चोंचू चूहा बिल बनाने में माहिर था, एक इंजीनियर की तरह. वह बढि़या डिजाइन के बिल बनाता था, जिस में सुखसुविधा के साथसाथ सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाता था. इसलिए रैटी नगर में उस की बहुत मांग थी. रैटी नगर में ज्यादातर चूहे अपना घर बनाने के लिए चोंचू को ही बुलाते थे. घोंचू चूहा चोंचू का पड़ोसी था. वह भी चूहों के घर लिए डिजाइन बनाता था, लेकिन वह पुराने फैशन का और बेतरतीब तरीके से बिल बनाता था. वह बिल की खुदाई शुरू करता और बीच में ही छोड़ देता. यदि उस से कोई अलग से दरवाजा या भागने का रास्ता बनवाता तो वह उस के डबल चार्ज करता.

चूहों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता, यदि घर में एक ही दरवाजा होता. यदि उन के दुश्मन बिल्ली या सांप उन के मुख्य दरवाजे को घेर लेते तो बाहर भाग पाना मुश्किल हो जाता. इस के अलावा बारिश के पानी का खतरा तो रहता ही था. घोंचू ने अपना रेट तो कम रखा हुआ था, लेकिन काम खत्म होतेहोते वह महंगा ही पड़ जाता था. घोंचू कभी भी चोंचू की तरह कुछ नया नहीं सोचता था, बल्कि घोंचू की सफलता से और चिढ़ता रहता. वह सोचता कि यदि चोंचू नहीं होता तो उस की कमाई अधिक होती. उस ने चोंचू के बारे में अफवाह फैलानी शुरू कर दी कि यदि चोंचू इतना ही अच्छा डिजाइनर है तो मेरे रेट में ही सभी सुविधाओं वाला घर बना कर दिखाए.

यह बात चूहों के चीफ के पास पहुंची. वह अपने लिए भी एक घर बनवाना चाहता था. उस ने चोंचू और घोंचू को बुला कर कहा, ‘‘मैं चाहता हूं कि तुम दोनों सभी सुखसुविधाओं वाला घर डिजाइन करो और बनाओ. दोनों को निश्चित समय और कीमत में वह घर तैयार करना है. जो बढि़या बनाएगा, उसे पुरस्कार दिया जाएगा.’’ दोनों राजी हो गए. घोंचू ने बिल बनाने के लिए एक टीले को चुना, जो एक तालाब के नजदीक था. उस ने एक रास्ता तालाब की ओर बनाया और दूसरा ऊपर टीले की ओर. अपना काम दिखाते हुए उस ने चीफ से कहा, ‘‘चीफ, आप जब चाहें तालाब की ओर पानी पीने जा सकते हैं और जब चाहें धूप सेकने के लिए टीले के ऊपर.

‘‘ यदि बिल में पानी भर जाए, तो आप ऊपर जा सकते हैं. यदि किसी एक दरवाजे के पास खतरा दिखे तो दूसरे दरवाजे से भाग सकते हैं, नहीं तो आप बिल के बीच में आराम कर सकते हैं.’’ बिल को ठीक से देखने और टीले की ऊंचाई देख कर चीफ ने कहा, ‘‘बहुत सुंदर, बिल से ऊपरनीचे जाने से अच्छा व्यायाम भी हो जाएगा.’’

चीफ से प्रशंसा सुन कर घोंचू को घमंड हो गया. वह बोला, ‘‘चीफ, यदि आप चाहें तो मैं सुरक्षा के लिए इस में तीसरा दरवाजा बना सकता हूं. लेकिन इस के लिए आप को तीनगुने रुपए देने होंगे.’’ चीफ ने कहा, ‘‘अभी मुझे चोंचू का काम भी देखने दो. फिर मैं तुम्हें बताऊंगा.’’

‘‘फिर आप उस का काम देखने जाइए. मैं क्यों मना करूंगा?’’ चोंचू का नाम सुनते ही घोंचू लालपीला होते हुए बोला. वह भी चीफ के पीछेपीछे चल पड़ा. चोंचू ने एक पहाड़ी के पास बिल बनाया था. चोंचू ने बिल दिखाते हुए कहा, ‘‘चीफ, एक दरवाजा तालाब की तरफ खुलेगा. सूरज की रोशनी और तालाब का पानी आप के बिल में भी आएगा. दूसरा दरवाजा खुले मैदान की तरफ खुलेगा. दिन भर आप के बिल में सूरज की रोशनी आती रहेगी और खतरा आने पर आप का सब से नजदीकी दरवाजा भी यही होगा.’’

‘‘क्या इस में और भी कोई विशेष बात है,’’ चीफ ने पूछा. चोंचू ने कहा, ‘‘तीसरा दरवाजा दक्षिण की ओर खुलता है, जो मैदान और पहाड़ी के टौप के बीच में है. इस से भी सूरज की रोशनी देर तक आती रहेगी. ये तीनों रास्ते एकदूसरे से जुड़े हुए हैं. हवा की दिशा में होने के कारण बिल में कभी औक्सीजन की कमी नहीं होगी.

‘‘यदि कभी बाढ़ आ जाए, तो आप इस रास्ते से पहाड़ी के ऊपर पहुंच सकते हैं. आप पहाड़ी के ऊपर जा कर शिकार भी कर सकते हैं. आप यहीं से रैटी नगर को भी देख सकते हैं. ‘‘पहाड़ी के ऊपर के रास्ते में ही खाने का गोदाम भी है. आप का पूरा परिवार यहां आराम से रह सकता है. यह रास्ता बड़े पत्थर के नीचे से बना है.’’

चीफ ने घोंचू की ओर देखा. घोंचू बोला, ‘‘मैं ने पहले ही कहा था कि यदि आप चाहें तो मैं तीसरा रास्ता भी बना सकता हूं…’’ चीफ ने कहा, ‘‘चोंचू ने पूरा बिल एक निश्चित समय और कीमत में ही तैयार कर दिया है. लेकिन तुम्हें इस के लिए और समय और रुपए चाहिए.’’

घोंचू समझ गया कि चीफ सही कह रहा है. साथ ही उस ने यह भी सोच लिया कि अब वह भी चोंचू से डिजाइन के अलगअलग तरीके सीखने की कोशिश करेगा.