जैकी कछुआ समुद्र के किनारे घूम रहा था. तभी उसे टिक…टिक की आवाज सुनाई दी. वह ब्लैकी कौआ था, जो जैकी की पीठ पर बैठ कर टिकटिक कर रहा था.

‘‘हाहाहा,’’ ब्लैकी जैकी को चिढ़ाने के लिए ठहाके लगा रहा था. जैकी ने उस की ओर ध्यान ही नहीं दिया. इस से कौए की शरारत और बढ़ गई. ‘‘यह अच्छी बात नहीं है,’’ परेशान जैकी बोला, ‘‘तुम हर समय अपने बुरे व्यवहार से मुझे परेशान करते रहते हो.’’

‘‘हाहाहा,’’ ब्लैकी कांवकांव करने लगा. ‘‘मुझे ऐसा लग रहा है, जैसे कि राजा एक मरियल घोड़े की सवारी कर रहा है.’’

‘‘मेरी बात सुनो, मैं कछुआ हूं घोड़ा नहीं,’’ जैकी बोला, ‘‘मेरा मजाक मत बनाओ, ब्लैकी. मेरा शरीर भारी है, जो कठोर कवच से बंधा है. इस की वजह से मुझे गरदन घुमाने में दिक्कत होती है. इसलिए मैं न तो पीछे घूम कर देख सकता हूं. न ही हिला कर तुम्हें गिरा सकता हूं. शायद इसी लिए तुम इस का गलत फायदा उठा रहे हो.’’

‘‘वाह, कितनी मजेदार बातें कर रहे हो. हीहीही.’’ ब्लैकी ठहाके लगाता हुआ कछुए की पीठ पर डांस करने लगा.

ब्लैकी की पत्नी कोली नीम के पेड़ से दोनों की लड़ाई देख रही थी. उस ने ब्लैकी के बुरे व्यवहार को रोकने का फैसला किया. वह उड़ कर वहां पहुंच गई.

‘‘ब्लैकी, तुम जैकी को प्रत्येक दिन परेशान करते हो. वह हमारा पड़ोसी है. हमें उस के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए,’’ कोली ने ब्लैकी को डांटते हुए कहा.

ब्लैकी जैकी को छोड़ कर नीम के पेड़ पर आ गया. वह शांत तो हो गया था लेकिन चेहरे पर कोई पश्चत्ताप का भाव नहीं था.

कुछ दिनों तक तो ब्लैकी ने जैकी को परेशान नहीं किया, क्योंकि ब्लैकी नीम के पेड़ पर नए घोंसले बनाने में व्यस्त था.

कुछ दिनों बाद कोली ने 3 अंडे दिए. जल्दी ही अंडे से 3 बच्चे निकले. मातापिता बच्चे की देखरेख में लग गए. समय के साथ ब्लैकी जैकी को भूल गया.

एक दिन जब ब्लैकी बाहर गया हुआ था, जैकी उस नीम के पेड़ के पास पहुंचा. उस ने अपनी पीठ पर एक बास्केट में कुछ मछलियां ले रखी थीं.

उस ने नीचे से कोली को पुकारा, ‘‘कोली बहन, नए बच्चों के आने की शुभकामनाएं.’’

‘‘तुम्हें भी मुबारक, जैकी. तुम तो मेरे बच्चों के चाचा हो,’’ कोली ने मुसकराते हुए कहा.

‘‘हां बहन, इसी लिए तो मैं अपने भतीजों के लिए ताजी मछलियां ले कर आया हूं,’’ जैकी ने बास्केट की ओर इशारा करते हुए कहा.

कोली नीचे आई और मछलियों वाला बास्केट ले कर चली गई.

‘‘धन्यवाद जैकी,’’ कोली ने कहा, ‘‘ब्लैकी के बाहर जाने के बाद खाना ला पाना मुश्किल हो गया है. मैं बच्चों को अकेला नहीं छोड़ सकती. लेकिन तुम्हारे उपहार ने इस समस्या का समाधान कर दिया.’’

‘‘तुम्हारा स्वागत है, कोली. एक अच्छे पड़ोसी को हर समय जरूरत पड़ने पर सहायता करनी चाहिए,’’ कह कर जैकी चला गया.

