गृहशोभा विशेष

चीनू चूहा अपने समर वेकेशन खत्म होने के बाद वापस अपने शहर लौटा तो सब से पहले वह अपनी दोस्त मिनी बिल्ली से मिलने उस के घर पहुंचा. चीनू को देखते ही मिनी के पापा ने उस का स्वागत किया. उन्होंने पूछा, ‘‘कैसे हो, चीनू? तुम्हारी छुट्टियां कैसी रहीं? सुना है, तुम इन छुट्टियों में औरोविले (दक्षिण भारत में स्थित केंद्रशासित प्रदेशपांडिचैरी) गए थे. वहां जा कर तुम ने नया क्या सीखा?’’

‘‘मैं अच्छा हूं, मेरी इस बार की छुट्टियां तो बहुत यादगार रही हैं और इन छुट्टियों में मैं ने औरोविले जा कर बहुत कुछ नया सीखा है,’’

चीनू ने जवाब दिया. चीनू की आवाज सुन कर मिनी भी ड्राइंगरूम में आ गई. चीनू को अपने घर देख कर मिनी बहुत खुश हुई.

तभी मिनी की मम्मी सभी के लिए नाश्ता ले आईं. सब ने एक साथ नाश्ता किया. मिनी ने कहा, ‘‘चीनू, इस बार तो मैं छुट्टियों में कहीं जा ही नहीं सकी, क्योंकि पापा को औफिस में बहुत काम था. मैं ने तो यहीं रह कर हौबी क्लास अटैंड की.’’ मिनी के पापा चीनू की औरोविले में बिताई छुट्टियों के बारे में जानने के लिए बहुत उत्सुक थे. छुट्टी का दिन था, इसलिए पापा भी बच्चों के साथ ही बैठे रहे. मिनी ने कहा, ‘‘चीनू, हमें भी तो औरोविले के अपने अनुभव के बारे में कुछ बताओ?’’

चीनू ने कहना शुरू किया, ‘‘वहां जा कर मैं ने अपने मामा के कहने पर एक एनजीओ वेस्टलेस के द्वारा ‘वर्ल्ड अर्थ डे’ के दौरान चलाई गार्बोलौजी की क्लास अटैंड की.’’ ‘‘अंकल, वह दरअसल कचरा प्रबंधन सीखने की क्लास थी,’’ चीनू बोला.

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मिनी के पापा के लिए भी यह नया विषय था इसलिए वे भी चीनू की बातें बड़े ध्यान से सुन रहे थे. उन्होंने पूछा, ‘‘इस विषय में तुम को कौनकौन सी बातें बताईं गईं?’’ चीनू ने कहना शुरू किया, ‘‘ हमारी क्लास में सब से पहला सबक ‘इंट्रोडक्शन औफ सौलिड वेस्ट’ का था. दरअसल, हमें बहुत ही मनोरंजक और रचनात्मक तरीके से इस चैप्टर को पढ़ाया गया था. इस में ‘वेस्ट रिले रेस’ भी था, जिस के अंतर्गत सब बच्चों को कचरा अलगअलग करना और रिसाइकल करना सिखाया गया. इस में मुझे बहुत मजा आया.

‘‘दूसरे दिन हमें ‘हाऊ लौंग डज ट्रेश लास्ट’ चैप्टर पढ़ाया गया. इस में हमें कचरे के सड़ने और निपटाने के वैज्ञानिक तरीके के बारे में भी बताया गया. ‘‘इस में तो हमें मनोरंजक एक्टिविटी ‘मैप माय सौफ्ट ड्रिंक’ भी कराई गई, जिस में हमें एल्यूमीनियम कैन, पीईटी बौटल्स और फिर से इस्तेमाल करने योग्य बौट्ल सहित कई पैकेजिंग मैटेरियल्स के जीवनचक्र का तुलनात्मक अध्ययन कर के बताया गया.

‘‘इस में दो अन्य चैप्टर थे, ‘फालो द बौटल और लेस पैकेजिंग.’ इस के पहले सबक में हमें प्लास्टिक की लाइफ साइकल और पृथ्वी पर इस के असर को बताया गया. ‘‘इस के दूसरे चैप्टर में छात्रों को बताया गया कि कैसे वे गैरजरूरी पैकेजिंग को कम कर सकते हैं.

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‘‘अंकल, सब से बड़ी बात तो यह थी कि ये सारे चैप्टर एक्टिविटी पर आधारित थे, इन में कोई थ्योरी नहीं थी.’’ ‘‘अरे वाह, यह तो बहुत ही बढि़या तरीका है, सिखाने का,’’ मिनी के पापा ने कहा.

चीनू को ऐसा लगा कि कहीं मिनी मेरी बातों से बोर तो नहीं हो रही है तो उस ने आखिर पूछ ही लिया, ‘‘मिनी, अगर तुम्हें मेरी बातों से बोरियत हो रही हो तो हम वही अपना फेवरेट गेम पकड़मपकड़ाई खेल सकते हैं.’’ ‘‘नहीं चीनू, बिलकुल बोरियत नहीं हो रही है बल्कि मैं तो गार्बोलौजी के बारे में और जानना चाह रही हूं, ताकि हम हर प्रकार के कचरे का सही निपटान करना सीख सकें.’’

चीनू ने आगे कहना शुरू किया, ‘‘इस कोर्स में हम ने एक कलरिंग एक्टिविटी ‘स्पौट द बैटरी’ भी की, जो बैटरी और पर्यावरण पर इस के असर से परिचित कराती हैं. ‘‘अंकल, हमें एक सबक ‘लिटर क्लीन अप’ का भी बताया गया. वह वेस्ट के स्रोत को समझने की एक्टिविटी थी.

‘‘पता है मिनी, मेरे साथ वहां लगभग 50 और बच्चों ने यह क्लास अटैंड की. इतना ही नहीं, सब बच्चों को वहां हर रोज ‘गार्बोलौजी निद्रा’ की प्रैक्टिस भी कराई गई. ‘‘वास्तव में वह कला और प्राचीन योग निद्रा का मिश्रण है, जो शरीर के माध्यम से जागरुकता लाने के लिए था. इस में हम कचरा मुक्त दुनिया की कल्पना करते हैं.

‘‘पूरे विचार तीन सरल बिंदुओं पर आधारित थे. पहला, सिर्फ कचरा साफ कर देना ही समाधान नहीं है. दूसरा, कचरा इस से बड़ी समस्या है. तीसरा, आदतें डालना ही इस का समाधान है.’’ इतना कुछ जान लेने के बाद मिनी बोली, ‘‘चीनू, मेरे लिए तो अभी इतना जानना बहुत है. क्यों न तुम स्कूल में भी इस पर एक प्रैजेटेशन बना कर पूरे स्कूल के सामने इस टौपिक को इन्ट्रोड्यूस करो.’’

‘‘हां मिनी, तुम्हारा आइडिया तो अच्छा है पर इस पर प्रैजेंटेशन बनाने के लिए तुम्हें भी मेरी मदद करनी होगी.’’ ‘‘हां, जरूर चीनू.’’ मिनी ने हां करते हुए कहा.

मिनी के पापा ने भी चीनू को इतनी उपयोगी जानकारी देने के लिए शाबाशी दी. चीनू और मिनी प्रैजेंटेशन की तैयारी में जुट गए.

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