गृहशोभा विशेष

हीरापुर वन नदी के किनारे बसा हुआ था. पानी रोकने के लिए नदी किनारे बांध बना हुआ था लेकिन यह बांध काफी पुराना हो गया था. वन की नई पीढ़ी बहुत आलसी थी. सारा दिन गप्पें लड़ाने और मौजमस्ती में ही इन का समय बीतता.

जोजो ऊदबिलाव नदी किनारे ही रहता?था. एक दिन नदी से नहा कर वह बाहर निकला तो उस की नजर बांध पर पड़ी. बांध में एक जगह दरार पड़ गई थी. जोजो ने पड़ोसियों को वहां आने के लिए आवाज लगाई. आवाज सुन कर हनी हाथी और ब्राउनी भालू दौड़ेदौड़े वहां पहुंचे.

‘‘क्या हुआ जोजो, जोरजोर से क्यों चिल्ला रहे हो. क्या आफत आ गईर् है?’’ ‘‘बांध में एक जगह दरार आ गई है. इस की मरम्मत तुरंत नहीं की गई तो बांध टूट सकता है,’’ जोजो बोला.

‘‘इतनी छोटी दरार के लिए इतना चीख रहे हो. एक दिन में बांध टूट नहीं जाएगा. वैसे भी बांध की मरम्मत की जिम्मेवारी पूरे वन की है. मैं अकेला क्या कर सकता हूं,’’ हनी ने कहा. ‘‘मैं अगले रविवार को एक मीटिंग बुलाता हूं. हम बांध की मरम्मत पर चर्चा कर लेंगे.’’ ब्राउनी ने सुझाव दिया.

रविवार की मीटिंग के बारे में ब्राउनी ने सब को सूचित कर दिया. मीटिंग का समय दोपहर 2 बजे रखा गया. रविवार को 2 बजे जब जोजो मीटिंग के लिए पहुंचा तो गेट पर मंटू बंदर अकेला खड़ा था.

‘‘मीटिंग का समय हो गया है पर कोई आया क्यों नहीं?’’ जोजो ने हैरानी से पूछा.

मंटू ने गेट पर चिपके एक नोटिस की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘सुबह ब्राउनी ने यह नोटिस चिपकाई है. दरअसल, वन के कई पशु आज पिकनिक पर गए हैं. इसलिए कोई मीटिंग में नहीं आया. आज की मीटिंग रद्द कर दी गई है. अब यह अगले रविवार को होगी.’’ जोजो का गुस्सा बढ़ गया. ‘‘यह तो हद हो गई. यहां बाढ़ आने का खतरा है, उस की फिक्र किसी को नहीं. सभी पिकनिक मना रहे हैं.’’ वह पैर पटकता हुआ चला गया.

अगले रविवार को जोजो मीटिंग के लिए पहुंचा. वहां ब्राउनी, हनी सहित कई जानवर बैठे थे. मीटिंग शुरू हुई. जोजो ने कहा, ‘‘नदी के बांध में दरार पड़ रही है. उस की जल्द ही मरम्मत करनी होगी. अगर बांध टूट गया तो नदी का पानी वन में आ जाएगा, हम सब डूब जाएंगे. मैं चाहता हूं कि कल से ही हम यह काम शुरू कर दें.’’

‘‘कल से नहीं. मेरे घर में बहुत काम पड़ा है, क्यों न अगले हफ्ते यह काम शुरू करें,’’ हनी ने कहा. ‘‘हां, मैं भी कुछ दिनों के लिए बाहर जा रहा हूं. मैं जब वापस आऊंगा तो काम शुरू कर देंगे,’’ ब्राउनी ने कहा.

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‘‘अगले रविवार को एक मीटिंग बुला लेते हैं. उस में हम तय कर लेंगे कि काम कब से और कैसे शुरू करना है.’’ जंपी बंदर ने सुझाव दिया. ‘‘बांध की मरम्मत का काम ज्यादा टालना ठीक नहीं. वैसे भी बारिश का मौसम शुरू हो चुका है. क्या पता कब बाढ़ आ जाए.’’ जोजो ने चिंता जाहिर की.

