गृहशोभा विशेष

गर्भधारण करना किसी भी महिला के लिए सब से बड़ी खुशी की बात और शानदार अनुभव होता है. जब आप गर्भवती होती हैं, तो उस दौरान किए जाने वाले प्रीनेटल टैस्ट आप को आप के व गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी देते हैं. इस से ऐसी किसी भी समस्या का पता लगाने में मदद मिलती है, जिस से शिशु के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है जैसे संक्रमण, जन्मजात विकार या कोई जैनेटिक बीमारी. ये नतीजे आप को शिशु के जन्म के पहले ही स्वास्थ्य संबंधी फैसले लेने में मदद करते हैं.

यों तो प्रीनेटल टैस्ट बेहद मददगार साबित होते हैं, लेकिन यह जानना भी महत्त्वपूर्ण है कि उन के परिणामों की व्याख्या कैसे करनी है. पौजिटिव टैस्ट का हमेशा यह मतलब नहीं होता है कि आप के शिशु को कोई जन्मजात विकार होगा. आप टैस्ट के नतीजों के बारे में अपने डाक्टर से बात करें और उन्हें समझें. आप को यह भी पता होना चाहिए कि नतीजे मिलने के बाद आप को सब से पहले क्या करना है.

डाक्टर सभी गर्भवती महिलाओं को प्रीनेटल टैस्ट कराने की सलाह देते हैं. कुछ महिलाओं के मामले में ही जैनेटिक समस्याओं की जांच के लिए अन्य स्क्रीनिंग टैस्ट कराने की जरूरत पड़ती है.

5 नियमित टैस्ट

गर्भावस्था के दौरान कुछ नियमित टैस्ट यह सुनिश्चित करने के लिए होते हैं कि आप स्वस्थ हैं. आप का डाक्टर आप के खून और पेशाब की जांच कर कुछ परिस्थितियों का पता लगाएगा. इन में निम्नलिखित टैस्ट शामिल हैं

1. हीमोग्लोबिन (एचबी)

2. ब्लड शुगर एफ और पीपी

3. ब्लड ग्रुप टैस्ट

4. वायरल मार्कर टैस्ट

5. ब्लड प्रैशर

अगर आप गर्भधारण करने के बारे में सोच रही हैं, तो डाक्टर आप को फौलिक ऐसिड (सप्लिमैंट्स) टैबलेट्स लेने की सलाह दे सकता है. ये टैबलेट लेने की सलाह आप को तब भी दी जा सकती है, जब आप स्वस्थ हों और अच्छा आहार भी ले रही हों. विटामिन बी सप्लिमैंट्स और कैल्सियम लेने की सलाह सभी गर्भवती, स्तनपान करा रही महिलाओं और स्तनपान कर रहे शिशुओं को दी जाती है. इन्हें शुरू करने से पहले डाक्टर से सलाह जरूर ले लें.

अन्य टैस्ट

स्कैनिंग टैस्ट

अल्ट्रासाउंड आप के शिशु और आप के अंगों की पिक्चर लेने के लिए ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल करता है. अगर आप की गर्भावस्था सामान्य है, तो आप को 2-3 बार यह कराना होगा. पहली बार शुरुआत में यह देखने के लिए कि क्या स्थिति है, दूसरी बार शिशु का विकास देखने के लिए करीब 18-20 सप्ताह का गर्भ होने पर, जिस से यह सुनिश्चित हो सके कि शिशु के शरीर के सभी अंग अच्छी तरह विकसित हो सकें.

जैनेटिक टैस्ट

प्रीनेटल जैनेटिक टैस्ट विशेष तौर पर उन महिलाओं के लिए महत्त्वपूर्ण होते हैं, जिन के शिशु को जन्मजात विकार या जैनेटिक समस्या होने का जोखिम ज्यादा होता है. ऐसा निम्न परिस्थितियों के दौरान होता है.

– आप की उम्र 35 वर्ष से अधिक है.

– आप को कोई जैनेटिक बीमारी है या आप के व आप के साथी के परिवार में किसी जैनेटिक बीमारी का इतिहास हो.

– आप का पहले गर्भपात हुआ हो या मृत शिशु पैदा हुआ हो.

डा. मोनिका गुप्ता, एमडी, डीजीओ गाइनोकोलौजिस्ट के अनुसार, स्वस्थ गर्भावस्था के लिए इन जांचों के बारे में जानकारी होनी जरूरी है. प्रीनेटल टैस्ट में ब्लड टैस्ट शामिल है, जिस से आप के ब्लड टाइप, आप को ऐनीमिया है या नहीं इस के लिए आप के हीमोग्लोबिन का स्तर, डायबिटीज की जांच के लिए ब्लड ग्लूकोज का स्तर, आप का आरएच फैक्टर (अगर आप का ब्लड आरएच नैगेटिव है और शिशु के पिता का ब्लड आरएच पौजिटिव है, तो शिशु में भी पिता का आरएच पौजिटिव ब्लड हो सकता है, जिस से आप के शरीर में ऐंटीबौडीज बननी शुरू हो सकती हैं और उस से आप के गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान पहुंच सकता है) जांचा जाएगा. एचआईवी, हैपेटाइटिस सी और बी जैसी बीमारियों के लिए आप का वायरल मार्कर टैस्ट भी होगा, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान ये बीमारियां हो सकती हैं.

अगर आप को पहले से जानकारी हो कि आप को व आप के साथी को एक खास बीमारी है, तो आप पहले से ही भावनात्मक तौर पर तैयार हो सकती हैं. पहले से जानकारी होने पर आप

को परिस्थितियों पर बेहतर नियंत्रण रखने में आसानी होगी.

-डा. सुनीता यादव

प्रमुख क्वालिटी कंट्रोल, डालमिया मैडिकेयर

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