गृहशोभा विशेष

प्रौद्योगिकी ने हमारे जीने के तरीके को बदल दिया है और इस मामले में चिकित्सा का क्षेत्र भी अलग नहीं है. आईवीएफ के क्षेत्र में आधुनिक चिकित्सकीय प्रक्रियाओं की मदद से नि:संतान दंपती अब अपने सपनों को साकार करने लगे हैं और नई तकनीक में आए सुधार के कारण आईवीएफ विशेषज्ञ अब प्रक्रिया और भी अधिक प्रभावी बना रहे हैं.

ऐसी ही एक प्रक्रिया सिंगल ब्लास्टोसिस्ट हस्तांतरण है. इस के बारे में गुड़गांव स्थित बौर्न हौल क्लीनिक में आईवीएफ विशेषज्ञ डा. संदीप तलवार बताते हैं, ‘‘इस में हमारे पास सर्वश्रेष्ठ भू्रण का चयन करने का विकल्प होता है क्योंकि अंतिम स्थिति तक केवल सब से मजबूत भू्रण ही जीवित रह पाते हैं.

‘‘इस चरण में भू्रण को पूर्ण सक्रिय ‘इम्ब्रायोनिक जीनोम’ के साथ शरीर में सामान्य रूप से प्रत्यारोपित कर दिया जाता है. तीसरे दिन के भू्रणों की तुलना में ये ‘ब्लास्टोसिस्ट’ अधिक स्वस्थ एवं मजबूत होते हैं और इन का प्रत्यारोपण दर अधिक होता है.’’

इस प्रक्रिया को आईवीएफ लैब के क्लीन रूम में किया जाता है और इस तरह के लैब एशिया में सिर्फ गुड़गांव और कोच्चि स्थित बौर्न हौल क्लीनिक में ही उपलब्ध हैं. आईवीएफ लैब के क्लीन रूम को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि उस में रोगाणु और नैनों कण कम से कम पैदा हों क्योंकि रोगाणुओं और नैनों कणों के कारण गर्भाधारण दर में कमी आ जाती है.

बौर्न हौल क्लीनिक में आईवीएफ विशेषज्ञ डा. मोनिका सचदेव के अनुसार, ब्लास्टोसिस्ट हस्तांतरण सर्वाधिक ताकतवर के जीवित रहने की अवधारणा पर आधारित है. इस में इस चरण में सभी भू्रणों में से सब से मजबूत भू्रण ही जीवित रहते हैं. 5वें दिन के ब्लास्टोसिस्ट डाक्टरों के लिए यह जानने का सर्वश्रेष्ठ माध्यम बनते हैं कि किस भू्रण के हस्तांतरण से स्वस्थ गर्भाधान एवं स्वस्थ बच्चे का जन्म होगा.

ब्लास्टोसिस्ट हस्तांतरण तकनीक

परंपरागत इन विट्रो निषेचर (आईवीएफ) चक्र में महिला के अंडे को निकाला जाता है और उसे निषेचित किया जाता है. अगर सब कुछ ठीकठाक रहा, तो 3 दिन बाद भू्रण को गर्भाशय में स्थानांतरित कर दिया जाता है. परंपरागत तरीके में चूंकि यह पूर्वानुमान करने में दिक्कत होती है कि तीसरे दिन कौन से भू्रण गर्भाधान की स्थिति पैदा करेगा. ऐसे में इस उम्मीद में 4 या अधिक भू्रण प्रत्यारोपित कर दिए जाते हैं कि कोई न कोई भू्रण गर्भाधान की स्थिति पैदा करेगा तथा बच्चे का जन्म होगा.

अब तक गर्भाधान करने का यही तरीका अपनाया जाता रहा है. लेकिन अब अनेक नि:संतान दंपती परंपरागत तकनीक की बजाय ब्लास्टोसिस्ट हस्तांतरण तकनीक को अपना रहे हैं ताकि स्वस्थ औलाद पा सकें. अनेक केंद्रों पर किए गए अध्ययनों से पता चला है कि ब्लास्टोसिस्ट से बेहतर गर्भाधान दर हासिल होता है.

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