जब ब्लैकी आया तो कोली ने दयालु कछुए की सारी बात बताई. ब्लैकी खुश होने के बजाय और नाराज हो गया.

‘‘बेवकूफ कछुए को क्या लगता है कि उस के छोटे से उपहार से मैं खुश हो जाऊंगा?’’ ब्लैकी गुस्से में बोला, ‘‘और क्या इस से मैं उसे परेशान करना बंद कर दूंगा?’’

कोली समझ गई कि मेरा पति जैकी को परेशान करने की अपनी बुरी आदत को नहीं छोड़ेगा.

‘वह जैकी को परेशान करने के नएनए तरीके सोचेगा,’ कोली सोच रही थी. वह बहुत दुखी थी. कोली चाहती थी कि ब्लैकी इस बात को समझे कि जैकी को परेशान करना अच्छी बात नहीं है. तभी उस के बच्चे रोने लगे तो वह उस में व्यस्त हो गई.

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दूसरे दिन सुबह ब्लैकी पतली रस्सी ले कर आया. ‘‘ब्लैकी, तुम इस रस्सी का क्या करोगे?’’ कोली ने पूछा. उसे सबकुछ ठीक नहीं लग रहा था.

ब्लैकी ने शरारत भरी नजरों से पत्नी की ओर देखा. ‘‘मैं जैकी को उस के कवच से बांध दूंगा और उसे दौड़ाऊंगा. जैकी छोड़ देने के लिए गिड़गिड़ाएगा तो कितना मजा आएगा.’’

यह सुन कर कोली बहुत दुखी हुई. वह गिड़गिड़ाते हुए बोली, ‘‘जैकी बहुत अच्छा और दयालु है. इतने कठोर मत बनो, ब्लैकी. तुम्हें ऐसी योजना बनाते हुए शर्म आनी चाहिए.’’

ब्लैकी कोली की पूरी बात सुने बिना जैकी की तलाश में निकल पड़ा. कोली चाहती थी कि वह ब्लैकी के पीछे जा कर जैकी को नुकसान पहुंचाने से रोके. लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकी. मौसम बहुत खराब हो रहा था, जिस के कारण बच्चों को अकेला छोड़ना ठीक नहीं था.

तभी हवा का तेज झोंका आया और कौए के घोंसले को उड़ा ले गया. एक बच्चा घोंसले के किनारे में था, वह नीचे गिर गया. कलाबाजी खाता हुआ वह समुद्र में चला गया.

कोली चिल्लाई, ‘‘ बचाओ, कोई मेरे बच्चे को बचाओ.’’

हवा तेज थी. पत्तियां, घास तिनके सब उड़ रहे थे. कोली ने दोनों बच्चों को जोर से पकड़ रखा था. वह यदि बच्चों को छोड़ती, तो हवा में शायद बच्चे भी उड़ जाते.

वह असहाय हो कर नीचे पानी में छटपटाते अपने बच्चे को देख रही थी, तभी वहां जैकी आ गया.

‘‘कोली, तुम चिंता मत करो, मैं तुम्हारे बच्चे को बचाऊंगा,’’ कह कर जैकी छोटे बच्चे की ओर बढ़ गया. बहादुर जैकी तैरता हुआ उस बच्चे तक पहुंचा और जैकी को बचा कर ले आया.

कुछ देर बाद ब्लैकी अपने घोंसले पर पहुंचा. आंखों में आंसू भर कर कोली ने सारी बात बताई और साथ में यह भी बताया कि कैसे उस के बच्चे की जान आज जातेजाते बची. ब्लैकी बहुत शर्मिंदा था. वह जैकी के पास जा कर बोला, ‘‘मुझे माफ करना जैकी. मैं ने तुम्हें परेशान किया, मैं ने तुम्हारा मजाक उड़ाया फिर भी तुम ने मेरे बच्चे की जान बचाई,’’ ब्लैकी ने रोते हुए कहा.

आखिरकार ब्लैकी को अपनी गलती का एहसास हो चुका था. ‘‘ब्लैकी, मुझे खुशी है कि तुम्हें अपनी गलती का एहसास हुआ. आज से हम अच्छे दोस्त हैं और अच्छे पड़ोसी भी.’’ कह कर जैकी ने ब्लैकी को गले लगा लिया.

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