ब्राउनी भालू की परीक्षा जल्द ही आने वाली थी. एक महीने से भी कम समय बचा था. ब्राउनी को गणित के पेपर की बहुत चिंता हो रही थी. पिछले साल भी उसे बहुत ही कम नंबर मिले थे. स्कूल से छुट्टी के बाद ब्राउनी अपने दोस्त जेबू जैबरा के साथ घर लौट रहा था.

‘‘जेबू, मुझे परीक्षा की बहुत चिंता हो रही है. मैं गणित के प्रौब्लम्स हल नहीं कर पा रहा हूं,’’ चिंतित ब्राउनी ने कहा. ‘‘हां, मेरी हालत भी ऐसी ही है. मैं जो कुछ भी रात में याद करता हूं, सुबह में भूल जाता हूं,’’ जेबू ने कहा.

‘‘अगर इस बार मैं फेल हो गया तो मेरे पापा स्कूल से मेरा नाम कटवा देंगे,’’ ब्राउनी ने दुखी हो कर कहा. चपलू लोमड़ उन के पीछे चल रहा था और उन की बातें सुन रहा था.

अगले दिन जब जेबू और ब्राउनी स्कूल से लौट रहे थे, चपलू एक पेड़ के पास खड़ा था. वह उन के पास आने पर बोला, ‘‘मुझे मालूम है कि तुम दोनों अपनी परीक्षा को ले कर चिंतित हो. मैं इस का समाधान कर सकता हूं.’’ ‘‘कैसे?’’

‘‘मुझे गणित के पेपर के प्रश्नपत्र मिल गए हैं. मैं तुम्हें प्रश्नपत्र दे सकता हूं,’’ चपलू ने कहा. ‘‘क्या तुम सच बोल रहे हो?’’ ब्राउनी का चेहरा खुशी से चमक उठा.

‘‘हां, बिलकुल,’’ चपलू ने कहा. ‘‘क्या तुम मुझे भी प्रश्नपत्र दे सकते हो?’’ जेबू ने भी पूछा.

‘‘हां, लेकिन तुम दोनों को इस के लिए 1-1 हजार रुपए देने होंगे,’’ चपलू ने कहा. रुपयों के बारे में सुनते ही जेबू को रोना आने लगा. उस ने कहा, ‘‘मैं तुम्हें इतने सारे रुपए नहीं दे सकता. क्या और कोई उपाय नहीं है?’’

‘‘नहीं, बिना रुपयों के तुम्हें प्रश्नपत्र नहीं मिल सकते. अब तुम जा सकते हो,’’ चपलू ने गुस्से में कहा.

ब्राउनी ने चपलू को शांत किया और कहा, ‘‘मैं तुम्हें कल रुपए दे दूंगा. तुम प्रश्नपत्र तैयार रखना.’’ घर में ब्राउनी ने रुपए ढूंढे. रात में उस ने अलमारी से एक हजार रुपए निकाल लिए.

अगले दिन उस ने रुपए चपलू को दे दिए. चपलू ने उसे एक लिफाफा दिया और कहा, ‘‘ब्राउनी, प्रश्नपत्र इस लिफाफे के अंदर है. इस बार तुम पूरे नंबर पाओगे. इस बारे में किसी को कुछ मत कहना, नहीं तो सब गड़बड़ हो जाएगा.’’ ब्राउनी खुश हो कर घर लौट आया और उस ने जेबू से भी प्रश्नपत्र शेयर किया.

अब ब्राउनी और जेबू चपलू द्वारा दिए गए प्रश्नपत्र के अनुसार परीक्षा की तैयारी करने लगे. उन्होंने सभी प्रश्नों के उत्तर याद कर लिए. उन्होंने कई बार प्रश्नों को हल भी किया. इस बार दोनों ही गणित में पूरा नंबर हासिल करना चाहते थे.

जल्दी ही परीक्षा शुरू हो गई. पहला पेपर गणित का ही था. परीक्षा वाले दिन दोनों विश्वास के साथ क्लास में पहुंचे. उन के चेहरे पर मुसकान थी. टीचर ऐली हाथी ने सभी को प्रश्नपत्र बांट दिए.

प्रश्नपत्र को देख कर ब्राउनी का चेहरा डर से पीला पड़ गया. उस ने प्रश्नपत्र को कई बार पढ़ा लेकिन एक भी गणित का प्रश्न मैच नहीं हो रहा था. ‘‘ओह, यह क्या हुआ?’’ अपना सिर पकड़ कर ब्राउनी ने कहा.

अगली बेंच पर बैठा जेबू भी यही सोच रहा था. उस का चेहरा भी डर से पीला पड़ गया था. बहुत ही मुश्किल से दोनों ने ही प्रश्नों को हल करने की कोशिश की. परीक्षा के बाद जब ब्राउनी अपनी उत्तरपुस्तिका टीचर को दे रहा था, तो उस की आंखों में आंसू थे.

‘‘क्या हुआ ब्राउनी? तुम रो क्यों रहे हो?’’ टीचर ऐली ने पूछा. ब्राउनी ने उन्हें सब कुछ बता दिया.

उन पर चिल्लाने की बजाय, ऐली ने उन्हें समझाया, ‘‘तुम दोनों ही चपलू के जाल में फंस गए. पढ़ाई में कोई भी शौर्टकट्स नहीं होता, अच्छे नंबर लाने के लिए तुम्हें बहुत मेहनत करने की जरूरत है. चपलू ने तुम्हें बेवकूफ बनाया. तुम ने अपने परिवार के लोगों के विश्वास को भी तोड़ा है. ‘‘चिंता न करो. अपने पापा को सबकुछ बता दो और बचे हुए पेपर की अच्छी तरह तैयारी करो. तुम निश्चय ही परीक्षा पास करोगे,’’ ऐली ने उन का हौसला बढ़ाते हुए कहा.

ब्राउनी ने अपने मम्मीपापा को रुपए चुराने और चपलू से पेपर लेने के बारे में सबकुछ बता दिया. उस के पापा ने चपलू की शिकायत पुलिस में कर दी. पुलिस ने चपलू को पकड़ लिया और उन के रुपए वापस ले लिए.

चपलू ने स्वीकार किया कि वह अपने जाल में कमजोर विद्यार्थियों को फंसाता था, उन से रुपए लेता था और उन को फर्जी प्रश्नपत्र दे देता था. पापा भालू ने ब्राउनी को समझाया, ‘‘बेटा, तुम रुपयों की मदद से परीक्षा नहीं पास कर सकते. पास होने के लिए साल भर मेहनत करना जरूरी है.’’

ब्राउनी ने वादा किया कि अब वह कठिन मेहनत करेगा. अच्छे नंबर लाने के लिए वह शौर्टकट वाले रास्ते को नहीं अपनाएगा.