गृहशोभा विशेष

घर कितना भी छोटा हो, छोटेछोटे प्रयासों से उसे सुंदर बनाया जा सकता है. लेकिन सुंदरता के साथ घर स्पेशियस भी लगे इस के लिए कुछ इनोवेटिव आइडियाज की जरूरत पड़ती है.

दीवारों का रंग हो कैसा

इस बाबत लिपिका सूद इंटीरियर प्राइवेट लिमिटेड की डायरैक्टर लिपिका सूद बताती हैं कि दीवारों पर सही पेंट कराने से घर के इंटीरियर को एक बड़ा सपोर्ट मिलता है. इस से घर का लुक तो बेहतर होता ही है, साथ ही यह अपने रिफ्लैक्शन से घर के आकार पर भी प्रभाव डालता है. अगर आप का घर छोटा है तो निम्नलिखित टिप्स पर जरूर गौर करें.

– छोटे कमरे में हमेशा हलके रंग का पेंट करवाना चाहिए. क्योंकि हलका रंग कमरे को स्पेशियस बनाता है. दरअसल, हलके रंग बहुत कम लाइट ऐब्जौर्ब करते हैं, जिस से कमरा स्पेशियस लगता है.

– यदि कमरा कम ऊंचा है तो उसे ज्यादा ऊंचा दिखाने के लिए सीलिंग पर फ्लोरोसैंट कलर के स्टिकर लगा दें या फिर वालपेपर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इस से कमरा ऊंचा दिखने लगता है.

– सिर्फ दीवारें ही नहीं बल्कि छोटे कमरे की फर्श भी हलके रंग की होनी चाहिए. इस के लिए हलके रंग के पत्थर या फिर टाइल्स लगवाने चाहिए.

– यदि छोटे कमरों की दीवारों में भी टाइल्स लगवाने की सोच रहे हैं, तो उन का रंग भी हलका ही होना चाहिए.

– वन वाल डार्क का फैशन भले ही इन हो, लेकिन छोटे कमरों में इस फैशन को लागू न करें. हां, यदि आप कुछ अलग ही करना चाहते हैं तो एक ही कलर के दूसरे शेड का इस्तेमाल करें. लेकिन चुनें लाइट शेड ही.

स्टाइलिश फर्नीचर और उन की सैटिंग

लिपिका सूद ने फर्नीचर सिलैक्शन एवं सैटिंग पर निम्नलिखित टिप्स बताए.

– छोटे कमरे के लिए स्टेटमैंट फर्नीचर का चुनाव करें. यानी कमरे को छोटेछोटे फर्नीचर से भरने की जगह कोई ऐसा फर्नीचर चुनें जो कम जगह घेरे और जरूरत को भी पूरा करे. जैसे 1 काउच से यदि आप की जरूरत पूरी हो रही है, तो पूरा सोफासैट रखने की आवश्यकता नहीं है.

– फर्नीचर के साइज के साथ ही उस की सैटिंग का भी विशेष ध्यान रखें. कभी भी फर्नीचर को दीवार से सटा कर इसलिए न रखें कि कमरे की कुछ जगह बच जाएगी. ऐसा करने पर दीवारें खराब होने के साथ ही भरीभरी भी लगती हैं. हमेशा फर्नीचर को दीवार से कुछ इंच छोड़ कर ही रखें.

– छोटे घरों में फर्नीचर सिर्फ उठनेबैठने या सजावट के ही नहीं बल्कि स्टोरेज के भी काम आ सकते हैं. बाजार में सोफा कम बैड व बैड बौक्स तो पहले से ही आ रहे हैं, लेकिन अब डाइनिंग टेबल, सोफासैट और कुछ मौड्यूलर फर्नीचर ऐसे आने लगे हैं, जो जगह भी कम घेरते हैं और स्टोरेज का भी काम करते हैं.

– आजकल बाजार में डिजाइनर फोल्डिंग फर्नीचर भी उपलब्ध हैं. ऐसे फर्नीचर जरूरत पड़ने पर असेंबल कर लिए जाते हैं और जगह बनाने के लिए इन्हें डीअटैच भी किया जा सकता है.

– यह जरूरी नहीं की घर में लकड़ी के भारीभरकम फर्नीचर ही हों, बाजार में प्लास्टिक और फाइबर के डिजाइनर फर्नीचर भी उपलब्ध हैं, जो फर्नीचर की कमी को भी पूरा करते हैं और इन्हें आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर रखा भी जा सकता है. यानी जब भी इंटीरियर में थोड़ा भी बदलाव करने का मन करे, तो फर्नीचर के स्थान में बदलाव कर के इसे अंजाम दिया जा सकता है.

सजावट करें कम

लिपिका कहती हैं कि छोटे घर के इंटीरियर में तो आप को खासतौर से इन बातों पर ध्यान देना चाहिए.

– छोटे कमरे में ड्रैमैटिक पेंटिंग, जो कमरे की कलर थीम से भी मैच करती हुई हो, को लगाया जा सकता है. यह कमरे की रौनक बढ़ाएगी और पेंटिंग का कमरे की कलर थीम से मैच होने से कमरा भराभरा नहीं लगेगा.

– कमरे में रखी टेबल पर फ्लावरवास रखना पुराना ट्रैंड हो गया है. अब टेबल को फ्री रखें और कमरे की किसी साइड में एक सुंदर और आकार में बड़ा टैराकोटा, चीनी मिट्टी या किसी धातु से बना पौट, वास या आर्टिकल सजा दें.

