रखें आय का हिसाब

11 January 2017

आज के युग में अपनी आमदनी का उचित हिसाबकिताब रखना भी आवश्यक हो गया है, क्योंकि आजकल हमारी आमदनी में हमारे अतिरिक्त हमारी सरकार का भी हिस्सा होता है, जिसे हमें आयकर के नाम से अदा करना होता है. अगर आप ने अपनी आय का उचित हिसाब नहीं रखा, तो अपने लगने वाले कर से अधिक कर भी देना पड़ सकता है.

जो व्यक्ति, भागीदारी फर्में, निजी एवं सार्वजनिक कंपनियां आदि किसी व्यापार अथवा पेशे में संलग्न रहती हैं, वे तो अपना हिसाबकिताब रखती ही हैं और अगर उन की सालाना बिक्री 31.3.2011 को समाप्त होने वाले वर्ष में क्व60 लाख से अधिक होती है, तो न केवल उन्हें उचित हिसाबकिताब रखना होता है, बल्कि आयकर की धारा 44 एबी में उन के हिसाबकिताब का औडिट भी किसी चार्टर्ड अकाउंटैंट से कराना आवश्यक है.

अगर आमदनी ब्याज के बजाय आयकर की धारा 194 जे में बताए गए किसी पेशे जैसे वकालत, डाक्टरी, इंजीनियरिंग, अकाउंटैंसी आदि से आय होती है, तो आय की सीमाक्व15 लाख से अधिक होते ही उन्हें भी अपने हिसाबकिताब का औडिट कराना आवश्यक है.

अब हम बात करते हैं उन व्यक्तियों की जिन की आय न तो व्यापार से होती है और न ही किसी पेशे से. दूसरे शब्दों में जिन की आमदनी का जरीया व्यापार या पेशा न हो कर वेतन, किराए, ब्याज, कैपिटल गेन (शेयरों में निवेश से होने वाला मुनाफा) अथवा किसी अन्य स्रोत से होती हैं, तो ऐसे व्यक्तियों के लिए हिसाबकिताब रखने की कोई कानूनी बंदिश तो यद्यपि नहीं है, फिर भी उन की संपूर्ण आय पर उचित कर लगे इस के लिए थोड़ाबहुत हिसाबकिताब किसी डायरी में अवश्य रखना चाहिए ताकि संपूर्ण आय की गणना के साथसाथ उचित कर का भी आकलन हो सके.

आय के अतिरिक्त बचत (अर्जित संपत्तियों) का लेखाजोखा रखना भी आप के हित में होगा, क्योंकि उस के न रखने की दशा में किसी संपदा में किए जाने वाले निवेश के स्रोत को आयकर अधिकारी को समझाना मुश्किल होगा.

जिन व्यक्तियों की आय व्यापार एवं पेशे के अतिरिक्त अन्य स्रोतों से होती है, उन्हें किस तरह अपनी आय, बचत व संपत्तियों का हिसाबकिताब एक डायरी में प्रतिवर्ष रखना चाहिए ताकि आयकर अदा करने व बचत से अर्जित संपत्तियों की पूर्ण जानकारी मिल सके, इस के लिए आप को न तो बहुत अधिक अकाउंटैंसी के ज्ञान की जरूरत है और न ही किसी अकाउंटैंट की सेवाएं लेने की, आप साधारण ज्ञान से ही निम्न प्रकार अपना पूर्ण हिसाबकिताब रख सकते हैं.

आय का हिसाब

आम व्यक्तियों की आय का मुख्य स्रोत वेतन होता है, जिस का भुगतान प्रतिमाह चैक द्वारा या नकद किया जाता है, जिसे आप अपने बैंक के बचत खाते में जमा करा देते हैं. इस का वार्षिक हिसाब डायरी में लिखा जा सकता है.

इसी प्रकार डायरी के एक अन्य पन्ने पर विभिन्न संपत्तियों से प्राप्त मासिक किराए व उस आमदनी पर कटने वाले टैक्स ऐट सोर्स (टीडीएस) का भी हिसाब रखा जा सकता है. डायरी के एक पन्ने पर विभिन्न स्रोतों से मिलने वाले ब्याज का हिसाब लिखा जा सकता है. किसी अन्य स्रोत से अगर कोई आमदनी होती है, तो उसे भी एक अन्य पन्ने पर लिखा जाना चाहिए. इस प्रकार वेतन, किराया, ब्याज व अन्य मदों से होने वाली संपूर्ण आय का ब्योरा डायरी के 4 पन्नों में बड़े आराम से लिखा जा सकेगा तथा विभिन्न मदों से होने वाली आमदनी पर कहांकहां कितनाकितना टैक्स ऐट सोर्स कटा उस की भी जानकारी मालूम हो जाएगी तथा उस का मिलान कर कटौती से संबंधित प्राप्त हुए टीडीएस सर्टिफिकेट से भी कर सकेंगे और किसी ने टीडीएस सर्टिफिकेट नहीं दिया तो उन से मांगा भी जा सकता है.

