गृहशोभा विशेष

मानव प्लेग्राउंड से काफी देर बाद थकाहारा घर आया था. उस की मम्मी मिसेज गोपाल घर की साफसफाई में व्यस्त थीं. ‘‘क्या मैं सफाई करने में आप की मदद करूं, मम्मी?’’ मानव ने पूछा.

यह सुन कर मम्मी हैरान रह गईं. क्योंकि उन्हें पता था कि मानव को सफाई करना पसंद नहीं था. वह तो अपने कमरे की सफाई करने से भी मना कर देता था. मम्मी हैरान थीं, लेकिन उन्होंने कहा, ‘‘जरूर बेटे.’’

‘‘मैं अपने स्टडीरूम से सफाई शुरू करुंगा,’’ मानव ने कहा. 3 घंटे की मेहनत के बाद घर चमक गया. उस के प्रयास से खुश हो कर मम्मी ने कहा, ‘‘तुम्हारी पसंदीदा डिं्रक स्ट्राबेरी मिल्कशेक अभी बना कर तुम्हें देती हूं, बेटे.’’

‘‘नहीं मम्मी, धन्यवाद,’’ दौड़ कर घर से बाहर जाते हुए मानव ने कहा, ‘‘मुझे भूख नहीं है. कल बना देना. पी लूंगा.’’ हैरानपरेशान मम्मी नन्हे बेटे को आंखों से दूर होते देखती रहीं.

जब वह दोपहर के बाद घर लौटा, तब मानव गंदा और थका हुआ लग रहा था. उत्सुकता से मम्मी ने पूछा, ‘‘तुम कहां खेल रहे थे?’’ मानव मुसकरा कर बोला, ‘‘कल मैं आप को सब कुछ बता दूंगा, मम्मी.’’

अगले दिन सुबह 6 बजे मानव जाग गया. उस ने खुद के लिए कुछ सैंडविच लिए और मम्मी के लिए भी कुछ सैंडविच बना दिए. मम्मी उस से कुछ बोल पातीं, इस से पहले ही वह जल्दी से घर से बाहर चला गया.

अब मम्मी को चिंता होने लगी. वह डर गईं. उन्होंने फोन उठाया और पड़ोस की मिसेज अय्यर को फोन किया जिन की बेटी सुमेधा मानव की सब से अच्छी दोस्त थी. वे दोनों एक ही क्लास में पढ़ते थे. ‘‘मिसेज, अय्यर,’’ मम्मी बोलने लगीं, ‘‘ मानव कल से अजीब ढंग से व्यवहार करने लगा है. मुझे चिंता हो रही है कि…’’

‘‘मिसेज गोपाल,’’ मिसेज अय्यर ने उन्हें बीच में ही बोल कर रोक दिया, ‘‘मैं इस बारे में आप को फोन करने वाली थी.’’ ‘‘कल मेरे मना करने के बाद भी सुमेधा ने अपने कमरे को साफ किया. उस के बाद उस ने काफी देर बाद अपना खाना खाया,’’ मिसेज अय्यर ने कहा.

चिंतित मम्मी ने कहा, ‘‘मेरे लिए अच्छा रहेगा कि जुड़वां आरव और अनन्या की मम्मी को फोन कर पता करूं कि क्या हो रहा है.’’ मम्मी ने आरव और अनन्या की मम्मी को फोन किया.

दोनों जुड़वां बच्चे जो मानव के घर से दो घर आगे रहते थे, उसी की क्लास में पढ़ते थे. यहां भी अजीब कहानी जारी थी. उन की मम्मी ने कहा कि दोनों बच्चों ने कल स्टडीरूम को साफ करने के लिए नौकरानी से कहा था.

मम्मी मानव का इंतजार लंच के लिए करती रहीं. तीन बज चुके थे और वह अभी तक घर नहीं लौटा था.  चिंतित मम्मी ने उसे ढूंढ़ने के लिए बाहर जाने का निश्चय किया. जैसे ही वह घर से बाहर जाने के लिए निकलीं, मानव दौड़ता हुआ अंदर आया.

‘‘मम्मी, क्या आप दो बोतल स्ट्राबेरी मिल्कशेक अभी तुरंत बना देंगी और ठीक 4.30 बजे तक कम्युनिटी हौल में पहुंचा देंगी?’’ मानव

ने पूछा. मम्मी ने वैसा ही किया जैसा कि मानव ने कहा था. मम्मी समय पर कम्युनिटी हौल में मिल्कशेक ले कर पहुंच गईं.

वहां उन्होंने देखा कि हौल के प्रवेश द्वार पर नन्ही उत्तरा, अपने भाई आरूद्र के साथ खड़ी थी. अन्य बच्चों के मम्मीपापा भी हौल में आने लगे थे.

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पांच बजे शाम को सुमेधा, आरव और अनन्या के साथ मानव कम्युनिटी हौल से बाहर आया. बच्चों ने चुपके से एक रिबन दरवाजे के बाहर अच्छी तरह बांध दिया.

‘‘हमें अपनी कालोनी की लाइब्रेरी के उद्घाटन में सभी का स्वागत करते हुए गर्व हो रहा है,’’ बच्चों ने एक साथ कहा. ‘‘यह सभी के लिए नि:शुल्क है.

हमारे पास बच्चों की किताबें, कौमिक्स, पुरानी पाठ्य पुस्तकें और नोट बुक्स के कलेक्शन हैं. कालोनी के सभी बच्चों का यहां गरमी की छुट्टियों का दोपहर बिताने के लिए स्वागत है,’’ बच्चों ने कहा.

नन्ही उत्तरा ने रिबन अपने भाई आरूद्र की मदद से काटा. सभी के मम्मीपापा ने तालियां बजा कर खुशी जताई. मम्मी मुसकराईं. सभी कमरे में आ गए. अंदर बच्चों ने पुरानी और बेकार रैकों पर सुंदर ढंग से किताबों को सजा कर रखा था.

हरेक खंड में लेबल लगाया गया था. सभी के मम्मीपापा ने बच्चों के इस प्रयास की प्रशंसा की.

कुछ ने कम्युनिटी लाइब्रेरी में और अधिक किताबें दान करने की बात कही. जल्दी ही यह बच्चों का पसंदीदा स्थान बन गया.

वे अपने दोपहर के समय को पढ़ने और ड्राइंग करने में वहां बिताने लगे. हर दिन बारीबारी से एक बच्चे के मम्मीपापा उन के लिए स्नैक्स ले कर वहां जाने लगे जब कि कुछ मातापिता ने अपने बच्चों के साथ पढ़ना भी शुरू

कर दिया. अब गरमी की छुट्टी बच्चों के लिए अच्छी हो गई थी. उन की योजना आखिर में सफल हो गई थी. उन के मम्मीपापा भी अब उन की योजना पर गर्व करने लगे थे.

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