ब्लैकी बिल्ली कुछ दिनों पहले सोनावन आई थी. वह गहरे काले रंग की थी. वन के कुछ जानवर उसे अशुभ मानते थे. मूसू चूहा स्कूल जा रहा था. उस दिन उस का रिजल्ट आने वाला था.

सामने से ब्लैकी बिल्ली को आता देख कर मूसू बड़बड़ाया, ‘‘मनहूस ब्लैकी बिल्ली को भी अभी ही आना था. अब तो मेरा रिजल्ट जरूर खराब होगा.’’

मूसू ने अपनी आंखें बंद कर लीं. जब ब्लैकी वहां से गुजर गई, तब उस ने अपनी आंखें खोलीं. स्कूल पहुंचने पर टीचर ने मूसू को रिपोर्ट कार्ड दिया. मूसू को जिस का डर था, वही हुआ. वह फेल हो गया था.

मूसू स्कूल से बाहर निकला और सीधे ब्लैकी के घर पहुंचा. ‘‘ब्लैकी, आज तुम्हारी वजह से मैं फेल हो गया.’’ ‘‘मैं ने क्या किया? तुम्हारे फेल होने से मेरा क्या लेनादेना?’’ ब्लैकी हैरानी से बोली.

‘‘आज स्कूल जाते समय तुम ने मेरा रास्ता काटा था. अगर उस समय तुम मेरे सामने से नहीं गुजरती, तो मैं परीक्षा में जरूर पास होता,’’ मूसू चूहा बोला.

ब्लैकी उदास हो कर घर के अंदर चली गई. अगले दिन सुबहसुबह ब्लैकी कुछ सब्जियां खरीदने हीरू हाथी की दुकान पर पहुंची.

ब्लैकी को देख कर हीरू चिढ़ गया, ‘‘मैं ने सुबहसुबह तुम्हारा चेहरा देख लिया. आज मेरा सारा दिन खराब जाएगा.’’

‘‘हीरू, मुझे देख कर ऐसा क्यों बोल रहे हो. मैं ने क्या किया?’’ ब्लैकी ने पूछा. ‘‘तुम मनहूस बिल्ली हो. तुम्हारा रंग गहरा है. तुम यहां से चली जाओ. सामान किसी दूसरी दुकान से ले लो,’’ हीरू ने झल्ला कर कहा.

ब्लैकी उदास हो कर वहां से चली गई. उसी रात हीरू के घर में चोरी हो गई. सुबह जब हीरू ने घर से रुपए और जेवर गायब देखे तो आगबबूला हो गया.

‘‘मेरे घर में चोरी की वजह ब्लैकी है. मैं अभी उस की खबर लेता हूं.’’ वह अपने पड़ोसी चिंटू बंदर के साथ ब्लैकी के घर पहुंचा. ‘‘ब्लैकी, तुम्हारे कारण मेरे घर में चोरी हो गई. मेरे घर के सारे कीमती सामान चोर ले गए.’’ हीरू चीखा.

‘‘सुबहसुबह क्या अनापशनाप आरोप लगा रहे हो? तुम्हारे घर की चोरी से मेरा क्या लेनादेना?’’ ब्लैकी बोली. ‘‘कल तुम मेरी दुकान में आई थी. सुबहसुबह तुम्हें देखने की वजह से मेरे घर चोरी हुई,’’ हीरू ने आंखें दिखाते हुए कहा.

चिंटू ने भी हीरू का पक्ष लेते हुए कहा, ‘‘हीरू सही कह रहा है. तुम अगर इस की दुकान में नहीं आती तो चोरी नहीं होती. तुम अशुभ हो.’’ ब्लैकी की आंखों से आंसू टपकने लगे. अपने ऊपर लगे आरोपों से वह हैरानपरेशान थी.

धीरेधीरे वन में यह बात फैल गई कि ब्लैकी अशुभ है. वन के निवासी उस के सामने जाने से कतराने लगे. एक दिन ब्राउनी भालू साइकिल से ब्लैकी के घर के सामने से गुजर रहा था. ब्लैकी उस समय छत पर कपड़े सुखा रही थी.

ब्राउनी ने ब्लैकी को देखा तो नजरें बचा कर तेजी से आगे बढ़ने लगा. हड़बड़ी में वह अपना संतुलन खो बैठा. वह साइकिल से गिर पड़ा. उस के पैर में चोट लग गई.