बचत का हिसाब

समस्त स्रोतों से होने वाली आय की डिटेल्स प्राप्त होने पर एक पन्ने पर एक छोटा सा आयव्यय खाता तथा बैलेंस शीट बनाई जानी चाहिए.
अगर आप उपरोक्त एकत्रित जानकारी अपने चार्टर्ड अकाउंटैंट अथवा कर सलाहकार को देते हैं, तो वह आप की आयकर रिटर्न तुरंत व सही भर सकेगा. इस से गलती की संभावना नहीं रहेगी.
उपरोक्त तरीके से हिसाबकिताब रखने से न केवल आप को आयकर रिटर्न भरने में सुविधा होगी वरन आप को स्वयं की अपनी आय, व्यय, बचत तथा विभिन्न संपत्तियों के हिसाबकिताब की भी पूर्ण जानकारी मिलेगी. उपरोक्त लेखाजोखा आप की आर्थिक स्थिति का सूचक होने से साल दर साल आप की आर्थिक उन्नति अथवा अवनति को भी दर्शाता रहेगा.

आय का हिसाब रखने का तरीका

माह   वेतन   प्रौवीडैंट फंड    कटौतियां      अन्य कटौतियां वेतन जो बैंक में

                  टीडीएस       जमा किया गया

अप्रैल 2011   20,000      2,400 350   -     17,250

मई 2011     20,000      2,400 350   -     17,250

जून 2011    20,000      2,400 350   -     17,250

जुलाई 2011   20,000      2,400 350   -     17,250

अगस्त 2011  20,000      2,400 350   -     17,250

सितंबर 2011  20,000      2,400 350   -     17,250

अक्तूबर 2011  20,000      2,400 350   -     17,250

नवंबर 2011   20,000      2,400 350   -     17,250

दिसंबर 2011  20,000      2,400 350   -     17,250

जनवरी 2012  20,000      2,400 350   -     17,250

फरवरी 2012  20,000      2,400 350   -     17,250

मार्च 2012    20,000      2,400 350   -     17,250

बचत का हिसाब रखने का तरीका

व्यय   राशि   आय   राशि

प्रौवीडैंट फंड    28,800      वेतन   2,40,000

जीवन बीमा    10,000      किराए से आमदनी     1,20,000

इनकम टैक्स   4,200 ब्याज से आमदनी     600

घर खर्च      1,20,000    शेयरों से मुनाफा      5,000

आय की व्यय से अधिकता (बचत)    2,03,800    अन्य स्रोतों से आमदनी       1,200

योग   3,66,800    योग   3,66,800

आज के युग में अपनी आमदनी का उचित हिसाबकिताब रखना भी आवश्यक हो गया है, क्योंकि आजकल हमारी आमदनी में हमारे अतिरिक्त हमारी सरकार का भी हिस्सा होता है, जिसे हमें आयकर के नाम से अदा करना होता है. अगर आप ने अपनी आय का उचित हिसाब नहीं रखा, तो अपने लगने वाले कर से अधिक कर भी देना पड़ सकता है.

जो व्यक्ति, भागीदारी फर्में, निजी एवं सार्वजनिक कंपनियां आदि किसी व्यापार अथवा पेशे में संलग्न रहती हैं, वे तो अपना हिसाबकिताब रखती ही हैं और अगर उन की सालाना बिक्री 31.3.2011 को समाप्त होने वाले वर्ष में क्व60 लाख से अधिक होती है, तो न केवल उन्हें उचित हिसाबकिताब रखना होता है, बल्कि आयकर की धारा 44 एबी में उन के हिसाबकिताब का औडिट भी किसी चार्टर्ड अकाउंटैंट से कराना आवश्यक है.

अगर आमदनी ब्याज के बजाय आयकर की धारा 194 जे में बताए गए किसी पेशे जैसे वकालत, डाक्टरी, इंजीनियरिंग, अकाउंटैंसी आदि से आय होती है, तो आय की सीमाक्व15 लाख से अधिक होते ही उन्हें भी अपने हिसाबकिताब का औडिट कराना आवश्यक है.

अब हम बात करते हैं उन व्यक्तियों की जिन की आय न तो व्यापार से होती है और न ही किसी पेशे से. दूसरे शब्दों में जिन की आमदनी का जरीया व्यापार या पेशा न हो कर वेतन, किराए, ब्याज, कैपिटल गेन (शेयरों में निवेश से होने वाला मुनाफा) अथवा किसी अन्य स्रोत से होती हैं, तो ऐसे व्यक्तियों के लिए हिसाबकिताब रखने की कोई कानूनी बंदिश तो यद्यपि नहीं है, फिर भी उन की संपूर्ण आय पर उचित कर लगे इस के लिए थोड़ाबहुत हिसाबकिताब किसी डायरी में अवश्य रखना चाहिए ताकि संपूर्ण आय की गणना के साथसाथ उचित कर का भी आकलन हो सके.

