गृहशोभा विशेष

उस दिन क्लास में वंशिका अपने टीचर की बात ध्यान से सुन रही थी, जो भारत में अनेकता में एकता के बारे में बता रही थीं. टीचर ने कहा, ‘‘हमारे देश में कई तरह की विविधताएं हैं. जैसे, भाषा की, ड्रैस की, खाने की, धर्म की और अन्य कई विविधताएं हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए भारत में भाषा की विविधता के ऊपर एक प्रोजैक्ट तैयार करना है. सब से अच्छे प्रोजैक्ट को पुरस्कार दिया जाएगा,’’

वंशिका इस प्रोजैक्ट पर काम करने के लिए बहुत उत्साहित थी, लेकिन उसे भारत की भाषाओं के बारे में जानकारी नहीं थी. उसे समझ नहीं आ रहा था कि इस पर कैसे काम किया जाए. वह जानती थी कि पुस्तकालय या फिर इंटरनैट से इस की जानकारी मिल सकती है लेकिन वह किसी से मिल कर इस बारे में बात करना चाहती थी.

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तभी उसे याद आया कि उस की बहन विद्या को तो कई भाषाओं की जानकारी है. वह जरूर उस की सहायता करेगी. वंशिका ने अपने प्रोजैक्ट की रूपरेखा तैयार की और बहन के कमरे की ओर चल पड़ी.

दरवाजे पर पहुंच कर वंशिका बोली, ‘‘दीदी, क्या मैं अंदर आ जाऊं? मुझे आप की सहायता चाहिए.’’ विद्या अपना होमवर्क कर रही थी. लेकिन उसे साइड में रख कर वंशिका को अंदर बुला लिया.

वंशिका ने अपनी बहन से कहा, ‘‘दीदी, मैं अपने स्कूल के लिए भारतीय भाषाओं के ऊपर एक प्रोजैक्ट तैयार कर रही हूं. क्या आप अपने देश में बोली जाने वाली भाषाओं के बारे में बताएंगी?’’ विद्या ने कहा, ‘‘हमारे देश में कई तरह की भाषाएं बोली जाती हैं. मराठी भाषा महाराष्ट्र, गोआ, दादर और नागर हवेली, दमन और दीव में, असमिया भाषा असम और अरुणाचल प्रदेश में, बंगाली भाषा प. बंगाल, त्रिपुरा, असम के कुछ भाग, झारखंड, बिहार, हिन्दी भाषा मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में बोली जाती है.’’

विद्या ने आगे बताया, ‘‘इन भाषाओं के अलावा भी कई भाषाएं हैं. कर्नाटक में कन्नड़, जम्मू और कश्मीर में कश्मीरी, कोंकणी भाषा गोआ, महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ भाग में भी बोली जाती है. ‘‘हिन्दी के साथसाथ भोजपुरी और मैथिली बिहार और उत्तरप्रदेश के कुछ भागों में बोली जाती है. केरल में मलयालम, सिक्किम में नेपाली, उड़ीसा में उडि़या, उत्तराखंड में संस्कृत, छोटानागपुर में संथाली, सिंध में सिंधी, तमिलनाडु और पांडिचेरी में तमिल, तेलुगु भाषा तेलांगाना के साथसाथ आंध्र प्रदेश, उड़ीसा और कर्नाटक के कुछ भागों, उर्दू भाषा जम्मू और कश्मीर, तेलांगाना, दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में बोली जाती है.’’

‘‘अरे, एक देश में इतनी भाषाएं,’’ वंशिका बहुत हैरान थी. विद्या ने कहा, ‘‘इतनी भाषाओं के बावजूद भारत

में एकता है. कई लोग एक शहर से दूसरे शहर या एक राज्य से दूसरे राज्य नौकरी करने या शिक्षा पाने के लिए जाते हैं. ये लोग अपनी भाषा ले कर तो जाते ही हैं साथ ही वहां की भाषाएं भी सीख लेते हैं.’’ ‘‘लेकिन दीदी, भारत के लोग तो अंगरेजी भी जानते हैं,’’ वंशिका ने कहा.

विद्या बोली, ‘‘यह बात भी सही है. लेकिन यह भारतीय भाषा नहीं है. इस भाषा को हम ने अंगरेजों के शासनकाल में अपनाया था. आज औफिस में, स्कूलों में, कालेजों में तथा अदालतों में अंगरेजी भाषा का प्रयोग किया जाता है.’’ ‘‘इतनी सारी भाषाओं के बावजूद हमारे देश में एकता कैसे है?’’

‘‘क्योंकि एक राज्य ने दूसरे राज्यों की भाषाओं को स्वीकार कर लिया. हर भाषा संवाद या संदेश का माध्यम है. एकदूसरे से जुड़ने के लिए एकदूसरे की भाषाओं का ज्ञान आवश्यक होता है. तुम विश्वास नहीं करोगी, लेकिन अधिकतर चिडि़यां और पक्षी बातचीत में अपनी भाषा का ही प्रयोग करते हैं.’’ वंशिका ने अपनी बहन को धन्यवाद कहा और उन से मिली सूचनाओं के आधार पर उस ने अपना प्रोजैक्ट तैयार कर लिया. वंशिका समझ गई थी कि सिर्फ भारत में ही अनेक भाषाओं के बावजूद एकता नहीं है बल्कि विश्व में भी लोग अनेक भाषाओं में बात तो करते हैं लेकिन सभी एक जीव हैं. भाषा अलग है, लेकिन लोग एक हैं. इसलिए हमें भाषा के आधार पर न तो बंटना चाहिए, न ही बांटना चाहिए.

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