सृष्टि और तन्मय इंडिया गेट पर पिकनिक मनाने जाना चाहते थे. लेकिन पापा की व्यस्तता के कारण ऐसा नहीं हो पाता था. लेकिन आने वाले रविवार को जाना तय हो गया. पापामम्मी भी साथ जाने वाले थे.

जब शाम को पापा आए तो बच्चों ने कहा, ‘‘पापा, आने वाले रविवार को हम सभी इंडिया गेट पिकनिक के लिए जरूर जाएंगे.’’

पापा ने अपनी सहमति दे दी. ‘‘ठीक है, रविवार को हम इंडिया गेट जाएंगे. मैं ने अपने सहयोगी तिवारीजी से कह दिया है कि वे भी अपने परिवार के साथ वहीं पहुंच जाएं. उन के दो बच्चे रोमू और रोहित के साथ तुम खेलनाकूदना, मजे करना.’’

सृष्टि और तन्मय बहुत खुश हुए. रविवार को दोनों बच्चों ने फुटबौल और बैडमिंटन अपने बैग में रख लिए. मम्मी से कहा कि लंच के लिए छोले और पूरी बना लें.

4 बजे सभी राजपथ पर पहुंच गए. ‘‘तिवारीजी और उन का परिवार भी रास्ते में है. मैं ने अभीअभी उन से बात की है,’’ डैडी ने गाड़ी चलाते हुए कहा.

‘‘डैडी, गाड़ी तेज चलाओ ताकि हम जल्दी से जल्दी वहां पहुंच सकें.’’ तन्मय और सृष्टि ने कहा.

रविवार की वजह से इंडिया गेट के पास वाले पार्क में बहुत भीड़ थी. राजपथ के किनारे बैलून वाले, खिलौने वाले अपनाअपना सामान बेच रहे थे. कई बच्चे फुटबौल और बैडमिंटन खेल रहे थे, तो कई दरी बिछा कर खापी रहे थे.

तिवारीजी ने एक जगह ढूंढ़ ली थी और इन लोगों का इंतजार कर रहे थे. जल्दी ही सृष्टि के डैडी भी सभी को ले कर वहां पहुंच गए. दरी बिछा कर पिकनिक बास्केट को रख दिया गया. सृष्टि और तन्मय ने फुटबौल और बैडमिंटन निकाल लिए और रोमू, रोहित के साथ खेलने लगे.

रोहित अभी 5 साल का था. वह सब से छोटा था इसलिए बड़े बच्चों को उस का ध्यान रखने के लिए कहा गया था. जल्दी ही तन्मय, सृष्टि और रोमू एकदूसरे से घुलमिल गए.

एक अजनबी इन बच्चों को गौर से देख रहा था. वह धीरेधीरे रोहित की ओर बढ़ रहा?था. पास पहुंच कर वह रोहित से बोला, ‘‘क्या तुम बैलून से खेलना चाहते हो? मैं तुम्हारे साथ खेलूंगा.’’

रोहित खुश हो कर उस के साथ चलने लगा.

सृष्टि खेलते हुए भी रोहित पर नजर रखी हुई थी. लेकिन खेलते हुए उस ने जब रोहित की ओर देखा, तो वह अपनी जगह पर नहीं था. उस ने चारों ओर देखा, पर रोहित नहीं दिखाई दिया.

वह चिल्ला कर बोली, ‘‘तन्मय, रोहित कहां है?’’

तन्मय और रोमू ने?भी चारों ओर देखा पर रोहित नजर नहीं आया. अचानक सृष्टि की नजर रोहित पर पड़ी, जो एक अजनबी के साथ जा रहा था.

‘‘मम्मी, देखो, कोई रोहित को ले कर जा रहा है.’’ सृष्टि ने मम्मी से चिल्लाते हुए कहा.

सभी उस अजनबी की ओर दौड़ पड़े. खतरा भांप कर वह आदमी रोहित को छोड़ कर भागने लगा.

तिवारीजी चिल्लाए, ‘‘रोको…चोर…चोर… पकड़ो उसे. वह मेरे बच्चे को चुराने की कोशिश कर रहा था.’’

भीड़ उस आदमी की ओर दौड़ पड़ी और उसे भागने से पहले पकड़ लिया. दोनों परिवार के लोग भी वहां पहुंच गए. रोहित अपनी मम्मी की गोद में चढ़ गया.

वह आदमी बच्चा चोर था. वह ऐसे बच्चों को तलाशता था, जिस पर उस के परिवार वालों की नजर न हो. फिर उसे बैलून और खिलौने का लालच दे कर पास बुलाता था और उस का अपहरण कर लेता था. भीड़ ने उस आदमी को पुलिस को सौंप दिया.

‘‘हमें अपने बच्चों के प्रति सतर्क रहना चाहिए,’’ इंस्पैक्टर ने कहा. फिर सृष्टि की ओर देखते हुए कहा, ‘‘सृष्टि, तुम स्मार्ट और बहादुर हो. तुम ने रोहित को बचाया है. यदि तुम ने समय रहते रोहित को नहीं देखा होता तो आज शायद रोहित हमें नहीं मिलता.’’

सभी ने सृष्टि की प्रशंसा की. रोहित ने सृष्टि की पप्पी ली और उस के गले लग गया.