जमीन खरीदकर मनमाफिक आशियाना बनवाने की चाह रखने वालों की कमी आज भी कुछ कम नहीं. क्या आपकी भी कुछ ऐसी ही ख्वाहिश है? अगर जवाब हां में है तो घर का कंस्ट्रक्शन कराते समय कुछ चीजों का खास ध्यान रखना जरूरी है.

कंस्ट्रक्शन से पहले जाहिर है सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आप सॉयल टेस्टिंग तो कराएंगे ही साथ ही घर को भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा से सुरक्षित रखने के लिए भूकंप-रोधी संरचना तैयार कराने पर भी विचार करेंगे. इन सब के साथ यह जरूर ध्यान रखें कि जब आप घर का नक्शा या फिर डिजाइन किसी आर्किटेक्ट से डिजाइन कराएं तो उसे सीढ़ियों की ऊंचाई और चौड़ाई पर विशेष ध्यान देने को कहें.

अक्सर ऐसा भी होता है कि ज्यादातर लोग आर्किटेक्ट की मदद के बगैर ही कांट्रेक्टर के बताए नक्शे के मुताबिक प्लॉट पर कंस्ट्रक्शन कराना आरंभ कर देते हैं. इसका असर तब दिखता है जब वे घर में रहना शुरू करते हैं. ऐसी ही कुछ परेशानियों में से एक हैं सीढ़ियां. अक्सर प्लॉट का आकार छोटा होने पर तंग सीढ़ियां बना दी जाती हैं और फिर उस घर में रहने वाले जब भी सीढ़ियों पर चढ़ते उतरते हैं तो हमेशा तंग ही होते रहते हैं. ऐसे में कुछ चीजों का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

– सीढ़ियों  बनाते समय हेड रूम का ध्यान रखना जरूरी है, जिससे कि लंबे व्यक्तियों का सिर छत से न टकराए. अक्सर ऐसा होता है कि जल्दीबाजी में सीढ़ियों से उतरते हुए सिर अथवा माथा छत या छज्जे से टकरा जाता है और चोट लग जाती है.

-सीढ़ियों को कम से कम 840 एमएम और ज्यादा से ज्यादा एक मीटर तक अपनी जरूरत के अनुसार रखना चाहिए.

-अच्छी सीढ़ी वही है जिसमें चढ़ते और उतरते वक्त आपको बहुत ज्यादा मेहनत न करनी पड़े. आम तौर पर किसी भी वयस्क का एक पग यानी स्टेप 600 एमएम यानी 2 फुट का होता है. इसको ध्यान में रखते हुए ही सीढ़ियों का निर्माण कराएं.

– यह ध्यान रखें कि सीढ़ियों पर ऊपर चढ़ते हुए दुगनी ऊर्जा लगानी पड़ती है, ऐसे में अगर सीढ़ियों ऊंची-नीची होंगी, उनमें सामंजस्य नहीं होगा तो दुर्घटना की संभावना बनी रहेगी.

– घर में इस्तेमाल की जाने वाली सीढ़ियों में 250 एमएम का ट्रेड और 165 एमएम से 175 एमएम तक का राइजर इस्तेमाल किया जा सकता है. आप इसे ज्यादा से ज्यादा 220 एमएम तक का रख सकते हैं. अगर राइजर ज्यादा ऊंचा होगा तो पैर भी ज्यादा ऊंचाई तक उठाने होंगे, जिससे चंद सीढ़ियों  चढ़ने के बाद ही थकान महसूस होने लगेगी.

– सीढ़ियां इस तरह डिजाइन कराई जानी चाहिए कि उस तक आसानी से पहुंचा जा सके.

– अगर कमरों के दरवाजे सीढ़ियों के साथ खुल रहे हों तो ऐसे में कम से कम 310 मिलीमीटर तक की न्यूनतम दूरी जरूर बनाकर रखनी चाहिए. इसका फायदा यह होगा कि कमरे से सीढ़ियों तक आसानी से स्टेप-अप किया जा सकेगा.

– सीढ़ियों को कभी बहुत तंग नहीं रखना चाहिए. ऐसा होने से खासकर ऊपरी मंजिलों पर फर्नीचर चढ़ाने और उतारने में परेशानी का सामना करना पड़ता है.

– सीढ़ियों की डेकोरेशन के लिए तमाम तरह के विकल्प मौजूद हैं. इन्हें सजाने में सबसे ज्यादा भूमिका रेलिंग की होती है. रेलिंग के लिहाज से आयरन या फिर स्टील फिनिश वाली रेलिंग का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.