पहले प्लास्टिक सर्जरी फिर कौस्मैटिक और उस के बाद कंस्ट्रक्टिव सर्जरी. ये सभी सौंदर्य में निखार के लिए हैं. ऐसिड अटैक मामले में प्लास्टिक और कौस्मैटिक सर्जरी किसी वरदान से कम नहीं हैं. लेकिन इन दिनों ऐसी ही एक नई सर्जरी की काफी चर्चा है और वह है वैजिनोप्लास्टी. जी हां, आप जो सोच रही हैं वही सच है. यह वैजिनोप्लास्टी यौनांग के सौंदर्य के लिए ईजाद की गई सर्जरी है. महानगरों का यह एक नया ट्रैंड है.

भले ही इस तरह की सर्जरी का विज्ञापन देखने को नहीं मिलता है, लेकिन कौस्मैटिक सर्जन इस तरह की सर्जरी बड़ेबड़े अस्पतालों में करते हैं. बड़े अस्पतालों में इस तरह की सर्जरी के लिए अलग विभाग हैं. कोलकाता के नामी निजी अस्पताल या कौस्मैटिक सर्जन की वैबसाइट में हार्ट सर्जरी के साथसाथ किडनी, स्किन, लिवर ट्रांसप्लांटेशन के पैकेज के साथ वैजिनोप्लास्टी का भी पैकेज देखने को मिल जाता है. वैजिनोप्लास्टी विभाग के अंतर्गत हाइमेनोप्लास्टी और लाबियाप्लास्टी भी शामिल हैं.

आखिर वैजिनोप्लास्टी क्या है? इन दिनों इस तरह की सर्जरी की मांग क्यों बढ़ रही है? किस आयुवर्ग की महिलाओं में यह अधिक लोकप्रिय है? इस तरह की सर्जरी की सफलता दर क्या है और इस में स्किल फैक्टर क्या क्या हैं?

वैजिनोप्लास्टी एक जैनिटल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी है. लेकिन जैनिटल रिकंस्ट्रक्शन में लिंग परिवर्तन भी शामिल है, पर वैजिनोप्लास्टी से योनि में मनचाहा बदलाव पाया जा सकता है. कोलकाता के कौस्मैटिक सर्जन डा. सप्तऋषि भट्टाचार्य का कहना है कि यह एक तरह की रिकंस्ट्रक्टिव प्लास्टिक सर्जरी है. इसका उद्देश्य मन वैजाइना को डिजाइन करना या कह लीजिए रिकंस्ट्रक्ट करना यानी योनि का पुनर्निर्माण और वह भी जैसा चाहें वैसा. इस रिकंस्ट्रक्शन थ्यौरी के अंतर्गत भी बहुत तरह की सर्जरी शामिल हैं. हाइमेनोप्लास्टी, लाबियाप्लास्टी वगैरह. वैजिनोप्लास्टी लंबे विवाहित जीवन और बच्चे पैदा करने से ढीली पड़ी योनि की दीवार को टाइट करती है. यह सर्जरी दरअसल कमजोर मांसपेशियों को दुरुस्त भी कर देती है. इस के अलावा रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी के अंतर्गत हिप की मांसपेशियों को टाइट कर बढ़ती उम्र का प्रभाव भी कम किया जाता है.

डा. अरिंदम सरकार कहते हैं कि अधेड़ उम्र की ज्यादातर महिलाएं वैजाइना रिकंस्ट्रक्शन के लिए आती हैं. कम उम्र की लड़कियां आमतौर पर हाइमेनोप्लास्टी के लिए आती हैं. बहरहाल, जो भी इस तरह की सर्जरी के लिए उन के पास आती है वह इस बारे में थोड़ीबहुत जानकारी हासिल कर के ही आती है. इसलिए अलग से कुछ ज्यादा कहने की जरूरत नहीं पड़ती है. हां, अगर इस बारे में उन्हें कोई खास जानकारी अलग से चाहिए या सर्जरी को ले कर किसी तरह की आशंका हो तो पहली सिटिंग में उस का निवारण कर दिया जाता है.

इस सर्जरी की इतनी डिमांड है कि कोलकाता के कई छोटेबड़े निजी अस्पतालों में यह सर्जरी हो रही है. हालांकि सभी निजी अस्पतालों में इस के लिए अलग से विभाग नहीं हैं और न ही इस सर्जरी के लिए विज्ञापन दिए जा रहे हैं, बावजूद इस के इस विशेष अंतरंग सर्जरी का अच्छा बाजार जम चुका है.

वैजाइना सर्जरी की चाह क्यों?

