एक था खूब लंबा, खूब ऊंचा ऊंट, टीटू. एक बार घूमताफिरता टीटू हरेभरे जंगल में पहुंच गया. जंगल के जानवरों ने पहली बार इतना लंबा और ऊंचा जानवर देखा था. उन्हें वह बहुत अजीब सा लगा. ‘‘तुम कौन हो और कहां से आ रहे हो?’’ सब से पहले मिंटू बंदर ने पेड़ पर चढ़ते हुए पूछा.

‘‘मेरा नाम टीटू है. मैं रेगिस्तान का रहने वाला हूं,’’ टीटू ने बताया. डिंकी हिरण टीटू को देख एक पेड़ के पीछे छिप गया था. उस ने वहां से झांकते हुए कहा, ‘‘इस जंगल में ज्यादा जानवरों के रहने की जगह नहीं है. तुम कहीं और जा कर रहो.’’

‘‘मैं यहां रहने नहीं केवल घूमने आया हूं. कुछ दिनों बाद मैं वापस चला जाऊंगा,’’ टीटू ने समझाया, ‘‘इसलिए मेरे दोस्त बन जाओ.’’ लेकिन किसी ने भी टीटू से दोस्ती नहीं की, बल्कि सब उस का मजाक उड़ाने लगे. बर्नी ऊदबिलाव तो उसे लंबू का तंबू कह कर चिढ़ाने लगा.

टीटू ने किसी को कुछ नहीं कहा. थोड़ी ही देर में सब समझ गए कि टीटू ऊंचा, लंबा तो है, मगर सीधासादा जानवर है और किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएगा. अब तो सभी उसे परेशान करने लगे. चीकू खरगोश दौड़ता हुआ आया और उस के पैरों के बीच से निकल गया. बेचारा टीटू घबरा कर उछल पड़ा कि चीकू कहीं कुचला न जाए. उसे घबराया देख चीकू तालियां बजाबजा कर हंसने लगा.

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पिंटू बंदर ने तो हद ही कर दी. वह पेड़ पर से टीटू की पीठ पर धम से कूदता फिर उस के कूबड़ को हिला कर भाग जाता. गोलू भालू तो टीटू की गरदन में ही लटक गया. उसे नीचे उतारने के लिए जब टीटू उछलाकूदा तो गोलू को बहुत मजा आया.

धीरेधीरे शाम हो गई. बेचारा टीटू एक ही दिन में परेशान हो गया. उस ने सोच लिया कि अगली सुबह वह इस जंगल से चला जाएगा. उस रात जंगल में बहुत बारिश हुई. वहां बहने वाली नदी में बाढ़ आ गई. सुबह होतेहोते ज्यादातर जानवरों के घर पानी में डूब गए. नदी का पानी बढ़ता ही जा रहा था. सभी घबराए हुए थे. किसी की समझ में नहीं आ रहा?था कि क्या करें.

पैरी तोता बाढ़ से बचने के लिए सुरक्षित जगह की तलाश में दूर तक गया. उस ने लौट कर बताया, ‘‘नदी के उस पार जंगल की जमीन काफी ऊंची है. वहां बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा है. सभी को वहां चलना चाहिए.’’

डिंकी हिरनी बोली, ‘‘लेकिन नदी में तो पानी की धारा बहुत तेज है. उसे पार करने की कोशिश की तो डूब जाएंगे.’’ ‘‘अगर यहां रहे तब भी तो पानी में डूब जाएंगे.’’ पिंटू बंदर ने चिंता जताई.

 

पानी काफी तेजी से बढ़ रहा था. ऐसा लग रहा था कि बचे हुए घर भी डूब जाएंगे. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें. कुछ जानवर तो डर के मारे रोने लगे. ‘‘दोस्तो, अगर आप लोग चाहें तो मैं आप की मदद कर सकता हूं.’’ तभी टीटू ऊंट ने वहां आते हुए कहा. वह भी पानी में खड़ा था लेकिन पानी उस के घुटनों से काफी नीचे था. जबकि जानवरों के कमर से ऊपर तक पानी पहुंच चुका?था और वे बहुत मुश्किल से अपने को संभाले हुए थे.

‘‘तुम हम लोगों की मदद करोगे?’’ गोलू ने हैरानी से पूछा. ‘‘हां,’’ टीटू ने सिर हिलाया.

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‘‘लेकिन हम लोगों ने तो तुम्हें बहुत परेशान किया था,’’ पिंटू बंदर बोला. उसे विश्वास ही नहीं हो रहा?था कि जिस को उस ने इतना परेशान किया था वह मदद के लिए भी आ सकता है. ‘‘आप को जो अच्छा लगा आप ने किया. मुझे जो अच्छा लगता है मैं वही करूंगा.’’ टीटू मुसकराया, फिर बोला, ‘‘मैं ने आप सभी को अपना दोस्त माना है और मुसीबत के समय दोस्तों की मदद करना दोस्तों का फर्ज होता है.’’