– मिरर डैकोरेशन वैसे तो काफी पुराना आइडिया है, लेकिन छोटे घरों के लिए एकदम परफैक्ट है. यदि मिरर डैकोरेशन को इनोवेटिव तरीके से किया जाए, तो यह घर की रौनक के साथ ही घर को स्पेशियस दिखाने का भ्रम भी बना देता है. लिपिका बताती हैं कि आजकल कमरे की एक दीवार को मिरर पैनल से कवर करना ट्रैंड में है. खासतौर पर घर के ड्राइंगरूम में इस तरह का इनोवेशन किया जा सकता है. क्योंकि यह कमरा हर घर का ऐंट्रैंस पौइंट होता है. इस कमरे की साइज से ही कोई घर के छोटेबड़े होने का अंदाजा लगा सकता है.

– डिजाइनर कारपेट इंटीरियर का बहुत महत्त्वपूर्ण हिस्सा है. लेकिन छोटे घरों में स्ट्रिप कारपेट का इस्तेमाल करना चाहिए. इस से कमरा लंबा दिखता है.

– यदि आप स्टूडियो फ्लैट में रह रहे हैं तो जाहिर है कि आप को एक ही कमरे में ही थोड़ेथोड़े स्थान पर हर कमरे की जरूरत का सामान रखना होता है. ऐसे में कारपेट सैपरेटर का काम कर सकता है. इस के लिए आप छोटे  कारपेट का इस्तेमाल कर एक ही कमरे में अलगअलग काम के लिए ऐरिया डिवाइड कर सकते हैं.

– वैसे मार्केट में आ रहे डिवाइडर्स भी छोटे आशियाने के लिए अच्छा विकल्प हैं. इन्हें एक ही कमरे में अलगअलग काम करने के लिए या प्राइवेसी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

– ओवरहैड कैबिनेट भी डैकोरेशन का ही हिस्सा हैं. यदि कमरा छोटा है और सामान ज्यादा है तो ओवरहैड कैबिनेट स्टोरेज के साथ जगह की भी बचत करते हैं. यदि ओवरहैड कैबिनेट न बनवा सकें तो फाल्स सीलिंग भी एक अच्छा विकल्प है.

खिड़की और दरवाजों पर करें गौर

लिपिका ने बताया कि घर में खिड़की और दरवाजों का काम सिर्फ 2 कमरों को सैपरेट करने का नहीं होता बल्कि अब ये घर के इंटीरियर में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. खासतौर पर जब घर छोटा हो तो इन की भूमिका और अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है. साथ ही इनोवेशन के कई विकल्प भी खुल जाते हैं.

– कमरा छोटा है तो खिड़कियों को हर वक्त भारीभरकम परदों से कवर कर के न रखें. हो सके तो उन्हें अनकवर्ड रखें. इस से कमरे में रोशनी भी आएगी और कमरा भराभरा नहीं लगेगा.

– यदि परदे लगाने ही हैं तो आजकल बाजार में शिमरी करटेंस आ रहे हैं. ये पारदर्शी होते हैं लेकिन बहुत अट्रैक्टिव लगते हैं. इन में भी हलके रंग के परदों का इस्तेमाल करें.

– आजकल बाजार में डिजाइनर दरवाजे आ रहे हैं. जिन में ग्लास डोर्स इन ट्रैंड हैं. इसलिए वुडेन डोर्स की जगह सेमी ग्लास डोर्स घर में लगवाएं. इस से कमरा सैपरेट हो जाएगा और बंदबंद सा भी नहीं लगेगा.

लाइट्स की सैटिंग भी हो नई

छोटे घरों में लाइट्स इंटीरियर को फोकस करने के साथ उस की स्पेस पर भी प्रभाव डालती हैं. आइए जानते हैं कैसे.

– ओवरहैड लाइट्स का फैशन तो एवरग्रीन है, लेकिन कुछ नया ट्राय करना है तो आप अपने घर में बिलो हैडलाइट्स की सैटिंग कराएं. इस के लिए आप फ्लोर लाइट्स, डिजाइनर लैंप्स, हैंगिंग लाइट्स का विकल्प चुन सकते हैं.

– वैसे घर में नैचुरल लाइट्स का अच्छा सोर्स भी होना चाहिए. इस के लिए खिड़कियों पर वुडेन वर्क कराने की जगह उन पर ग्लास वर्क कराएं. इस से सूर्य की रोशनी घर के अंदर आ सकेगी.

– कमरे में कितनी रोशनी की आवश्यकता है, उस हिसाब से लाइट अरैंजमेंट होने चाहिए. जैसे, बैडरूम में मीडियम लाइट्स के लिए वौल लैंप्स से भी काम चल सकता है. वहीं स्टडी रूम के लिए ज्यादा रोशनी की जरूरत होती है. इस लिए यहां ओवरहैड लाइट्स ही होनी चाहिए.

– आप का डाइनिंग ऐरिया कितना ही छोटा क्यों न हो, आप डाइनिंग टेबल पर हैंगिंग लाइट लगा कर सिर्फ उतने पोर्शन को फोकस करेंगे तो कमरे का साइज छोटा है या बड़ा ज्यादा पता नहीं चलेगा.

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