कुछ ऐसे सजाएं बच्चों का कमरा

By Grihshobha team | 11 August 2017

आप पूरे घर को किस तरह सजाएं, कुछ ही देर में सोच सकती हैं लेकिन बच्‍चे का कमरा किस तरह डेकोरेट करें, इसमें बहुत दिमाग लगाना पड़ता है. हर बच्‍चे की आदत बिल्‍कुल अलग होती है और उसका कमरा भी इन्‍हीं आदतों के अनुसार होना चाहिए. हालांकि, आप खुद से सोच-समझ कर बच्‍चों के कमरे को रोचक और आरामदायक बना सकती हैं. इसके लिए आपको कई बातों का ध्‍यान रखना चाहिए, जैसे- बच्‍चे के सोने की जगह ठीक हो और कमरे में बाहर की खुली हवा भी आ सकें.

कमरे में ही बच्‍चा, छोटे-छोटे खेलों को खेल पाएं, इतनी जगह अवश्‍य होनी चाहिए. बेड ज्‍यादा ऊंचाई पर न हो, वरना उससे गिरकर उसे चोट लग सकती है. कमरे को डिजाइन करते समय बच्‍चे की उम्र, बच्‍चों की संख्‍या और बेटा व बेटी या का भी ध्‍यान रखें. आइए जानते हैं बच्‍चे के कमरे को डिजाइन करते समय और किन बातों का ध्‍यान रखना चाहिए.

रंग-बिरंगा रखें

आप पूरे घर को डीसेंट रखिए, लेकिन बच्‍चों के कमरे को सुंदर और चार्मिंग बनाएं. उसे खूब रंग-बिरंगा रखें. इससे बच्‍चों को अच्‍छा लगेगा और वो अच्‍छा वक्‍त कमरे में व्‍यतीत करेंगे.

पर्याप्‍त स्‍थान

बच्‍चों के कमरे में ज्‍यादा सामान न रखें, पर्याप्‍त स्‍थान रहने दें. ताकि बच्‍चे कमरे में ही खिलौने और किताबों को आराम से फैलाकर खेल सकें. इससे उन्‍हें चोट लगने का डर भी नहीं रहेगा.

डिजाइनर बेड

इन दिनों, मार्केट में बच्‍चों के लिए कई तरह के बेड उपलब्‍ध हैं. अगर आपके घर में बच्‍चों वाले कमरे में कम जगह है तो उस हिसाब से भी अच्‍छे बेड मिल जाते हैं. कमरे के क्षेत्रफल के हिसाब से भी आप बेड का चयन करें, ताकि उसे वहां फिट करवाने में दिक्‍कत न आएं. बंक बेड भी अच्‍छा विकल्‍प है.

मिनी आर्ट गैलरी बनाएं

बच्‍चे को कमरे को सजाने का सबसे अच्‍छा तरीका, वहां आर्ट गैलरी बनाना भी हो सकता है. इससे बच्‍चे को कला में रूचि आएगी या आप कई तस्‍वीरों को भी लगा सकते हैं जो उसके साथ हों.

वालपेपर

बच्‍चे के कमरे को वालपेपर से भी सजाया जा सकता है. यह सबसे सरल विकल्‍प है जिसके लिए बहुत मेहनत करने की आवश्‍यकता भी नहीं पड़ती है और बच्‍चे को बोरिंग भी महसूस नहीं होगा. 2 से 3 सालों के बाद आप चाहें तो वॉलपेपर बदल भी सकते हैं.

खेलने की जगह

बच्‍चे के कमरे को सजाने से पहले उसके खेलने का विशेष ध्‍यान रखें. कमरे में पर्याप्‍त स्‍थान रखें, सभी खिलौने ऐसे रखें जो उसकी पहुँच में हों और उसके कुछ दोस्‍त भी आकर खेल लें.

आप पूरे घर को किस तरह सजाएं, कुछ ही देर में सोच सकती हैं लेकिन बच्‍चे का कमरा किस तरह डेकोरेट करें, इसमें बहुत दिमाग लगाना पड़ता है. हर बच्‍चे की आदत बिल्‍कुल अलग होती है और उसका कमरा भी इन्‍हीं आदतों के अनुसार होना चाहिए. हालांकि, आप खुद से सोच-समझ कर बच्‍चों के कमरे को रोचक और आरामदायक बना सकती हैं. इसके लिए आपको कई बातों का ध्‍यान रखना चाहिए, जैसे- बच्‍चे के सोने की जगह ठीक हो और कमरे में बाहर की खुली हवा भी आ सकें.

कमरे में ही बच्‍चा, छोटे-छोटे खेलों को खेल पाएं, इतनी जगह अवश्‍य होनी चाहिए. बेड ज्‍यादा ऊंचाई पर न हो, वरना उससे गिरकर उसे चोट लग सकती है. कमरे को डिजाइन करते समय बच्‍चे की उम्र, बच्‍चों की संख्‍या और बेटा व बेटी या का भी ध्‍यान रखें. आइए जानते हैं बच्‍चे के कमरे को डिजाइन करते समय और किन बातों का ध्‍यान रखना चाहिए.

रंग-बिरंगा रखें

आप पूरे घर को डीसेंट रखिए, लेकिन बच्‍चों के कमरे को सुंदर और चार्मिंग बनाएं. उसे खूब रंग-बिरंगा रखें. इससे बच्‍चों को अच्‍छा लगेगा और वो अच्‍छा वक्‍त कमरे में व्‍यतीत करेंगे.

पर्याप्‍त स्‍थान

बच्‍चों के कमरे में ज्‍यादा सामान न रखें, पर्याप्‍त स्‍थान रहने दें. ताकि बच्‍चे कमरे में ही खिलौने और किताबों को आराम से फैलाकर खेल सकें. इससे उन्‍हें चोट लगने का डर भी नहीं रहेगा.

डिजाइनर बेड

इन दिनों, मार्केट में बच्‍चों के लिए कई तरह के बेड उपलब्‍ध हैं. अगर आपके घर में बच्‍चों वाले कमरे में कम जगह है तो उस हिसाब से भी अच्‍छे बेड मिल जाते हैं. कमरे के क्षेत्रफल के हिसाब से भी आप बेड का चयन करें, ताकि उसे वहां फिट करवाने में दिक्‍कत न आएं. बंक बेड भी अच्‍छा विकल्‍प है.

मिनी आर्ट गैलरी बनाएं

बच्‍चे को कमरे को सजाने का सबसे अच्‍छा तरीका, वहां आर्ट गैलरी बनाना भी हो सकता है. इससे बच्‍चे को कला में रूचि आएगी या आप कई तस्‍वीरों को भी लगा सकते हैं जो उसके साथ हों.

वालपेपर

बच्‍चे के कमरे को वालपेपर से भी सजाया जा सकता है. यह सबसे सरल विकल्‍प है जिसके लिए बहुत मेहनत करने की आवश्‍यकता भी नहीं पड़ती है और बच्‍चे को बोरिंग भी महसूस नहीं होगा. 2 से 3 सालों के बाद आप चाहें तो वॉलपेपर बदल भी सकते हैं.

खेलने की जगह

बच्‍चे के कमरे को सजाने से पहले उसके खेलने का विशेष ध्‍यान रखें. कमरे में पर्याप्‍त स्‍थान रखें, सभी खिलौने ऐसे रखें जो उसकी पहुँच में हों और उसके कुछ दोस्‍त भी आकर खेल लें.

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