यह सुन कर सभी की आंखें शर्म से झुक गईं. टीटू बोला, ‘‘दोस्तो, देरी मत करो. बाढ़ का पानी बढ़ता ही जा रहा है. जल्दी से कुछ जानवर मेरी पीठ पर सवार हो जाओ, मैं 4-5 चक्कर में सभी को नदी के उस पार पहुंचा आऊंगा.’’ ‘‘आप को कुछ होगा तो नहीं?’’ चीकू खरगोश ने डरते हुए पूछा.

‘‘मुझे कुछ नहीं होगा. मेरी टांगें इतनी लंबी हैं कि मैं आराम से नदी पार कर जाऊंगा. बस आप सभी मुझे पकड़े रहना क्योंकि अगर कोई नदी में गिर गया तो बच नहीं पाएगा,’’ टीटू ने समझाया. यह तय हुआ कि सब से पहले छोटे जानवर नदी के उस पार जाएंगे फिर बड़े जानवर. टीटू ने 2 घंटे में सभी जानवरों को उस पार पहुंचा दिया.

‘‘टीटू भाई, आप तो बहुत अच्छे हैं. हम ने आप को बहुत परेशान किया. हमें माफ कर दें,’’ गोलू भालू ने हाथ जोड़ते हुए कहा तो सभी जानवर टीटू से माफी मांगने लगे. टीटू ने कहा, ‘‘आप भी बहुत अच्छे हैं. बस, थोड़े से शरारती हैं. अगर शरारत करना छोड़ दें तो और अच्छे हो जाएंगे.’’ कह कर टीटू हंस पड़ा तो सभी हंसने लगे.

गोलू भालू ने कहा, ‘‘जब तक बाढ़ का पानी उतर नहीं जाता हम सभी यहीं रहेंगे और टीटू भाई के स्वागत में दावत देंगे.’’ यह सुन कर सभी जानवर ताली बजाने लगे. पानी के नीचे उतरने तक सभी जानवर व्यस्त हो गए. पिंटू बंदर उछलउछल कर करतबें दिखाने लगा जिसे देख हंसतेहंसते सब का बुरा हाल हो गया. कुक्कू कोयल ने सुरीली तान छेड़ दी तो श्यामू मोर पंख फैला कर झूमझूम कर नाचने लगा. इस से वहां मस्ती का माहौल छा गया.

2 दिनों बाद बाढ़ का पानी उतर गया तो सभी अपनेअपने घरों में लौट आए. टीटू की सब से अच्छी दोस्ती हो गई थी. सभी उस का बहुत ध्यान रखते थे, मगर अब टीटू को अपने घर की याद आने लगी थी. एक दिन उस ने सभी जानवरों को बुला कर कहा, ‘‘दोस्तो, अब मुझे इजाजत दीजिए. मैं अब अपने घर जाना चाहता हूं. मेरे मम्मीपापा परेशान हो रहे होंगे.’’

‘‘नहींनहीं, हम आप को वापस नहीं जाने देंगे.’’ डिंकी हिरण ने कहा. टीटू की बात सही थी. इसलिए सभी जानवर चुप हो गए. बर्नी ऊदबिलाव को टीटू से बहुत प्यार हो गया था. उस ने कहा, ‘‘भाई, अगर तुम यहां नहीं रुक सकते, तो मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगा.’’

‘‘हां, मैं भी चलूंगा,’’ पिंटू बंदर भी बोला. ‘‘दोस्तो, मैं आप को रेगिस्तान वाले अपने घर जरूर ले चलता, लेकिन आप मेरे घर में रह नहीं पाएंगे.’’ टीटू दुखी स्वर में बताने लगा, ‘‘यहां जंगल में हरेभरे पेड़ हैं, नदियां हैं, झरने हैं लेकिन रेगिस्तान इस के ठीक विपरीत है, जहां दूरदूर तक पेड़पौधे, पानी नहीं दिखाए देते.’’

‘‘अगर पानी नहीं होता तो आप लोग अपनी प्यास कैसे बुझाते हैं?’’ गोलू ने हैरानी से पूछा. ‘‘हमारे गले के भीतर एक थैली होती है. हमें जहां भी पानी मिलता है उसे भर लेते हैं फिर उसी थैली से पानी लेले कर अपने गले को गीला करते रहते हैं. इसी लिए एक बार पानी ले लेने के बाद हम सात दिनों तक बिना पानी के रह सकते हैं लेकिन आप के लिए यह संभव नहीं होगा,’’ टीटू ने बताया.

सभी जानवर सोच में पड़ गए. न तो टीटू के साथ रेगिस्तान जाया जा सकता था और न ही

उसे रोका जा सकता था. सभी को उस के जाने का दुख था. कुछ सोच कर गोलू ने कहा, ‘‘हम आप को जाने तो देंगे मगर आप को एक वादा करना होगा. आप हर साल कम से कम एक बार हम सभी से मिलने जरूर आएंगे.’’

‘‘बिलकुल आऊंगा,’’ टीटू खुश होते हुए बोला. उसे भी अपने नए दोस्तों से बिछड़ने का गम हो रहा था. उस दिन सभी ने मिल कर टीटू के लिए शानदार दावत का इंतजाम किया. खूब नाचेगाए,

खुशियां मनाईं. अगली सुबह टीटू अपने घर रेगिस्तान की ओर चल पड़ा. सभी को अब उस के वापस आने का इंतजार था.