गृहशोभा विशेष

अगर आप की गर्भावस्था सामान्य है, तो इस दौरान कामकाज जारी रखने में कोई नुकसान नहीं है. लेकिन आप को इस दौरान ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. ऐसे कई तरीके हैं, जिन के जरीए आप काम करने के दौरान अपनी गर्भावस्था को आसान बना सकती हैं. गर्भावस्था के दौरान काम करते रहना हमेशा आसान नहीं होता है, लेकिन सही विकल्प चुन कर आप इस अवस्था के दौरान कामकाजी और निजी जीवन में बेहतर संतुलन बना सकती हैं.

पहले के 3 महीने

गर्भावस्था के पहले 3 महीनों के दौरान शरीर में काफी बदलाव हो रहे होते हैं. इस दौरान होने वाले हारमोनल बदलावों का मतलब है कि आप को थकान महसूस होगी. मुमकिन है कि बिना किसी बात के आप रोने लगें. ऐसे में खुद को भी और अपने आसपास के लोगों को भी यह बताने से कि हारमोनल बदलाव के कारण आप के साथ ऐसा हो रहा है, आप को सही ट्रैक पर रहने में मदद मिलेगी.

पोषक स्नैक्स जैसे कटी सब्जियां, फल, योगर्ट, पनीर, दाल, स्प्राउट्स, सोया, दूध और अंडों का सेवन करें, क्योंकि ये गर्भवती कामकाजी महिलाओं के लिए बिलकुल उपयुक्त होते हैं. गर्भवती महिलाओं के लिए दिन में कम से कम 4 बार कैल्सियम युक्त भोजन करना बेहद आवश्यक है.

क्या हो आहार

गर्भवती महिला के लिए अपना मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए डाक्टर द्वारा बताए गए फोलेट और ओमेगा 3 सप्लिमैंट्स लेने भी महत्त्वपूर्ण हैं. ये सभी तत्त्व गर्भ में पल रहे शिशु के उचित विकास के लिए भी आवश्यक होते हैं. दिन भर में लगभग हर 2 घंटे बाद पौपकौर्न, पीनट, पनीर, उबले हुए अंडे और फलों का सेवन करें, क्योंकि भूख या ब्लड में शुगर का स्तर कम होने से उबकाई आ सकती है.

अगर आप गंभीर मौर्निंग सिकनैस की शिकार हैं, तो उस के लिए दवाएं उपलब्ध हैं. प्राकृतिक घरेलू नुसखे भी अपना सकती हैं. इस के अतिरिक्त गर्भवती महिला को नियमित रूप से ठंडा पानी, नीबू पानी, ज्वार का पानी, इलैक्ट्रोल पी कर खुद को हाइड्रेट रखना चाहिए. उसे यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उसे फलों, जूस या सप्लिमैंट्स से पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी मिल रहा हो.

सोने की आदत में लाएं बदलाव

स्वस्थ शरीर के लिए गर्भावस्था मुश्किल समय होता है और संभव है आप को पूरी गर्भावस्था के दौरान थकावट महसूस हो. विशेषतौर पर पहली और तीसरी तिमाही में. अगर मुमकिन हो तो दिन में थोड़ी देर करीब 2 घंटे सो लें. पहली तिमाही में मूत्राशय पर पड़ने वाले अधिक दबाव का मतलब है कि आप को बारबार बाथरूम जाना होगा. इसलिए इस समय की भरपाई के लिए अधिक देर तक सोएं. हर रात कम से कम 10-11 घंटे की नींद जरूर लें.

शिशु तक अच्छे रक्तप्रवाह के लिए रात में अच्छी नींद लेना महत्त्वपूर्ण है और इस से सूजन घटाने में भी मदद मिलेगी.

महत्त्वपूर्ण देखभाल

गर्भावस्था के दौरान अपनी देखभाल करना बेहद महत्त्वपूर्ण है, अपने स्वास्थ्य के लिए भी और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी. अपने वरिष्ठ अधिकारियों से बात कर लें कि अगर आप को समय से पहले छुट्टी मिल जाए तो आप डाक्टर के पास जाने जैसे अतिरिक्त काम कर सकेंगी.

जैसेजैसे गर्भावस्था का समय बढ़ेगा आप के बढ़ते वजन के अनुसार शरीर के गुरुत्वाकर्षण का केंद्र भी बदलेगा. इस वजह से पीठ में दर्द, पैरों में सूजन और मांसपेशियों में अकड़न हो सकती है. अगर आप दिन भर बैठी रहती हैं तो प्रत्येक 2 घंटे के अंतराल पर करीब 5 मिनट टहल लें. आप पैर रखने के लिए अपनी मेज के नीचे एक स्टूल भी रख सकती हैं. अगर आप को खड़ा होना है तो पीठ में दर्द से बचने के लिए स्टूल से एक बार में एक ही पैर उठाएं.

काम और गर्भवस्था में तालमेल

जब आप गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में प्रवेश करेंगी तो शिशु के बढ़ने से आप के मूत्राशय पर दबाव पड़ेगा और आप को बारबार बाथरूम जाना पड़ेगा. इस से आप को बारबार टहलने का मौका मिलेगा. अगर आप किसी भी वजह से सीट से उठें तो बाथरूम तक हो आएं.

गर्भवती महिला को अपने डाक्टरों की अपौइंटमैंट्स और कार्यालय की जिम्मेदारियों को नोट कर रखना चाहिए और इसे घर और औफिस दोनों जगह हमेशा साथ रखें. ज्यादा थकान से बचने के लिए अपने शैड्यूल तक ही सीमित रहें.

गर्भवती महिला को सुनिश्चित करना चाहिए कि वह अपने दिन का शैड्यूल इस तरह तय करे कि उस में आराम के लिए थोड़ा वक्त मिले. ऐसा करने पर उसे अधिक थकान नहीं होगी.

नशा और शराब से दूरी

औफिस से निकल कर सैर पर जाने से खून के थक्के जमने, वैरिकोस वेंस और पैरों में सूजन की आशंका घटेगी. भारीभरकम काम करने या वस्तुएं उठाने से भी बचना चाहिए. इस से पैरों में सूजन नहीं होगी. रात में सोते समय अपने पैर थोड़े ऊपर कर के सोएं.

धूम्रपान महिला और शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है. इस के कारण गर्भपात, समयपूर्ण प्रसव, जन्म के दौरान कम वजन और नवजात की मृत्यु तक की आशंका रहती है. ऐसे में बेहतर यही होगा कि गर्भवती महिला शराब से दूर रहे. फीटल अलकोहल सिंड्रोम से शिशु में गंभीर और जन्मजात विकार हो सकते हैं. ऐसा शराब की बेहद कम मात्रा लेने से भी हो सकता है.

-डा. मोनिका वधावन

(सीनियर कंसल्टैंट, डिपार्टमैंट औफ ओब्स्टट्रिशियन ऐंड गाइनेकोलौजी, फोर्टिस हौस्पिटल, नोएडा)

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