गृहशोभा विशेष

नीलू बतखी ने 3 अंडे दिए. वह दिन भर अपने अंडों की हिफाजत करती. उसे बेसब्री से अंडों से चूजों के निकलने का इंतजार था. आखिरकार वह दिन भी आ गया. पहले एक अंडे में थोड़ी हरकत हुई. अंडे के ऊपरी हिस्से में एक दरार दिखी और उस में से एक चूजे ने अपना सिर निकाला.

‘‘जल्दी से इस अंडे से बाहर आओ मेरे बच्चे,’’ नीलू उसे देखते ही खुशी के मारे चिल्लाई. ‘‘शाबाश, और जोर लगाओ,’’ नीलू ने उस का उत्साह बढ़ाया.

चूजे ने जोर लगाया और अंडे का खोल फट गया. वह चूजा अंडे की खोल से पूरी तरह से बाहर निकल आया. ‘‘आ जाओ,’’ नीलू ने उस से कहा. वह चूजा अपनी मां की बात सुनते हुए उस के पास चला गया.

तब तक दूसरे अंडे में भी हरकत होने लगी. ‘‘लगता है कि यह अंडा भी फटने वाला है,’’ नीलू की खुशी दोगुनी हो गई.

पहले अंडे की तरह इस अंडे में भी दरार पड़ी और एक चूजे ने अपना सिर निकाला. नीलू ने इस का भी साहस बंधाया, तो वह बाहर निकला और अपनी मां और भाई के पास जा कर खड़ा हो गया.

अब वे सभी तीसरे अंडे के फटने का इंतजार करने लगे. लेकिन उस अंडे में कोई हरकत नहीं हुई. बाकी के 2 चूजे नई दुनिया देख कर इधरउधर जाना चाह रहे थे.

‘‘जरा ठहरो, मेरे बच्चो, अभी यह अंडा फट जाएगा. फिर हम सब साथ में नदी की ओर जाएंगे,’’ नीलू बोली. चूजे चुपचाप अपनी मां की बात सुन रहे थे.

इस तरह से 2 घंटे गुजर गए. लेकिन तीसरा अंडा वैसे ही चुपचाप रहा. अब चूजे इधरउधर जाने लगे. ‘‘लगता है कि इस अंडे से चूजा देर से निकलेगा. चलो, तब तक मैं तुम्हें नदी की सैर करा आती हूं.’’ इतना कहती हुई नीलू अपने बच्चों के साथी नदी की ओर चल पड़ी. उन के जाते ही तीसरे अंडे में दरार दिखी और चूजे ने अपना सिर निकाला.

उस ने आसपास देखा. वहां कोई नहीं था. उस ने जोर लगाया तो अंडे से उस के दोनों पैर भी बाहर आ गए. लेकिन अंडे से उस का पूरा शरीर नहीं निकल पाया. अब उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे. कहां जाए? घर का दरवाजा खुला देख कर वह बाहर निकल गया.

उधर जब अपने बच्चों के साथ नीलू वापस घर लौटी, तो वहां तीसरे अंडे को गायब देख कर उस के तो होश उड़ गए. वह तुरंत बेडरूम में गई. लेकिन वहां अंडा नहीं था. वह किचन में गई. बाथरूम, बरामदा सब जगह देखा, लेकिन वह अंडा कहीं नहीं मिला. ‘‘कहां गया मेरा बच्चा? पता नहीं किस हाल में होगा?’’ नीलू रोंआसी हो गई. उस ने अपने अंडे की कई तस्वीरें बनाईं और उन्हें अपने घर के बाहर और आसपास के घरों पर चिपका दिया.

‘अब जरूर किसी की नजर इन तस्वीरों पर पड़ेगी और मेरा बच्चा मिल जाएगा,’ नीलू ने सोचा.

उस दोपहर को जंपी बंदर ने कुछ ज्यादा ही खाना खा लिया था. इसलिए उसे ठीक से नींद नहीं आ रही थी. वह हवा खाने के लिए अपने घर से बाहर आ कर एक डाल पर बैठ गया. अचानक उस की नजर एक अंडे पर पड़ी, जो जमीन पर दौड़ रहा?था. ‘‘अरे, दौड़ने वाला अंडा?’’ उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ.

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‘‘लगता है कि मैं कोई सपना देख रहा हूं,’’ वह बुदबुदाया. ‘‘तुम सपना नहीं देख रहे हो.’’ पास में ही अखरोट खा रहे चीकू खरगोश ने कहा, ‘‘सचमुच वह दौड़ने वाला अंडा है.’’

‘‘लेकिन एक अंडा कैसे दौड़ सकता है?’’ जंपी ने सवाल किया. ‘‘जहां तक मैं देख रहा हूं, उस अंडे के छोटेछोटे पैर भी हैं. चलो, नीचे चल कर देखते हैं,’’ कह कर चीकू नीचे उतरने लगा.

दोनों ने नीचे आ कर देखा तो उसे अंडे के पैर बतख की तरह लग रहे थे. ‘‘कहीं यह नीलू बतख का खोया हुआ अंडा तो नहीं?’’ जंपी बोला.

‘‘हां, मैं ने भी इस अंडे की तस्वीर अपने महल्ले में देखी है,’’ चीकू याद करते हुए बोला.

‘‘कहीं यह चूजा हमें देख कर भाग न जाए,’’ जंपी ने कहा, ‘‘तुम इस पर नजर रखो तब तक मैं नीलू को बुला लाता हूं.’’ इतना कहते हुए वह नीलू के घर की ओर भागा. ‘‘हां, मुझे इस पर नजर रखनी चाहिए. जंगल में कई खतरनाक जानवर हैं,’’ चीकू बोला.

‘‘क्या मेरा अंडा तुम्हारे महल्ले में है?’’ जंपी की बात सुन कर नीलू हैरान थी. सब तुरंत उस अंडे के पास पहुंचे. ‘‘आ जा मेरा बच्चा.’’ नीलू ने कहा,

तो उस चूजे ने अपनी मां की आवाज पहचान ली. वह तुरंत अपनी मां के पास चला आया. इतना ही नहीं, वह जोर लगा कर अंडे से बाहर भी निकल आया. ‘‘शाबाश.’’ नीलू ने उस के सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा, ‘‘अब मैं कभी तुम्हें अकेला छोड़ कर नहीं जाऊंगी.’’ वह चूजा भी मां से लिपट गया. दूसरे चूजे भी उसे देख कर खुश थे.

‘‘धन्यवाद दोस्तो.’’ नीलू ने जंपी और चीकू का शुक्रिया अदा किया. ‘‘तुम दोनों की वजह से आज मेरा खोया हुआ बच्चा मिल गया.’’ ‘‘हम ने तो बस अच्छे पड़ोसी होने का फर्ज निभाया है.’’ चीकू ने मुसकराते हुए कहा.

‘‘लेकिन मैं ने अपने जीवन में पहली बार दौड़ने वाला अंडा देखा.’’ जंपी ने कहा, तो सब हंसने लगे.

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