राजू हलवाई की मिठाई की दुकान थी. राजू स्वादिष्ठ मिठाई बनाता था. उन का व्यवहार भी अच्छा था इसलिए हमेशा ग्राहकों की भीड़ लगी रहती. एक दिन दोपहर में राजू दुकान में बैठा था, तभी एक कुत्ता कराहता हुआ वहां आया. वह लंगड़ा रहा था. उस के पीछे के पैर से खून बह रहा था. शायद किसी ने पत्थर से उसे मारा था.

कुत्ते की हालत देख कर राजू को दया आ गई. अपने नौकर को भेज कर उस ने कुछ दवाएं मंगवाईं और कुत्ते के घाव पर दवा लगा दी. उसे खाने को कुछ बिस्कुट भी दिए. एक घंटे बाद घाव से खून बहना बंद हुआ. कुत्ता दुकान के पास ही बैठा रहा. रात में दुकान बंद करने के बाद राजू कुत्ते के पास गया. उसे पुचकारते हुए कुछ खाने को दिया.

कुत्ता दुम हिलाने लगा, मानो धन्यवाद दे रहा हो. अगले दिन राजू जब दुकान पहुंचा तो कुत्ता वहीं खड़ा था. राजू को देख वह दुम हिलाने लगा.

राजू उसे पुचकार कर दुकान में चला गया. कुत्ता अब दुकान के पास ही रहने लगा. वह अजनबियों को देख कर भौंकने लगता. राजू उसे प्यार से ‘बार्की’ कह कर बुलाने लगा.

बार्की को जब भूख लगती, वह दुकान के सामने आ कर दुम हिलाने लगता. उसे तुरंत खाना मिल जाता. एक दिन घर लौटते समय राजू का पैर फिसल गया. मोच आ गई. डाक्टर ने उन्हें एक हफ्ते आराम करने की

सलाह दी. राजू ने अपनी बेटी दीपा को बुला कर कहा, ‘‘दीपा, मैं अभी दुकान नहीं जा सकता, तुम जा कर दुकान संभालो.’’

दूसरे दिन से दीपा दुकान में बैठने लगी. अपनी आदत के अनुसार बार्की दुकान के सामने आ कर दुम हिलाने लगा.

उस की आंखें राजू को खोज रही थीं. कुत्ते को देख कर दीपा चिल्लाई, ‘‘चल भाग यहां से…’’

दुकान के एक कर्मचारी ने कहा, ‘‘मैडम, यह कुत्ता यहां रोज आता है. इस का नाम बार्की है. आप के पापा इसे रोज खाने को देते हैं.’’ ‘‘तो क्या हुआ? मैं कुछ भी देने वाली नहीं.’’ दीपा ने चिढ़ कर कहा.

बार्की वहीं खड़ा दुम हिला रहा था. दीपा को गुस्सा आ गया. एक डंडा ले कर दुकान से बाहर निकली. बार्की को डंडे मारने लगी. ‘‘अगर दोबारा यहां दिखाई दिया, तो टांगें तोड़ दूंगी.’’

‘‘कूं….कूं…’’ दर्द से कराहता हुआ बार्की वहां से?भाग गया. दोबारा बार्की वहां नजर नहीं आया. रविवार का दिन था. दीपा की दुकान में भीड़

ज्यादा थी. रात को दुकान बंद करने का समय हो गया था. दीपा दिन भर का हिसाब कर रही थी. हिसाब खत्म करने के बाद दीपा ने रुपयों को तिजोरी में रखा. तभी बाइक सवार 2 युवक वहां आए.

‘‘2 किलो लड्डू देना.’’ एक युवक ने 5 सौ का नोट बढ़ाते हुए दीपा से कहा. ‘‘दुकान तो बंद हो गई है. कल आना,’’

दीपा ने कहा. दूसरे युवक ने मुसकरा कर कहा, ‘‘आए हुए ग्राहक को कभी न नहीं कहना चाहिए.’’

‘‘ठीक है.’’ दीपा मान गई. वह लड्डू पैक करने लगी.

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अचानक एक युवक ने चाकू निकाल कर दीपा की गरदन पर रख दिया और बोला, ‘‘तिजोरी से सारे रुपए निकाल कर मेरे बैग में भरो, वर्ना यहीं ढेर कर दूंगा.’’ दूसरा युवक गेट पर खड़ा हो कर पहरेदारी

करने लगा. दीपा बुरी तरह घबरा गई थी. वह तिजोरी से रुपए निकाल कर युवक के बैग में भरने लगी.

दोनों युवक रुपयों से भरा बैग ले कर बाइक की ओर बढ़े. अभी दोनों बाइक पर बैठे ही थे कि बार्की दोनों पर झपट पड़ा. दोनों युवक जमीन पर गिर पड़े. बार्की ने छलांग लगा कर एक युवक के पैर को अपने जबड़े में दबोच लिया. उस ने कई जगह काट लिया. चाकू छिटक कर दूर जा गिरा.

दूसरे युवक ने बैग उठा कर भागने की कोशिश की. बार्की तैयार था. उस ने उस पर भी हमला बोल दिया. अपने तेज नुकीले दांतों से काट कर उस ने उसे बुरी तरह घायल कर दिया. घायल युवक दर्द से तड़पने लगे. दोनों ने भागने की कोशिश की पर बार्की के सामने उन की एक न चली.

बार्की को देख दीपा की हिम्मत थोड़ी बढ़ गई. वह मदद के लिए चिल्लाने लगी, ‘‘चोर…चोर…’’ शोर सुन

कर कुछ पड़ोसी मदद के लिए दौड़े. जल्द ही दोनों युवक भीड़ से घिर गए. पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस ने मौके पर पहुंच कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया. उन से रुपयों से भरा बैग भी बरामद कर लिया गया.

थोड़ी देर बाद भीड़ भी छंट गई. एक कोने में बार्की खड़ा था. बार्की को देख दीपा उस के पास गई. उसे पुचकारते हुए बोली, ‘‘बार्की, मैं बहुत शर्मिंदा हूं. मैं ने तुम्हारे साथ गलत बरताव किया, फिर भी तुम ने मेरी मदद की. अगर तुम वक्त पर न आते तो मैं लुट जाती. तुम्हारी बहादुरी की वजह से दोनों चोर पकड़े गए. अब तुम्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं. तुम मेरे

घर चलो.’’ बार्की दुम हिलाने लगा. दीपा में आए बदलाव को देख वह खुश था. वह दीपा के पीछेपीछे घर की ओर चल पड़ा.