चंपकवन में आम का एक बाग था. उस बाग में सफेदा, लंगड़ा, हापुस और चौसा जैसे बहुत से आम के पेड़ एक परिवार की रहते थे.

सभी पेड़ आम के मौसम में हरेभरे और फलों से लदे रहते थे. इन सभी पेड़ों में दशहरी आम का पेड़ सब से अलग था. दशहरी बाकी आम के पेड़ों से ज्यादा लंबा और घना था. उस के आमों का स्वाद और खुशबू सब से अच्छी थी.

दशहरी देखने में भी बहुत सुंदर और स्वभाव से बहुत सीधा था. पशुपक्षी और उस के साथी पेड़ उसे काफी पसंद करते थे. इन सभी गुणों के कारण दशहरी को सभी आम के पेड़ों का राजा चुन लिया गया.

दशहरी के राजा बनने पर पूरे चंपकवन में बहुत खुशियां मनाई गईं. दशहरी के सब से अच्छे दोस्त कुटकुट गिलहरी और हरमन तोता तो सब से ज्यादा खुश थे.

कुटकुट को दशहरी की मोटी डालियों पर दौड़ लगाना और चिकनी पत्तियों में छिपना बहुत पसंद था.

hindi kahani aam ke baagh ka raja

दशहरी के राजा बनने की खुशी उस से ज्यादा कुटकुट को थी. कुटकुट अपने दोस्त दशहरी को बधाई देने पहुंची. बोली, ‘‘मेरे दोस्त, दशहरी, राजा बनने पर बहुतबहुत बधाई हो.’’

दशहरी ने चिढ़ते हुए कहा, ‘‘धन्यवाद, कुटकुट. लेकिन तुम्हें जरा भी तमीज नहीं है? सामने आ कर बात करो. मेरे ऊपर बैठ कर नहीं. आखिर मैं तुम सब का राजा हूं.’’

यह सुन कर कुटकुट को बहुत बुरा लगा. वह चुपचाप नीचे उतर गई. उस दिन के बाद कुटकुट ने दशहरी से मिलना कम कर दिया.

हरमन तोता भी दशहरी का पक्का दोस्त था. उसे नईनई जगहों पर घूमने का बहुत शौक था. जब वह वापस लौटता तो दशहरी और हरमन देर तक उन जगहों के बारे में बातें किया करते थे.

इस बार भी जब हरमन वापस आया तो सब से पहले दशहरी को बधाई देने पहुंचा.

एक रसीले आम पर चोंच मारते हुए हरमन ने कहा, ‘‘बधाई हो, दोस्त.’’

‘‘वह सब तो ठीक है, पर बिना पूछे मेरे फलों को खराब करना ठीक है, क्या? और आने से पहले तैयार हो कर आना चाहिए था. आखिर तुम एक राजा से मिलने आए हो.’’ दशहरी ने हरमन को जोर से डांटा.

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बेचारा हरमन चुप हो गया. धीरेधीरे हरमन ने भी दशहरी के पास जाना बंद कर दिया. पर इस से दशहरी को कोई फर्क नहीं पड़ता था. वह बहुत घमंडी हो गया था.

कुछ समय बाद बरसात का मौसम आया. आम के बाग में नन्हेनन्हे पौधे लहराने लगे.

एक दिन एक छोटी सी बेल ने मुसकराते हुए दशहरी से पूछा, ‘‘दादा, क्या मैं आप का सहारा ले लूं? इस से आप की सुंदरता और भी बढ़ जाएगी.’’

दशहरी ने घमंड से कहा, ‘‘मैं यहां का राजा हूं और सुंदर दिखने के लिए मुझे तुम्हारी कोई जरूरत नहीं है. भागो, यहां से.’’

नन्ही बेल दुखी हो गई. वह लंगड़े आम के पेड़ के पास पहुंची.

लंगड़े ने उस नन्ही बेल का स्वागत करते हुए कहा, ‘‘तुम्हारा स्वागत है. तुम मेरे साथ रह सकती हो.’’

अब दशहरी ने लंगड़े का मजाक उड़ाते हुए कहा, ‘‘जिस का खुद का नाम लंगड़ा है. वह दूसरे को सहारा कैसे देगा?’’

इस तरह दशहरी के सभी दोस्त उस से दूर हो गए. पर वह तो अपनेआप में खुश था. उसे किसी की जरूरत नहीं थी.

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एक पूरा साल बीत गया. पर इस बार दशहरी पर बहुत कम फल आए थे. दशहरी को इस का कारण समझ नहीं आ रहा था.

दूसरी तरफ लंगड़े आम का पेड़ फलों से भर गया था. फलों की खुशबू से पूरा बाग महक रहा था. इस मौसम में बेल पर भी फूल आए थे. इन सब के कारण लंगड़़ा आम का पेड़ बहुत सुंदर लग रहा था.

लंगड़े के पास तितलियां, मधुमक्खियां और कई जानवर आते रहते थे. वह भी खुशी से सभी का स्वागत करता था. इन सब गुणों के कारण लंगड़ा आम के पेड़ को आम के बागों का राजा बनाया गया.

दशहरी बहुत दुखी था. दशहरी मन ही मन सोच रहा था कि वह लंगड़ा, जिस का वह हमेशा मजाक उड़ाता था, आज राजा बन गया है. यह सोचतेसोचते वह दुखी हो गया और धीरेधीरे सूखने लगा.

हरमन और कुटकुट ने जब दशहरी की यह हालत देखी तो वे दोनों भी बहुत दुखी हो गए. दोनों दशहरी से मिलने पहुंचे और पूछा, ‘‘ये तुम ने अपना क्या हाल बना लिया है?’’

पुराने दोस्तों को देखते ही दशहरी की आंखों में आंसू आ गए. उस ने रोते हुए कहा, ‘‘सब मुझ से चिढ़ते थे. लंगड़े आम की मुझे नजर लग गई है.’’

हरमन ने यह सुन कर कहा, ‘‘चुप रहो, यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है.’’

‘‘मेरी वजह से कैसे?’’ दशहरी बहुत हैरान हुआ.

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कुटकुट ने समझाते हुए कहा, ‘‘ध्यान से सुनो, सभी पक्षी, जानवर, तितलियां, मधुमक्खियां और दूसरे कीड़े, जो तुम्हारे पास फल खाने और फलों का रस पीने आते हैं, ये सभी तुम्हारे फलनेफूलने में मदद करते हैं, जिसे परागण भी कहते हैं. लेकिन इस साल तुम ने किसी को अपने पास आने नहीं दिया, जिस वजह से परागण नहीं हुआ और तुम्हारे पेड़ में कम फल लगे.’’

हरमन और कुटकुट ने कच्चे आम का स्वाद लेते हुआ कहा, ‘‘अब दशहरी को गलती समझ में आ गई है. अगली बार दशहरी के आम सब से मीठे होंगे.’’

दशहरी ने हंसते हुए घमंड छोड़ कर अपनी टहनियां फिर से सब के लिए फैला दीं.