गृहशोभा विशेष

एक बार हरितवन में आग लग गई. इस से वन के सारे पेड़पौधे जल गए. जंगल के जानवरों ने किसी तरह इस आग से अपनी जान बचाई. लेकिन अगले दिन सभी उस जंगल को छोड़ कर दूसरी जगहों पर जाने लगे.

एक दिन बाद ही पूरा जंगल खाली हो गया. उस वीरान जंगल में अगर कोई बचा था, तो वह था कछुआ जग्गी. वह जंगल छोड़ कर जाना नहीं चाहता था. वह इसी जंगल में पैदा हुआ और पलाबढ़ा था. उस के सारे दोस्त और रिश्तेदार उसे छोड़ कर जा चुके थे. जाते समय उन्होंने जग्गी को भी ये जंगल छोड़ देने के लिए समझाया लेकिन जग्गी नहीं गया.

जग्गी रूखासूखा खा कर जैसेतैसे दिन निकाल रहा था पर जंगल का सूनापन उसे काटने को दौड़ता था. रातों में नींद नहीं आती थी. दोस्तों की बहुत याद सताती थी. न चाहते हुए भी एक दिन उस ने जंगल छोड़ देने का मन बना लिया.

तालाब के किनारे एक जले हुए मोटे पेड़ की छाया में बैठा जग्गी जाने की तैयारी कर रहा था. वह मोटा पेड़ तेज हवा चलने पर जोरजोर से हिलता था.

तभी उस पेड़ की डाल पर दो गिद्ध आ कर बैठ गए. वे दोनों मरे हुए जानवर की तलाश में थे, ताकि उन्हें दावत उड़ाने का मौका मिले. उन्होंने नीचे कछुए को देखा तो बहुत खुश हुए.

पहले गिद्ध टौम ने दूसरे से कहा, ‘‘कछुए का मांस बहुत नरम व मजेदार होता है.’’

‘‘लेकिन उस के कठोर कवच को तोड़ना आसान नहीं,’’ दूसरा गिद्ध जीन बोला.

‘‘मेरे पास एक तरकीब है जिस से इस कछुए का कामतमाम भी हो जाएगा और इस का कवच भी टूट जाएगा.’’ टौम ने जग्गी की ओर उत्सुकता से देखते हुए कहा.

‘‘क्या प्लान है भाई, टौम?’’ जीन ने उत्सुकता से पूछा.

टौम बोला, ‘‘क्या तुम ने बातूनी कछुए की कहानी नहीं सुनी, जिस में दो पक्षी एक कछुए को लकड़ी के सहारे ले कर उड़ते हैं. हम भी इसे ले कर आसमान में उड़ेंगे और ऊंचाई से नीचे गिरा कर पार्टी करेंगे.’’

जीन ने कहा, ‘‘तो आओ चलें, देर किस बात की है.’’

दोनों उड़ कर नीचे आ गए, जहां कछुआ जग्गी बैठा था.

‘‘कहां जाने की तैयारी हो रही है, जग्गी,’’ टौम ने जग्गी से प्यार से पूछा.

‘‘तुम तो जानते हो, हमारा जंगल जल चुका है, जंगल के सारे जानवर जंगल को छोड़ कर चले गए हैं. मैं भी उन्हीं के पास जा रहा हूं,’’ जग्गी ने कहा.

टौम बोला, ‘‘जिस स्पीड से तुम चल रहे हो, ऐसे तो साल भर में भी तुम वहां नहीं पहुंच पाओगे, जहां सारे जानवर गए हैं.’’

जीन बोला, ‘‘भूखप्यास से हालत खराब हो जाएगी, रास्ते में कहीं खानापानी नहीं मिलेगा, दूर तक बस बंजर जमीन है.’’

‘‘क्या जंगल के जानवर बहुत दूर हैं?’’ जग्गी ने पूछा.