विदेश में बार्बी वैजाइना की बहुत मांग है. इस का कारण यह है कि इन दिनों पूरी दुनिया पर खासतौर पर नई पीढ़ी के दिलोदिमाग में वर्चुअल वर्ल्ड का नशा सिर चढ़ कर बोल रहा है. अपने यौनांग में छुरी चलवा कर काटछांट से भी महिलाएं पीछे नहीं हटना चाह रही हैं. कई महिलाओं ने माना कि उन के पति या सैक्स पार्टनर के जोर देने पर इस के लिए वे तैयार हुईं. लेकिन संचिता दास (बदला हुआ नाम) ने अपने पति को सरप्राइज देने के लिए हाइमेनोप्लास्टी करवाने का मन बनाया. अपनी शादी की 10वीं सालगिरह पर वह अपने जीवनसाथी को यह उपहार देना चाहती है.

अब जहां तक हाइमेनोप्लास्टी का सवाल है, तो समाज में इन दिनों एक नया बदलाव भी देखा जा रहा है. पुराने जमाने में शादीब्याह के समय लड़कियों के कौमार्य को बहुत महत्त्व दिया जाता था. लेकिन बाद में खेलकूद में भाग लेने या साइकिल आदि चलाने जैसे विभिन्न कारणों की वजह से लड़कियों में कौमार्य की शर्त कम हुई. लेकिन आजकल फिर से समाज में कौमार्य को महत्त्व दिया जाने लगा है. लड़कियां शादी से पहले हाइमेनोप्लास्टी के लिए जा रही हैं. एक विशेषज्ञ सर्जन का दावा है कि उन के पास हाइमेनोप्लास्टी के बहुत सारे मामले आ रहे हैं. इस में कौमार्य झिल्ली का फिर से निर्माण किया जाता है. दावा यह है कि इस सर्जरी में ऊपरी तौर पर किसी तरह की सर्जरी का कोई निशान नहीं होता है. इसीलिए सैक्स पार्टनर को इस का पता नहीं चल पाता है. दावा यह भी है कि झिल्ली निर्माण के बाद संबंध बनाने पर शीलभंग का प्रमाण भी मिलता है. ऐसे मामले के लिए शादी की तारीख से 4 हफ्ते पहले सर्जरी का सुझाव दिया जाता है.

कल्याणी यूनिवर्सिटी से अंगरेजी साहित्य में पीएचडी करने वाली शुभा भट्टाचार्य (बदला हुआ नाम) वैजिनोप्लास्टी करा चुकी है. शुभा बताती है कि इस बारे में उस ने घर पर किसी को नहीं बताया है. 2 महीने बाद मेरी शादी होने वाली है. जैनिटल रिकंस्ट्रक्शन के बारे में मैं ने अपनी एक सहेली से सुना था. इसीलिए 15 दिन की सैर का बहाना बना कर वह कोलकाता चली आई और यह सर्जरी करवा ली. शुभा का कहना है कि इस विषय पर घर पर खुल कर बात करना असंभव था, इसलिए यह चोरीछिपे करवाई.

कोलकाता के एक निजी कालेज में होटल मैनेजमैंट का कोर्स करने वाली रितिका खन्ना (बदला हुआ नाम) ने भी इस सर्जरी का लाभ उठाया है. इस बारे में उस का कहना है कि यह उस का निजी मामला है. किसी डर या आशंका में उस ने यह सर्जरी नहीं करवाई. बस वह एक बार यह कर के देखना चाहती थी. इसीलिए करवाई.

बहरहाल, जिन्होंने भी इस तरह की सर्जरी के बारे में पहली बार सुना, जाहिर है उन के मन में अब इसे ले कर बहुत सारे सवाल उठेंगे. मसलन, आखिर इस तरह की सर्जरी की जरूरत क्यों पड़ रही है या फिर यह कहा जाए कि किसी मानसिकता के तहत इस किस्म की सर्जरी करवाई जाती है? दूसरे कई फैशन या लाइफस्टाइल ट्रैंड की तरह ही यह भी महज एक तरह का ट्रैंड है? किस तरह की महिलाएं यह सर्जरी करवा रही हैं? इस के फायदों के साथ किस तरह के नुकसान की आशंका है? सर्जरी के लिए कितने दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ता है? सर्जरी के बाद स्वाभाविक जीवन में लौटने में कितना समय लगता है?

जोखिम कम नहीं

2007 में योनि संबंधित किसी भी तरह की सर्जरी का नाम डिजाइनर वैजाइना दिया गया. उस समय अमेरिकन कालेज औफ औबस्टेट्रिशियन ऐंड गाइनोकोलौजिस्ट ने इस बढ़ते ट्रैंड के खिलाफ चेतावनी दी थी. रौयल आस्ट्रेलियन कालेज औफ गाइनोकोलौजिस्ट भी इस ट्रैंड के खिलाफ रहा है. 2009 में ब्रिटिश मैडिकल जर्नल और 2013 में सोसाइटी औफ औबस्टेट्रिशियन ऐंड गाइनोकोलौजिस्ट औफ कनाडा ने इसे गैरजरूरत कौस्मैटिक सर्जरी बताते हुए इस ट्रैंड को रोके जाने पर जोर दिया था. बावजूद इस के 2015 में हुए सर्वे से साफ हो गया कि कोई भी चेतावनी काम न आई. दिनोंदिन यह ट्रैंड फूलाफला और इस का विस्तार हमारे यहां भी हो चुका है.

