राजा शेरसिंह अपनी गुफा में टैलीविजन पर एक प्रोग्राम को देखते हुए आराम कर रहे थे. प्रोग्राम भारत के इतिहास की घटनाओं के बारे में था और भारतीय झंडे के इतिहास के संबंध में भी बताया जा रहा था. अचानक शेरसिंह के मन में एक विचार आया कि क्यों न चंपकवन का भी अपना एक झंडा हो.

उन्होंने तुरंत अपने मुख्य सलाहकार जंबो हाथी को बुलाया. जंबो हैरानपरेशान, चिंतित हो कर जल्दी से भागता हुआ वहां पहुंचा. वह सोच रहा?था कि आखिर शेरसिंह ने उसे तुरंत क्यों बुलाया.

शेरसिंह ने अपनी बात बताई कि चंपकवन का भी अपना एक झंडा होना चाहिए. यह सुन कर जंबो को राहत मिली और इस विचार से वह बहुत उत्साहित भी हुआ.

दोनों ने मिल कर योजना बनाई कि अगले दिन चंपकवन में शेरसिंह चंपकवन के झंडे को अपनाने के बारे में घोषणा करेंगे और सभी से झंडे का डिजाइन आमंत्रित करेंगे. विजेता के नाम की घोषणा चंपकवन राष्ट्रीय दिवस के एक सप्ताह पहले कर दी जाएगी. विजेता को चंपकवन राष्ट्रीय दिवस समारोह में सर्टिफिकेट और इनाम मिलेगा.

अगले दिन शेरसिंह ने टीवी और रेडियो में घोषणा करवा दी. चंपकवन के सभी जानवर झंडे के डिजाइन को बनाने को ले कर बहुत ही उत्साहित थे. रंगीला मोर, किट्टी गिलहरी, गिनी जिराफ, मीकू चूहा, फिशी लोमड़ी और अन्य जानवर झंडे का डिजाइन बनाने में व्यस्त हो गए.

जंगल के हर कोने और गली में झंडे के डिजाइन के बारे में चर्चा होने लगी. आखिरकार वह दिन आ गया और सभी प्रतिभागियों ने अपनेअपने डिजाइन जमा करा दिए. जमा किए गए डिजाइनों को प्रदर्शित किया गया ताकि सभी जानवर झंडे के डिजाइन को देख सकें.

सभी के द्वारा जमा कराए डिजाइनों को शेरसिंह जंबो और मंत्रियों के साथ देखने लगे. उन्होंने रंगीला के डिजाइन में बहुत सारी अच्छी चीजें देखीं जैसे कि राष्ट्रीय झंडे के रूप में इंद्रधनुष जिस के हर रंग का कोई अर्थ था. गिनी के डिजाइन में ज्योति के प्रतीक के रूप में एक लौ थी. ज्यादातर मंत्री फिशी के डिजाइन से प्रभावित हुए जिस में उस ने झंडे में लालरंग के त्रिभुज के बीच में शेरसिंह का एक फोटो लगाया था.

शेरसिंह ने जंबो से पूछा कि उस ने फिशी के डिजाइन के बारे में क्या सोचा? जंबो इस सीधे प्रश्न से परेशान था लेकिन उस ने कहा कि मेरे विचार से फिशी का डिजाइन उचित नहीं था.

शेरसिंह और सभी मंत्री जंबो के उत्तर से हैरान थे. शेरसिंह ने जंबो से फिर कहा कि इस बारे में वह विस्तार से बताए.

जंबो ने कहा, ‘‘महाराज, मैं फिशी के झंडे के डिजाइन से सहमत नहीं हूं, क्योंकि यह व्यक्ति विशेष पर डिजाइन किया गया है.

‘‘यह सिर्फ चंपकवन के बल, शक्ति को दर्शाता है जैसे कि इस के राजा. एक झंडे का उपयोग किसी जगह और वहां की जनता के बारे में बताने के लिए किया जाना चाहिए.

‘‘इसे राज्य में निवास करने वाली जनता के मूल्यों, इतिहास और नैतिक विचारों को दर्शाने और बातें करने वाला होना चाहिए.’’

उस के बाद जंबो ने मीकू द्वारा बनाए गए सामान्य, सीधेसादे डिजाइन के बारे में बताया, ‘‘इस में सफेद बैकग्राउंड में एक पेड़ है, जो सफेद प्रकाश, अच्छाई, निर्दोषता, शुद्धता के बारे में है और पेड़ परिवार की पीढि़यों का प्रतीक है.

‘‘एक पेड़ एक बीज से अंकुरित हो कर बढ़ता है, डालियां बाहर फैलती हैं और देखें कि कहां तक ये जा सकती हैं. उस के बाद एक नया फल आता है जो अगली पीढि़यों को जीवन देता है.

‘‘पेड़ प्रगति और शक्ति का प्रतीक है. इसलिए मेरा सुझाव है कि चंपकवन के झंडे के रुप में मीकू के डिजाइन को चुना जाए.’’

शेरसिंह जंबो की बातों से सहमत थे. सभी ने मिल कर घोषणा की कि मीकू के झंडे के डिजाइन को चंपकवन के झंडे के रूप में आधिकारिक तौर पर अपनाया जाएगा. इसे आने वाले चंपकवन दिवस समारोह में फहराया जाएगा.

सभी जानवरों ने मीकू को चंपकवन के लिए अच्छे विचार और खूबसूरत झंडे को बनाने के लिए बधाइयां दीं और शेरसिंह और जंबो को ऐसे झंडे को चुनने के लिए धन्यवाद कहा. मीकू अपने झंडे को चंपकवन का राष्ट्रीय झंडा चुने जाने से बहुत खुश था.