आय के अतिरिक्त बचत (अर्जित संपत्तियों) का लेखाजोखा रखना भी आप के हित में होगा, क्योंकि उस के न रखने की दशा में किसी संपदा में किए जाने वाले निवेश के स्रोत को आयकर अधिकारी को समझाना मुश्किल होगा.

जिन व्यक्तियों की आय व्यापार एवं पेशे के अतिरिक्त अन्य स्रोतों से होती है, उन्हें किस तरह अपनी आय, बचत व संपत्तियों का हिसाबकिताब एक डायरी में प्रतिवर्ष रखना चाहिए ताकि आयकर अदा करने व बचत से अर्जित संपत्तियों की पूर्ण जानकारी मिल सके, इस के लिए आप को न तो बहुत अधिक अकाउंटैंसी के ज्ञान की जरूरत है और न ही किसी अकाउंटैंट की सेवाएं लेने की, आप साधारण ज्ञान से ही निम्न प्रकार अपना पूर्ण हिसाबकिताब रख सकते हैं.

आय का हिसाब

आम व्यक्तियों की आय का मुख्य स्रोत वेतन होता है, जिस का भुगतान प्रतिमाह चैक द्वारा या नकद किया जाता है, जिसे आप अपने बैंक के बचत खाते में जमा करा देते हैं. इस का वार्षिक हिसाब डायरी में लिखा जा सकता है.

इसी प्रकार डायरी के एक अन्य पन्ने पर विभिन्न संपत्तियों से प्राप्त मासिक किराए व उस आमदनी पर कटने वाले टैक्स ऐट सोर्स (टीडीएस) का भी हिसाब रखा जा सकता है. डायरी के एक पन्ने पर विभिन्न स्रोतों से मिलने वाले ब्याज का हिसाब लिखा जा सकता है. किसी अन्य स्रोत से अगर कोई आमदनी होती है, तो उसे भी एक अन्य पन्ने पर लिखा जाना चाहिए. इस प्रकार वेतन, किराया, ब्याज व अन्य मदों से होने वाली संपूर्ण आय का ब्योरा डायरी के 4 पन्नों में बड़े आराम से लिखा जा सकेगा तथा विभिन्न मदों से होने वाली आमदनी पर कहांकहां कितनाकितना टैक्स ऐट सोर्स कटा उस की भी जानकारी मालूम हो जाएगी तथा उस का मिलान कर कटौती से संबंधित प्राप्त हुए टीडीएस सर्टिफिकेट से भी कर सकेंगे और किसी ने टीडीएस सर्टिफिकेट नहीं दिया तो उन से मांगा भी जा सकता है.

बचत का हिसाब

समस्त स्रोतों से होने वाली आय की डिटेल्स प्राप्त होने पर एक पन्ने पर एक छोटा सा आयव्यय खाता तथा बैलेंस शीट बनाई जानी चाहिए.
अगर आप उपरोक्त एकत्रित जानकारी अपने चार्टर्ड अकाउंटैंट अथवा कर सलाहकार को देते हैं, तो वह आप की आयकर रिटर्न तुरंत व सही भर सकेगा. इस से गलती की संभावना नहीं रहेगी.
उपरोक्त तरीके से हिसाबकिताब रखने से न केवल आप को आयकर रिटर्न भरने में सुविधा होगी वरन आप को स्वयं की अपनी आय, व्यय, बचत तथा विभिन्न संपत्तियों के हिसाबकिताब की भी पूर्ण जानकारी मिलेगी. उपरोक्त लेखाजोखा आप की आर्थिक स्थिति का सूचक होने से साल दर साल आप की आर्थिक उन्नति अथवा अवनति को भी दर्शाता रहेगा.

आय का हिसाब रखने का तरीका

माह   वेतन   प्रौवीडैंट फंड    कटौतियां      अन्य कटौतियां वेतन जो बैंक में

                  टीडीएस       जमा किया गया

अप्रैल 2011   20,000      2,400 350   -     17,250

मई 2011     20,000      2,400 350   -     17,250

जून 2011    20,000      2,400 350   -     17,250

जुलाई 2011   20,000      2,400 350   -     17,250

अगस्त 2011  20,000      2,400 350   -     17,250

सितंबर 2011  20,000      2,400 350   -     17,250

अक्तूबर 2011  20,000      2,400 350   -     17,250

नवंबर 2011   20,000      2,400 350   -     17,250

दिसंबर 2011  20,000      2,400 350   -     17,250

जनवरी 2012  20,000      2,400 350   -     17,250

फरवरी 2012  20,000      2,400 350   -     17,250

मार्च 2012    20,000      2,400 350   -     17,250

बचत का हिसाब रखने का तरीका

व्यय   राशि   आय   राशि

प्रौवीडैंट फंड    28,800      वेतन   2,40,000

जीवन बीमा    10,000      किराए से आमदनी     1,20,000

इनकम टैक्स   4,200 ब्याज से आमदनी     600

घर खर्च      1,20,000    शेयरों से मुनाफा      5,000

आय की व्यय से अधिकता (बचत)    2,03,800    अन्य स्रोतों से आमदनी       1,200

योग   3,66,800    योग   3,66,800

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