‘‘हां, बहुत दूर.’’ दोनों गिद्ध एकसाथ बोले.

जग्गी निराश हो कर बोला, ‘‘इस का मतलब मैं उन तक नहीं पहुंच सकता?’’

‘‘चल कर तो बिलकुल नहीं. हां, उड़ कर उन तक पहुंच सकते हो.’’ टौम ने पंख फड़फड़ाते हुए कहा.

‘‘क्यों मजाक करते हो भाई, भला मैं कैसे उड़ सकता हूं.’’ जग्गी निराश हो कर बोला.

‘‘अगर तुम चलने के लिए तैयार हो तो हम दोनों तुम को ले कर उड़ेंगे और तुम्हारे दोस्तों तक पहुंचा देंगे.’’ टौम ने आसमान की ओर देख कर कहा.

‘‘कैसे?’’ जग्गी ने हैरानी से पूछा.

टौम ने एक लंबी लकड़ी को उठाते हुए कहा, ‘‘तुम इस लकड़ी के बीच में मुंह से पकड़ लेना. हम दोनों लकड़ी का 1-1 सिरा अपने पंजे में पकड़ लेंगे और तुम्हें ले कर उड़ चलेंगे.’’

दोनों लकड़ी ले कर आए और जग्गी को बीच में मुंह से पकड़ने के लिए कहा.

तभी तेज हवा चली और वह मोटा पेड़ जोरजोर से हिलने लगा. जग्गी ने पेड़ को गिरते देखा तो तुरंत उन दोनों गिद्धों को एक ओर धक्का दे दिया.

दोनों बच गए लेकिन वह पेड़ जग्गी के ऊपर गिर गया. फिर कोई हलचल नहीं हुई. दोनों यह भयानक नजारा देख कर सन्नाटे में आ गए.

‘‘हमें बहुत अफसोस है कि हम ऐसे अच्छे नेक दिल कछुए की जान लेना चाहते थे, जिस ने हमारी जान बचाने के लिए अपनी जान की परवा नहीं की.’’ टौम दुखी हो कर बोला.

‘‘हमारी वजह से उस की जान चली गई.’’ कह कर जीन रोने लगा.

तभी जग्गी पेड़ के नीचे से बाहर निकला

और बोला, ‘‘अफसोस करने की जरूरत नहीं,

मेरे मजबूत कवच ने मुझे बचा लिया. मैं बिलकुल ठीक हूं.’’

‘‘अरे वाह, तुम बच गए. यह तो बहुत अच्छी बात है,’’ दोनों चहक कर बोले.

‘‘तुम्हें जिंदा देख कर हमें बहुत

खुशी हुई. आओ, चलो, हम तुम्हें तुम्हारे दोस्तों के पास पहुंचा देते हैं,’’ टौम बोला.

‘‘नहीं दोस्तो, अब मैं ने यह फैसला कर लिया है कि मैं अपने जन्मस्थान को छोड़ कर नहीं जाऊंगा. बल्कि इस जंगल में पेड़पौधे लगा कर इसे फिर से हराभरा बनाऊंगा.’’

जग्गी ने दृढ़ता से कहा. ‘‘वाह, तुम्हारी तरह तुम्हारे इरादे भी कितने नेक हैं, हम दोनों भी इस अच्छे काम में तुम्हारी सहायता करेंगे,’’ जीन बोला.

‘‘हां, हम तुम्हारे साथ हैं,’’ टौम भी बोल पड़ा.

उस दिन से तीनों ने मिल कर पेड़पौधे लगाने शुरू कर दिए.

जग्गी के दोस्तों और रिश्तेदारों को जब इस बात का पता चला तो वे सब लौट आए और जंगल में फिर हरियाली लाने में जुट गए.

कुछ महीनों की मेहनत से ही जंगल हरेभरे पेड़पौधों से भर गया और फिर से उस वन की पुरानी हरियाली लौट आई.

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