दीवाली के लिए घर की रंगाईपुताई करवाने का सिलसिला शुरू हो चुका है. पेंटिंग शुरू कराने से पहले किनकिन बातों का ध्यान रखना चाहिए, आइए जानते हैं:

घर मरम्मत करा लें

सब से पहले अपने घर की अलगअलग सतहों की जांच करें. आप के घर में लकड़ी या लोहे की सतहें हो सकती हैं. अगर कहीं से लकड़ी टूटी हुई है या लोहा निकल गया है, तो पहले उसे रिपेयर करवा लें. लोहे में जंग लग जाता है जो पेंट होने के बाद भी दिखता है. आजकल मार्केट में जंग या निशान हटाने वाले बहुत सारे उत्पाद मिलते हैं.

अगर लकड़ी पर कहीं दरारें या छेद हों तो उन्हें गोंद या वुड फिलिंग से भरा जा सकता है. अकसर टाइलें उखड़ जाती हैं या किचन या बाथरूम में लगे मार्बल में क्रैक आ जाता है. उसे ठीक करवा लें. घर में अकसर सीपेज की समस्या का सामना करना पड़ता है. इसलिए पेंट कराने से पहले उसे अवश्य ठीक करवा लें और उस के सूखने के बाद ही रंग करवाएं. ऐसा न करने पर पेंट कुछ समय बाद उखड़ जाएगा और दीवारों पर नमी दिखने लगेगी.

सब से जरूरी है यह देखना कि आप के घर के दरवाजों या दीवारों पर कहीं दीमक तो नहीं लगी हुई है. उस के लिए पहले ही ऐंटीटरमाइट का छिड़काव करवा लें. दीवारों पर लगे किसी भी प्रकार के निशानों या फफूंद को प्रैशर वाश जैसे तरीकों से हटाया जा सकता है. ध्यान रहे कि केवल साफ सतह ही पेंट का आधार होती है. दीवार उखड़ रही हो या प्लास्टर झड़ रहा हो तो उसे प्रैशर वाश से समतल किया जा सकता है. सतह जब पूरी तरह से सूख जाए तभी पेंट करवाएं. यह न हो तो रेगमाल से दीवारों को रगड़ने के बाद वाल पुट्टी लगाएं.

प्राइमर लगाना भी जरूरी है

प्राइमर का चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरह के पेंट का प्रयोग कर रही हैं. लैटेक्स पेंट के लिए लैटेक्ट प्राइमर, सौलवैंट थिंड पेंट्स के लिए सौलवैंट बेस्ड प्राइमर का प्रयोग करें.

पेंट का चुनाव

ऐडिटिव्स का इस्तेमाल करते हुए अपने घर को पेंट करना एक नया ट्रैंड है. इस के बहुत फायदे हैं. यह एक स्ट्रौंग बेस प्रदान करता है और रंगों के फैलने का डर नहीं रहता. लेकिन पेंट का चुनाव करना सब से महत्त्वपूर्ण है. आमतौर पर 2 प्रकार के पेंट होते हैं- वाटर बेस्ड और औयल बेस्ड. इस में भी बहुत वैराइटी बाजार में उपलब्ध हैं.

दीवारों और सीलिंग के लिए वाटर बेस्ड या इमल्शन पेंट जो प्लास्टिक पेंट्स के नाम से भी जाने जाते हैं, प्रयोग किए जाते हैं. वाशेबिलिटी के आधार पर भी रंगों का चयन किया जा सकता है. धातु सतह के लिए इनेमल पेंट्स इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है. इन की चमक ही इन की पहचान होती है. कलर का चयन अपने घर के हर कमरे को ध्यान में रख कर करें.

चुनें कमरे के हिसाब से

पेंट कराने से पहले ही पेंटर से बात कर लें कि कितनी मात्रा में पेंट की आवश्यकता होगी, क्योंकि कई बार कोटिंग करने पर ही दीवारों पर रंग खिल कर आता है. पेंट में चमक लाने के लिए उस में फैवीकोल भी मिलाया जा सकता है.

इंटीरियर डिजाइनर, दीप पाठक के अनुसार बाजार में थीम बेस्ड टाइल्स भी मिलती हैं. आप चाहें तो दीवारों पर कोई थीम दे कर उन का प्रयोग कर सकती हैं. इस के अलावा कई पेंट कंपनियां सिगनेचर वाल भी बनाती हैं जिस की कीमत डिजाइन व दीवार की लंबाईचौड़ाई पर निर्भर करती है. यह वाल कमरे की केवल एक दीवार जो कि सामने की तरफ हो सकती है, उसी पर बनती है. जैसे बैडरूम में बैड के सामने वाली दीवार.