अब जहां तक जोखिम का सवाल है, तो विशेषज्ञों का मानना है कि इस सर्जरी के बहुत सारे जोखिम भी हैं. सब से पहले तो कुछ साइड इफैक्ट देखने को मिलते हैं. बहुत सारे मामलों में पाया गया कि खून का बहाव रोक पाना डाक्टर के लिए कठिन हो जाता है. वहीं संक्रमण भी एक समस्या है. इस तरह की सर्जरी में 1 से ले कर 3 घंटे तक का समय लग सकता है. यह पूरी तरह से निर्भर करता है योनिद्वार और उस के आसपास की मांसपेशियों पर. सर्जरी के 2 से 5 दिनों के भीतर कामकाज पर लौटा जा सकता है. वैसे 6 सप्ताह का समय लग सकता है. इस दौरान डाक्टर यौन संबंध बनाने से बचने की सलाह देते हैं. इस के अलावा सर्जरी के निशान धीरेधीरे ही जाते हैं. ऐसी सर्जरी बहुत ही अनुभवी सर्जन द्वारा करवाई जानी चाहिए.

अन्य जानकारियां

इस सर्जरी की सुविधा हर बड़े शहर में है. कोलकाता में अपोलो, आमरी, बेलव्यू, कोलंबिया एशिया हौस्पिटल, डीसान अस्पताल, चाणक्य अस्पताल, फोर्टिस जैसे निजी अस्पतालों के अलावा बहुत सारे कौस्मैटिक सर्जनों के क्लीनिकों में भी यह सर्जरी की जाती है. अगर कौस्मैटिक सर्जनों के पास इस के लिए पूरा सैटअप न हो तो वे निजी अस्पताल या नर्सिंगहोम में इस तरह की सर्जरी करते हैं.

अब जहां तक खर्च का सवाल है, तो यह अस्पताल और नर्सिंगहोम पर निर्भर करता है. वैसे औसतन इस सर्जरी में क्व35 से क्व50 हजार तक का खर्च आता है. यह सर्जरी दोनों तरह के लोकल ऐनेस्थीसिया और सामान्य ऐनेस्थीसिया के बाद की जा सकती है. ज्यादातर मामलों में सामान्य ऐनेस्थीसिया पसंद की जाती है, क्योंकि इस तरह की सर्जरी में 1 से 3 घंटे तक का वक्त लग जाता है. कुछ दिनों तक भारीभरकम काम न करने की बंदिश है. 2-4 दिनों में सामान्य चलनाफिरना संभव हो जाता है. लेकिन जहां तक दापंत्य संबंध का सवाल है, तो 2-4 हफ्ते का इंतजार करने की सलाह दी जाती है.

मनोविदों की राय

यह सही है कि अलगअलग कारणों से विभिन्न उम्र की महिलाएं इस तरह की सर्जरी करा रही हैं. वहीं अगर कोई महिला या लड़की पति या अपने सैक्स पार्टनर के दबाव में आ कर इस तरह की सर्जरी के लिए जाती है, तो यह जरूर सोचने वाली बात है. आखिर क्यों? इसे इस तरह देखा जाना चाहिए. शरीर की अंतरिक बनावट में छेड़छाड़ के लिए पति या सैक्स पार्टनर दबाव बना रहा है, तो मान लेना चाहिए कि इस बहुत ही करीबी व आपसी रिश्ते में सब कुछ ठीकठाक नहीं है. यह कहीं किसी तरह की समस्या की ओर ही इशारा करता है, क्योंकि दांपत्य का रिश्ता हो या और कोई भी रिश्ता केवल शरीर के बूते टिक नहीं पाता है. आतंरिकता जरूरी होती है और अगर आतंरिकता है, तो शरीर या उस की बनावट की अहमियत नहीं होती है. ऐसे रिश्ते मजबूत होते हैं.

भारत में वैजिनोप्लास्टी का ट्रैंड भले ही हाल ही में शुरू हुआ हो, लेकिन विदेशों में इस का ट्रैंड पुराना है. 2006-07 में इस की शुरुआत हुई थी और आम भाषा में यह बार्बी वैजाइना सर्जरी के नाम से जानी जाती रही है. लेकिन सर्जरी की भाषा में इस तरह की अंतरंग सर्जरी वैजिनोप्लास्टी, लाबियाप्लास्टी और हाइमेनोप्लास्टी के नाम से जानी जाती है. बहरहाल, इस ट्रैंड को लेकर 2015 में एक सर्वे भी कराया गया, जिसके अनुसार इस साल विश्व भर में करीब 1 लाख महिलाओं ने बार्बी वैजाइना हासिल करने के लिए लाबियाप्लास्टी करवाई. बताया जाता है कि लगभग 50 हजार महिलाओं ने किशोर उम्र की योनि प्राप्त करने के लिए हाइमेनोप्लास्टी का सहारा लिया.