गृहशोभा विशेष

बाथरूम घर का एक अहम हिस्सा है, जहां से हम सभी अपने दिन की शुरुआत करते हैं. कई लोग अपने बैडरूम और लिविंगरूम को तो चमका कर रखते हैं, लेकिन बाथरूम को साफ करने की जहमत नहीं उठाते. जबकि विशेषज्ञों की माने तो बाथरूम की सफाई भी उतनी ही जरूरी है, जितनी घर के अन्य हिस्सों की, क्योंकि बाथरूम की स्वच्छता का सीधा असर हमारे शरीर पर पड़ता है.

गंदा टौयलेट बहुत सी बीमारियों और इन्फैक्शन को दावत देता है. अगर यह इन्फैक्शन एक बार शरीर पकड़ ले तो उस से पीछा छुड़ाने में महीनों लग जाते हैं. इस का सब से गहरा असर शरीर के इम्यून सिस्टम पर पड़ता है, क्योंकि गंदी टौयलेट सीट पर बसे कीटाणु शरीर को बीमारियों के हवाले कर देते हैं. मसलन, युरिन इन्फैक्शन, स्किन इन्फैक्शन होने की संभावनाएं प्रबल हो जाती हैं. इन बीमारियों से दूर रहने के लिए जरूरी है कि टौयलेट की साफसफाई को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर लें.

नियमित सफाई

– बाथरूम की नालियों में ऐंटीबैक्टीरियल क्लींजिंग सौल्यूशन डालें. इस से नाली में से बदबू नहीं आएगी.

– टौयलेट की टंकी में हारपिक की गोली या डेंचर क्लीनर गोली डाल कर फ्लश चलाने पर टौयलेट पौट साफ हो जाएगा.

– वाशबेसिन के नल से गंदे हाथ धोने के बाद उस नल पर साफ पानी डाल कर उसे धो दें. जिस से आप के बाद किसी दूसरे सदस्य के प्रयोग करने पर कीटाणु ट्रांसफर न हों.

– हाथ धोने के लिए लिक्विड ऐंटी बैक्टीरिया साबुन का प्रयोग करें.

– टौवेल और स्पौंज रोज साफ करें. गीले टौवेल को नियमित धूप में सुखाएं.

– टौयलेट के फर्श, टौयलेट सीट, सिंक, मिरर, शावर, मैट्स और बकेट्स भी रोज साफ करें.

सावधानियां

बाथरूम हाइजीन के लिए कुछ सावधानियां:

– सब से पहले महत्त्वपूर्ण बात यह है कि फ्लश करने से पहले कमोड के ढक्कन को बंद कर दें क्योंकि फ्लश के द्वारा आने वाली पानी की बौछार में कीटाणु रहते हैं.

– शावर हैड को हमेशा साफ रखें, क्योंकि जिस एरिया में खारा पानी आता है वहां सफेद फंगस लगने की संभावना ज्यादा रहती है जिस से कीटाणु पनपते हैं.

– यदि आप के बाथरूम में शावर के लिए अलग से क्यूबिकल,

– कैबिनेट या परदा लगा कर विभाजन किया गया है, तो गीला होने पर उसे सुखा कर ऐंटी बैक्टीरियल क्लीनर से साफ कर लें. इस से उस में सफेद फंगस नहीं लगेगी.

– ऐंटीबैक्टीरियल वाइप हमेशा अपने बाथरूम में रखें. इस से टौयलेट के हैंडल, दरवाजे के हैंडल, नल व लाइट स्विच रोज साफ करें.

– अपने टूथब्रश को हर 3 महीने में बदल दें और इस का प्रयोग किसी और को न करने दें. न ही खुद किसी और के ब्रश का प्रयोग करें.

– चेहरे, हाथ और पैर को पोंछने के लिए अलगअलग टौवेल रखे. किसी दूसरे की टौवेल का प्रयोग न करें.

– जब भी लिक्विड सोप से हाथ साफ करें, उसे कुनकुने पानी से ही धोएं. इस से कीटाणु पूरी तरह निकल जाते हैं.

– बाथरूम में जाने के लिए एक बाथरूम स्लीपर अलग से रखें. इस से कीटाणु टौयलेट से बाहर नहीं जाएंगे.

– टौयलेट को साफ करते समय अपने हाथों में ग्लब्स पहनें व मुंह व सिर को अच्छी तरह से कवर कर लें. इस से कीटाणु आप के  रीर में नहीं जाएंगे. बाद में ऐंटीसैप्टिक लोशन की कुछ बूंदें पानी में डाल कर उस से स्नान जरूर करें.

– कभी भी नहाने के बाद अपने कपड़े उतार कर बाथरूम की फर्श पर न रखें. इस से कपड़ों में बाथरूम के कीटाणु लग जाएंगे.

– टूथपेस्ट और शेविंग किट को हमेशा अलगअलग रखें.

टौयलेट सीट की सफाई

– टौयलेट सीट लाइट कलर की ही प्रयोग करें. इस से गंदगी तुरंत पता चलेगी.

– टौयलेट सीट साफ करने के लिए सख्त ब्रश का इस्तेमाल करें, ताकि गहरे दागधब्बे आसानी से साफ हो सकें.

– आजकल आधुनिक तकनीकों से बने कई टौयलेट क्लीनर मार्केट में हैं. आप उन में से किसी को अपनाएं. ये टौयलेट को स्वच्छ व चमकदार बनाते हैं और कीटाणुओं का सफाया भी करते हैं.

– सफाई के बाद पूरी टौयलेट सीट को फिनायल के पानी से धोएं. इस से बाथरूम की बदबू भी चली जाएगी.

साप्ताहिक क्लीनिंग

– बाथरूम की नालियों की सफाई के लिए उन में ऐसिड व 1 कप खाने का सोडा डालें. उस के बाद 1 कप सफेद सिरका डाल दें.

– बाथरूम की एअरफ्रैशनर टिकिया को समयसमय पर बदलती रहें.

बच्चों को सिखाएं टौयलेट मैनर्स

बाथरूम की हाइजीन के लिए बहुत जरूरी है कि बच्चों को भी कुछ टौयलेट मैनर्स जरूर सिखाएं, क्योंकि बच्चे इन्फैक्शन से जल्दी प्रभावित होते हैं. अगर बच्चा संकेतों से बात समझाने लायक हो जाए, तो समझ लें कि वह टौयलेट ट्रेनिंग के लिए तैयार है.

बुनियादी प्रशिक्षण

– जब बच्चा बैठना सीख जाए तो उस के लिए प्लास्टिक की पौटी चेयर ले कर आएं और उसे उसी सीट पर बैठा कर पौटी करवाएं. 1-2 बार बैठने पर उस की आदत बन जाएगी.

– घर में पौटी चेयर के पास ही बच्चे की खिलौनों की एक टोकरी भी रखें, ताकि वह पौट सीट से उठने की जिद न कर के उस पर बैठा रहे और खेलता रहे.

– पौटी चेयर इस्तेमाल करने से पहले सीट में थोड़ा पानी डालें या टिशू पेपर रख दें, ताकि बाद में सीट की सफाई आसानी से हो जाए.

– आजकल बाजार में ऐसी कई किताबें हैं, जिन में कहानियों के द्वारा बच्चे को पौटी ट्रेनिंग दी जाती है.

VIDEO : फंकी पाइनएप्पल नेल आर्ट

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