लिविंगरूम के लिए कलर

यहां ज्यादा सामान रखा होता है और मेहमान भी इसे ही सब से पहले देखते हैं. यहां एक ही कलर के डार्क व लाइट शेड्स का प्रयोग करें. वार्म रैड, यलो कलर्स से ले कर पीच या रोज कलर लिविंगरूम की शान बढ़ा देंगे. ब्राइट और बोल्ड कलर्स जो आप के फर्नीचर के साथ मैच करते हों, उन्हें आप लगा सकती हैं या कंट्रास्ट कलर भी अच्छे लगते हैं.

दीप पाठक सलाह देते हैं कि अगर साटन या सेमीग्लास फिनिश है तो चौकलेट ब्राउन या डार्क कलर्स अच्छे लगते हैं.

बच्चों का कमरा

बच्चों के कमरे में शाइनी प्राइमरी कलर्स जैसे रैड, ग्रीन, यलो, ब्लू किए जा सकते हैं. साथ ही मजेदार पैटर्न जैसे पोल्का डौट, चैक, नंबर, ज्योमैट्रिकल शेप्स आदि भी शामिल किए जा सकते हैं. परपल, ब्लू, पिंक, ग्रीन सब से अच्छे लगते हैं.

आप की किचन ऐसी जगह है जहां आप का काफी वक्त गुजरता है. उस के साथ वाले कमरे की दीवारों पर जैसा रंग हो वही रंग किचन के लिए चुनें. इस से एक ओपननैस और फ्लो बना रहेगा. यहां लाइट शेड्स सही रहते हैं.

बाथरूम के लिए लाइट ब्लू टोन सब से उत्तम रहती है. आप यहां ग्रीन और पिंक के शेड्स भी लगा सकती हैं. क्रीम, ऐप्रीकोट जैसे कलर एक कंफर्ट और कोजीनैस देते हैं. बाथरूम में डार्क कलर न लगाएं.

वैराइटी हैं बहुत

बाजार में बहुत तरह के पेंट उपलब्ध हैं और हर पेंट की अलग खासीयत है. अपनी आवश्यकता व पसंद के अनुसार आप उन्हें चुन सकती हैं:

डिस्टैंपर: यह सब से आम व सस्ता पेंट है. इसे व्हाइट वाश भी कहा जाता है. यह वाटर, बेस्ड पेंट होता है और इस में चाक, लाइम, वाटर और कुछ कलरिंग एजेंट मिले होते हैं.

इमलशन: इस की खास बात यह है कि यह घर की दीवारों को एक मैट फिनिश और रिच लुक प्रदान करता है. इसे लगाने से दीवार की ड्यूरेबिलिटी भी बढ़ जाती है. इसे लगाने से फफूंदी भी नहीं लगती है, जिस से दीवारें लंबे समय तक खराब नहीं होतीं. इमलशन पेंट वाशेबल होते हैं और इसलिए अगर कोई दागधब्बा लग जाए तो उसे माइल्ड सोप का इस्तेमाल करते हुए कपड़े से साफ किया जा सकता है.

फंक्शनल पेंट्स: बाजार में कुछ ऐसे पेंट उपलब्ध हैं जो न केवल दीवारों को सजाते हैं वरन कुछ खास काम भी करते हैं जैसे कीड़े, बैक्टीरिया, फंगस हटाना. इन पेंट्स में एक सेफ और नौनटौक्सिक मैकेनिज्म होता है जो हमें नुकसान नहीं पहुंचाता.

औयल बेस्ड पेंट्स: ये अत्यधिक ड्यूरेबल होते हैं और घर की दीवारों के लिए सब से उत्तम माने जाते हैं. हालांकि इन्हें सूखने में समय लगता है पर फिर भी ये काफी लोकप्रिय हैं, क्योंकि इन से दीवारों पर ग्लो आता है.

लैटेक्स पेंट्स: इन की क्वालिटी बहुत अच्छी होती है. ये आसानी से धुंधले नहीं होते और औयल बेस्ड पेंट्स की तुलना में इन में कम गंध होती है. यही नहीं, ये न तो उखड़ते हैं न ही इन में दरारें पड़ती हैं. ये पेंट जल्दी सूख जाते हैं और साफ करने के लिए केवल पानी की आवश्यकता पड़ती है.

इनेमल पेंट: ये औयल बेस्ड पेंट होते हैं. ज्यादा बेहतर चिपकने की क्षमता होेने के कारण ये कहीं अधिक ड्यूरेबल होते हैं. डल और ग्लौसी दोनों फिनिश में उपलब्ध ये पेंट घर की दीवारों के साथसाथ फर्नीचर पर भी इस्तेमाल किए जाते हैं.

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