गृहशोभा विशेष

टोटो कछुआ बहुत डरपोक था. सर्दियों का मौसम था. टोटो को ठंड लग गई थी. वह लगातार छींकता जा रहा था. गला बैठ गया था और उस की आवाज भी भारी हो गई थी. मम्मी जब सुबह में उस के कमरे में आईं, तो वह छींके जा रहा था. ‘‘टोटो, तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है. आज तुम स्कूल मत जाना. मैं तुम्हें कुछ दवा दे दूंगी. दवा खा कर आराम करना. मैं स्कूल में फोन कर तुम्हारे टीचर को सारी बात बता दूंगी,’’ मम्मी ने कहा.

शाम होतेहोते टोटो अच्छा महसूस करने लगा. उस ने मम्मी से कहा, ‘‘मैं रैबी के घर जा कर आज के क्लासनोट्स ले आता हूं.’’ रैबी खरगोश टोटो का दोस्त था और एक ही क्लास में पढ़ता था. उस का घर टोटो के घर से थोड़ी ही दूरी पर था. ‘‘टोटो, बाहर बहुत ठंड है. यदि तुम बाहर निकलोगे, तो तुम्हारी तबीयत अधिक बिगड़ सकती है,’’ मम्मी ने टोटो को रोकने की कोशिश की.

‘‘चिंता मत करो, मम्मी, मैं जल्दी ही लौट आऊंगा. मैं ने स्वेटर और टोपी भी पहन ली है,’’ टोटो बोला. स्वेटर और टोपी से टोटो का पूरा शरीर तो ढका हुआ था, लेकिन आंखें खुली थीं. टोटो रैबी के घर पहुंचा. जल्दीजल्दी क्लासनोट्स लिए और वापस घर की ओर चल पड़ा.

शाम भी हो गई थी और सर्दी बढ़ गई थी. गरम कपड़ों के बावजूद टोटो कांप रहा?था. सड़कों पर बहुत ही कम लोग दिखाई दे रहे थे. टोटो तेजी से चलने की कोशिश कर रहा था. अचानक उस की नजर सड़क के किनारे पड़ी हुई एक बैग पर पड़ी. वह बैग हिलडुल रहा था. वह थोड़ी देर के लिए रुक गया.

वह बैग को ध्यान से देखने लगा. हलकी रोशनी में उस ने देखा कि बैग धीरेधीरे चल रहा है. टोटो बहुत डर गया?था. वह सोच रहा था कि बैग के अंदर कहीं भूत तो नहीं है. तभी उसे लगा कि बैग उस की तरफ ही आ रहा है, टोटो थोड़ा पीछे हटा तो बैग रुक गया. उस ने पूरी ताकत लगाई और पूछ बैठा, ‘‘तुम कौन हो?’’

‘‘भूत, मैं भूत हूं.’’ बैग के अंदर से धीमी आवाज आई.

‘‘भूत?’’ टोटो भी धीरे से बोला. उस ने आसपास देखा. चारों ओर अंधेरा था. आसपास कोई दिखाई भी नहीं दे रहा था. ‘यहां से?भाग जाना ही अच्छा है. यदि इस भूत ने मुझे पकड़ लिया, तो मेरा कामतमाम कर देगा.’ टोटो सोच रहा था.

वह भागने लगा, लेकिन सामने ही एक पत्थर था. पत्थर से टकरा कर वह गिर गया और उस के क्लासनोट्स और नोटबुक सड़क पर बिखर गए. बैग धीरेधीरे उस की ओर ही आ रहा था.

बैग जब उस के बिलकुल पास आ गया, तो टोटो बहुत डर गया. उस का शरीर ठंड से जम गया. अब उस के पास वहां से भागने की ताकत नहीं थी.

टोटो को सामने अपनी मौत दिखाई देने लगी. उस ने अपनी आंखे बंद कीं और हाथ जोड़ कर निवेदन करने लगा, ‘‘भूत सर, मुझे छोड़ दो प्लीज. मैं एक छोटा सा कछुआ हूं. मुझे मार कर आप को क्या मिलेगा?’’ टोटो बहुत डर गया था. वह उस भूत से निवेदन करता रहा.

‘‘चलो ठीक है, मैं ने तुम्हें छोड़ दिया. अब तुम अपनी आंखें खोल सकते हो,’’ बैग से आवाज आई. टोटो ने जब आंखें खोलीं, तो उस ने रैटू चूहे को बैग से बाहर निकलते देखा. रैटू उस के सामने आ कर जोरजोर से हंसने लगा.

‘‘अरे रैटू, तो बैग के अंदर तुम थे. मुझे तो लगा इस के अंदर कोई असली भूत छिपा हुआ है,’’ अपनेआप को सुरक्षित पा कर टोटो ने मुसकराते हुए कहा.

‘‘अरे, मैं कोई भूत नहीं हूं, मैं तो छोटा सा चूहा हूं,’’ रैटू ने मुसकराते हुए कहा. ‘‘यदि तुम थोड़ी देर और मुझे डराते, तो मैं तो मर ही जाता,’’ टोटो ने लंबी सांस लेते हुए कहा.

‘‘सौरी दोस्त, मैं तुम्हें डराना नहीं चाहता था. दरअसल, मैं खुद डरा हुआ था क्योंकि एक बिल्ली मेरा पीछा कर रही थी. मैं तो उस से बचने के लिए बैग में छिप गया,’’ रैटू बोला. ‘‘लेकिन तुम खुद को भूत कह कर मुझे डराने की कोशिश क्यों कर रहे थे? तुम सचसच बताओ,’’ टोटो ने कहा.

‘‘इस के लिए माफ करना, टोटो. मैं ने बैग के अंदर से जब देखा तो स्वेटर और टोपी में तुम्हें पहचान नहीं पाया. तुम्हारी आवाज भी सर्दी की वजह से काफी भारी लग रही थी. पहले तो मुझे लगा कि बिल्ली वापस आ गई है. इसलिए मैं उसे भगाने के लिए खुद को भूत कह रहा था. जब तुम ने बताया कि तुम छोटा कछुआ हो, तब मैं बाहर आ गया,’’ रैटू ने विस्तार से बताया. पूरी बात सुन कर टोटो ठहाके लगा कर हंस पड़ा, ‘‘हम दोनों बेवकूफ बन गए. मैं तुम्हें भूत समझ रहा था और तुम बिल्ली.’’ इतना कह कर दोनों अपनेअपने घरों की ओर चल पड़े.

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