‘‘जोजो, तुम चिंता मत करो. एक हफ्ते में कोई बाढ़ नहीं आएगी. अगले रविवार की मीटिंग में सब कुछ तय कर लेंगे,’’ ब्राउनी ने कहा. मीटिंग खत्म होने के बाद सभी अपने घर को चले गए.

अगले रविवार को मीटिंग फिर शुरू हुई. बाहर तेज बारिश हो रही थी. ब्राउनी आधे घंटे की देरी से पहुंचा. ‘‘माफ करना दोस्तो, बारिश की वजह से आने में देर हो गई.’’ ब्राउनी ने छाता बंद करते हुए कहा.

जोजो ने कहा, ‘‘मैं अभी नदी के पास से आ रहा हूं. दरार काफी बढ़ गई है. बारिश भी तेज हो रही है. आज से ही हमें मरम्मत का काम शुरू कर देना चाहिए.’’ ‘‘इतनी तेज बारिश में हम बांध की मरम्मत कैसे कर सकते हैं. हमें बारिश के रुकने का इंतजार करना चाहिए,’’ हनी ने कहा.

जंपी बोला, ‘‘हां, बारिश में भीगने से मेरी तबीयत खराब हो जाएगी.’’ ब्राउनी ने भी जंपी की बात का समर्थन किया, ‘‘बारिश में काम करना कोई बुद्धिमानी नहीं है. क्यों न हम एक हफ्ते और इंतजार कर लें?’’

जोजो का गुस्सा बढ़ गया, ‘‘मैं ने इस मीटिंग में आ कर गलती की. मुझे नहीं लगता कि तुम सभी बांध की मरम्मत कर पाओगे.’’ अभी जोजो ने बात पूरी भी नहीं की थी कि बाहर जोर की आवाज आई.

थोड़ी देर में गिल्लू गिलहरी हांफते हुए वहां पहुंची. ‘‘नदी का बांध टूट गया है. नदी का पानी इसी ओर आ रहा है. अगर जिंदा रहना है तो सुरक्षित जगह की ओर भागो,’’ गिल्लू ने कहा. मीटिंग छोड़ कर सभी ऊंचे पहाड़ की ओर दौड़े. मंटू उछलतेकूदते हुए दौड़ रहा था. पीछे हनी और ब्राउनी भी थे. जोजो उन के पीछे था.

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नदी का पानी चारों ओर फैलने लगा था. थोड़ी देर में वन पानी में डूब गया. इधर वन के पशु ऊंचे पहाड़ तक सुरक्षित पहुंच चुके थे. वे बारिश की पानी में पूरी तरह भीग गए थे.

ब्राउनी और हनी अपने डूबे हुए घर की तरफ देख कर अफसोस करने लगे, ‘‘काश, हम ने बांध की मरम्मत का काम समय रहते शुरू कर दिया होता तो आज हमारा वन और घर पानी में नहीं डूबता.’’ ‘‘यह सब तुम लोगों के आलस का फल है. बांध की मरम्मत से बचने के लिए तुम सिर्फ मीटिंग बुलाते रहे. अगर मीटिंग के चक्कर में समय नहीं गंवाते और तुरंत काम शुरू कर देते तो हमें इस पहाड़ पर नहीं आना पड़ता. हमारा घर भी बच जाता,’’

जोजो बोला. ‘‘जोजो, हम अपनी गलती पर बेहद शर्मिंदा हैं. बाढ़ का पानी उतरते ही हम बिना समय गंवाए बांध की मरम्मत शुरू कर देंगे, ताकि हमें दोबारा जान बचा कर यहां नहीं आना पड़े,’’ सभी जानवरों ने एक साथ कहा.

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