हों तो इस का असर व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता पर पड़ता है.

गुणवत्ता: पानी के वितरण के लिए उचित और भरोसेमंद प्रणाली होनी चाहिए ताकि हर परिवार को सुरक्षित और साफ पेयजल मिले.

लागत: साफ पानी का भरोसेमंद स्रोत भी माने नहीं रखता अगर व्यक्ति उसे पा न सके. इस में पैसे और समय दोनों की बात आती है. साफ पानी इसलिए है जरूरी

साफ पानी पोषण देता है: मनुष्य का शरीर 60 फीसदी पानी से बना होता है. उस को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए ताकि उस का शरीर सभी काम ठीक से करता रहे. इस के अलावा पानी मुंह की साफसफाई बनाए रखने के लिए भी जरूरी है. यह खून की सांद्रता ठीक बनाए रखने में मदद करता है. खून के जरीए पोषक पदार्थों और औक्सीजन को शरीर की हर कोशिका तक पहुंचाता है.

विषैले पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है: साफ और ताजा जल शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है, फिर चाहे ये विषैले पदार्थ शरीर में बने हों या बाहर से शरीर में आ गए हों अथवा प्रदूषित पानी के साथ शरीर में आ गए हों.

शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखता है: साफ और सुरक्षित जल पीने से शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बना रहता है. यह खाना पचाने, इसे शरीर में सोखने में मदद करता है. शरीर का तापमान सामान्य रख उसे सेहतमंद बनाए रखता है.

पेशियों को ऊर्जा देता है: जब पेशियों को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिलता, तो उन में दर्द और अकड़न शुरू हो जाती है. अत: पेशियों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए पानी बहुत जरूरी है.

पानी गुर्दों के लिए बहुत जरूरी है: अगर व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में पानी न पीए तो उस की किडनियों में पथरी और संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है. खासतौर पर गरम वातावरण में. इस के अलावा पानी बालों, त्वचा और नाखूनों को सेहतमंद बनाए रखने में मदद करता है. पानी से फैलने वाली ज्यादातर बीमारियां प्रदूषित या गंदा पानी पीने से होती है.

गंदे पानी से होने वाली 10 आम बीमारियां:

डिसैंट्री: इस बीमारी के कई लक्षण हैं- उलटी आना, पेट में ऐंठन और गंभीर डायरिया. ऐक्यूट डिसैंटरी के मामले में व्यक्ति को बुखार हो सकता है और मल के साथ खून भी आ सकता है.

डायरिया: डायरिया गंदे पानी से होने वाली सब से आम बीमारी है. यह अकसर पानी से फैलने वाले वायरस से होती है. इस का मुख्य लक्षण है पतला और पानी जैसा मल, जिस के कारण व्यक्ति को डिहाइड्रेशन हो सकता है. नवजात और छोटे बच्चों की तो मौत भी हो सकती है.

कौलरा: यह बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है जिस में व्यक्ति गंभीर डिहाइड्रेशन और डायरिया से पीडि़त हो जाता है. वे लोग जो अपने आसपास सफाई नहीं रखते उन में इस की संभावना अधिक होती है. पानी जैसा मल आने से शरीर से तरलपदार्थ और इलैक्ट्रोलाईट निकल जाते हैं और मरीज गंभीर डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाता है. कभीकभी गंभीर डायरिया ही इस का मुख्य लक्षण होता है.

टाइफाइड: भोजन और पानी में मौजूद बैक्टीरिया के कारण टाइफाइड होता है. यह उन स्थानों पर आसानी से फैलता है जहां सैनिटेशन सुविधाएं न हों. तेज बुखार, पेट में दर्द, सिरदर्द, रैशेज, पेशियों में कमजोरी इस के मुख्य लक्षण हैं. कुछ गंभीर मामलों में इंटरनल ब्लीडिंग भी हो सकती है.

हैपेटाइटिस ए: शौचालयों से आने वाले पानी से हैपेटाइटिस ए आसानी से फैलता है. सैनिटेशन यानी साफसफाई न रखने से यह बीमारी आसानी से फैलती है. इस बीमारी के लक्षण हैं- बुखार, थकान, डायरिया, उलटी, भूख न लगना, पीलिया आदि. गंभीर मामलों में लिवर फेल्योर भी हो सकता है.

हुकवर्म: हुकवर्म ऐसा परजीवी है जो मल के माध्यम से फैलता है. हालांकि यह पानी के माध्यम से अपना नया होस्ट ढूंढ़ लेता है. अगर व्यक्ति हुकवर्म का लार्वा निगल जाए तब भी यह बीमारी हो सकती है. पेट में दर्द, ऐंठन, बुखार, भूख न लगना, रैशेज, मल में खून आना आदि इस के लक्षण हैं.

स्टमक फ्लू: यह ऐसी बीमारी है जिस के कारण पेट और आंतों में जलन और सूजन आ जाती है. यह बैक्टीरिया या वायरस से फैलती है. इस के मुख्य लक्षण है- डायरिया और उलटी. यह बीमारी सभी आयुवर्ग के लोगों में होती है. छोटे बच्चों में तो बहुत आम है.

पोलियो: पोलियोमाइलिटिस को आमतौर पर पोलियो कहा जाता है. यह एक्यूट वायरल संक्रमण है, जो प्रदूषित पानी से फैलता है. यह शरीर के केंद्रीय तंत्रिकातंत्र को प्रभावित करता है. इस के मुख्य लक्षण हैं- बुखार, सिरदर्द, चक्कर आना आदि. अंत में मरीज पैरालाइसिस का शिकार हो जाता है.

लैड पौइजनिंग: लैड पौइजनिंग लैड से युक्त पानी पीने से होती है. ऐसा पानी अकसर पुरानी पाइपों या सतही प्रदूषित जल से आता है. यह बीमारी बच्चों के लिए बहुत घातक होती है. यह कई समस्याओं का कारण बन सकती है जैसे अंगों का क्षतिग्रस्त होना, तंत्रिकातंत्र पर बुरा असर, खून की कमी, हाई ब्लडप्रैशर, किडनी रोग आदि.

ई कोलाई: छोटे बच्चों और बुजुर्गों में इस संक्रमण की संभावना अधिक होती है. अगर मांस अच्छी तरह पका न हो तो यह बिना पाश्चयुरीकृत उत्पादों के सेवन से इस की संभावना बढ़ जाती है. पानी जैसा मल, मल के साथ खून आना, पेट में दर्द और ऐंठन इस के मुख्य लक्षण हैं. मल के साथ खून आना ऐसा लक्षण है, जिस में व्यक्ति को तुरंत डाक्टर की सलाह लेनी चाहिए.

– डा. आरएसके सिन्हा, इंटरनल मैडिसिन स्पैशलिस्ट, जेपी हौस्पिटल, नोएडा