ब्राउनी ने ऐक्सीडैंट की वजह ब्लैकी बिल्ली को ही मान लिया. ‘‘अब बहुत हुआ. पानी सिर से ऊपर निकल गया है. इस ब्लैकी बिल्ली की वजह से हमारे पूरे वन की खुशी चली गई है,’’ ब्राउनी ने अपनी साइकिल उठाते हुए कहा.

वह लंगड़ाता हुआ हीरू के पास पहुंचा. हीरू ने सुझाव दिया, ‘‘जब तक ब्लैकी वन में रहेगी, कुछ न कुछ अशुभ होता रहेगा. इसे फौरन यहां से निकालना होगा.’’

‘‘चलो, राजा शेरसिंह के पास चलते हैं. वन से वही ब्लैकी को बाहर निकाल सकते हैं,’’ ब्राउनी ने कहा. हीरू, ब्राउनी और चिंटू राजा शेरसिंह के पास शिकायत करने पहुंचे. उन के साथ कुछ और जानवर भी थे.

‘‘महाराज, ब्लैकी अशुभ बिल्ली है. उस के कारण आए दिन हमारे साथ कुछ न कुछ बुरा हो रहा है,’’ हीरू बोला. ‘‘ऐसा कैसे कह सकते हो?’’ शेरसिंह ने पूछा.

‘‘महाराज, ब्लैकी जिस के सामने आ जाती है उस के साथ बुरा हो जाता है. इस की वजह से मूसू फेल हो गया. हीरू के घर चोरी हो गई. आज मेरा ऐक्सीडैंट हो गया,’’ ब्राउनी ने कहा.

‘‘महाराज, ब्लैकी को इस वन से निकाल दीजिए. सारी समस्या अपनेआप खत्म हो जाएगी,’’ चिंटू ने सुझाव दिया. महाराज शेरसिंह ने कहा. ‘‘मैं अपना फैसला कल सुनाऊंगा. तुम कल आना.’’

अगले दिन हीरू, चिंटू और ब्राउनी शेरसिंह के महल पहुंचे. वहां ब्लैकी पहले से ही खड़ी थी. तीनों को देखते ही शेरसिंह गरजे, ‘‘तुम तीनों को सोनावन से निकाला जाता है. तुम फौरन यहां से दफा हो जाओ.’’

हीरू, ब्राउनी और चिंटू एकदूसरे का चेहरा देखने लगे. उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा?था. थोड़ा साहस कर चिंटू ने पूछा, ‘‘महाराज, दोषी ब्लैकी है और सजा हमें दी जा रही है.’’

शेरसिंह का गुस्सा और बढ़ गया, ‘‘दोषी ब्लैकी नहीं, तुम तीनों हो. तुम ने बेवजह इस भोलीभाली बिल्ली के बारे में झूठा प्रचार किया कि यह अशुभ है. तुम्हारी शिकायत के बाद मैं ने पता किया तो सचाई सामने आई. ‘‘मूसू पढ़ने में कमजोर है, इसलिए फेल हो गया. वह पहले भी फेल हो चुका है. हीरू के घर चोरी में भी ब्लैकी का दोष नहीं. रात में दरवाजा खुला था इसलिए चोरी हुई. चोर भी पकड़े जा चुके हैं. ‘‘ब्राउनी ने कुछ ही दिनों पहले साइकिल चलाना सीखा है इसलिए वह दुर्घटना का शिकार हुआ. वन में जो भी बुरा हुआ उस के लिए ब्लैकी पर आरोप लगाना अपराध है.

‘‘तुम ने ब्लैकी को बदनाम किया. वन में अंधविश्वास फैलाना अपराध है, इसलिए तुम्हें वन से निकाला जाता है.’’ हीरू ने स्वीकार किया कि चोरी वाली रात वह घर का दरवाजा बंद करना भूल गया था. ब्राउनी ने भी माना कि वह भी अभी साइकिल चलाना सीख ही रहा है. ब्राउनी, चिंटू और हीरू शेरसिंह के सामने गिड़गिड़ाने लगे, ‘‘महाराज, हमें माफ कर दीजिए. हम अंधविश्वास में पड़ कर ब्लैकी को अशुभ मान बैठे.

‘‘हमारे साथ जो हुआ उस के दोषी हम खुद हैं, ब्लैकी नहीं. हम खुद पर शर्मिंदा हैं.’’ ब्लैकी ने भी शेरसिंह से तीनों को माफ करने का निवेदन किया.

शेरसिंह ने तीनों को चेतावनी दे कर माफ कर दिया. ब्राउनी, हीरू ने ब्लैकी से माफी मांगते हुए दोबारा अंधविश्वास के चक्कर में नहीं पड़ने का वादा किया.