आसमान में कालेकाले बादल छा रहे थे. यह देख कर फ्रैंकी मेढक बहुत खुश था.

‘‘लगता है कि बारिश का मौसम आ गया है,’’ उस ने आसमान की ओर देखते हुए कहा,

‘‘अब तो खूब मजा आएगा. मैं पानी में खूब छपाकछपाक करूंगा.’’

पेड़ पर बैठा मोंटी बंदर बहुत देर से फ्रैंकी को देख रहा था.

‘‘तुम आसमान की ओर क्या देख रहे हो?’’ मोंटी ने पूछा.

‘‘मैं बादलों को देख रहा हूं. बारिश जो होने वाली है.’’ फ्रैंकी ने अपनी खुशी बताई.

‘‘ऊंह, बारिश,’’ मुंह बनाते हुए मोंटी बोला, ‘‘इस मौसम में मुझे बहुत परेशानी होती है. पेड़ पर बनाया मेरा घर बारिश और तूफान में ऐसे हिलता है जैसे कि वह गिरने वाला हो. बारिश होने से मैं भीग जाता हूं और मुझे निमोनिया हो जाता है.’’

‘‘लेकिन मानसून के फायदे भी हैं. हमें गरमी से राहत मिलती है. सूखे खेत, तालाब व नदियां पानी से भर जाती हैं,’’ फ्रैंकी बोला.

‘‘मुझे यह मानसून पसंद नहीं.’’ बोल कर मुंह बनाते हुए मोंटी अपने घर में घुस गया.

फ्रैंकी आगे बढ़ा. सामने गैली बकरी जल्दी से अपना सारा सामान अपने घर में ले जा रही थी.

‘‘अरे गैली बहन, इतनी जल्दी में क्यों लग रही हो?’’ फ्रैंकी ने जानना चाहा.

‘‘क्या तुम देख नहीं रहे कि बारिश होने वाली है. अगर मैं जल्दी से अपनी खानेपीने की चीजें घर के अंदर नहीं ले गई, तो ये भीग कर खराब हो जाएंगी,’’ गैली भुनभुनाते हुए बोली,

‘‘मेरे कपड़े भी सूख गए हैं. अगर बारिश हो गई, तो सब गीले हो जाएंगे. सारी मेहनत बेकार हो जाएगी.’’

‘‘बारिश का मौसम इतना भी खराब नहीं है.’’

फ्रैंकी ने अपनी बात रखनी चाही, ‘‘तुम्हारे बगीचे की घास सूखी हुई है. बारिश के पानी से यह घास हरी हो जाएगी, तब तुम्हें इन का स्वाद बहुत अच्छा लगेगा.’’

‘‘तुम चुप रहो.’’ इतना कहती हुई गैली अपने घर के अंदर चली गई.

‘‘पता नहीं सब को बारिश से क्या नाराजगी है?’’ फ्रैंकी की कुछ समझ में नहीं आया.

जल्दी ही वह चींटियों की एक कालोनी में पहुंचा. चींटियों का झुंड बहुत तेजी से काम कर रहा था. वहीं उसे अपनी दोस्त एनी चींटी मिल गई.

‘‘एनी, तुम सभी तो बहुत बिजी दिख रही हो?’’ फ्रैंकी ने पूछा.

‘‘हां फ्रैंकी, देख नहीं रहे बारिश होने वाली है. पता नहीं कितने दिनों तक हमें घर के अंदर रहना पड़े. इसलिए खानेपीने का सामान सुरक्षित जगहों पर रख रही हूं,’’ एनी बोली.

‘‘मैं ने सुना है कि बारिश के मौसम में तुम्हें

ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है?’’ उदास हो कर

फ्रैंकी ने पूछा.

‘‘हां फ्रैंकी. हम चींटियों को खाली बैठने की आदत नहीं है. लेकिन बारिश का मौसम हमारे लिए मुश्किलें खड़ी कर देता है. हम कहीं जा नहीं

सकते. हर समय घरों में दुबके रहना पड़ता है,’’ एनी ने बताया.

‘‘ओह.’’ फ्रैंकी के मुंह से निकला.

‘‘अच्छा, बहुत काम पड़ा है. मैं बाद में बात करूंगी.’’ इतना कहती हुई एनी न जाने कहां गुम हो गई.

अब फ्रैंकी को खराब लग रहा था. ‘क्या सचमुच बारिश बुरी है? जंगल का कोई भी जानवर

बारिश नहीं चाहता है, सिर्फ मुझे छोड़ कर?’ वह सोचने लगा.

फ्रैंकी बुझे मन से तालाब के पास बने अपने घर में पहुंचा. तब तक आसमान बादलों से ढंक चुका था.

‘‘टप..टप…टप…’’ अचानक बाहर बारिश की कुछ बूंदें पड़ीं, तो उसे थोड़ी खुशी हुई. वह घर से बाहर निकल आया.

‘‘सिर्फ मैं हूं जो बारिश का इंतजार कर रहा हूं. मुझे बारिश में भीगना अच्छा लगता है. लेकिन जानवरों को निमोनिया हो जाता है,’’ वह बुदबुदाया.

लेकिन उसे अपने दोस्तों की तकलीफें सुन कर अफसोस भी था.

‘‘अगर मेरे दोस्तों को बारिश से दिक्कतें हैं, तो मैं भी अपने घर में ही रहूंगा.’’ इतना कहते हुए वह अपने घर के अंदर चला गया.

वह घर की खिड़की के पास बैठ गया. बारिश देख कर फ्रैंकी को अच्छा तो लग रहा था, लेकिन अकेले उसे घर से बाहर निकलने की इच्छा नहीं हुई.

‘‘फ्रैंकी… ओ फ्रैंकी.’’ अचानक उसे मोंटी बंदर की आवाज सुनाई दी तो वह चौंका.

‘‘तुम घर में दुबके हुए हो और हम तुम्हें बाहर खोज रहे थे.’’ गैली बकरी भी बाहर से चिल्लाई.

‘‘छिपने से काम नहीं चलेगा. पहली बारिश में हम सभी भीगने और खेलने आए हैं. तुम्हें तो बारिश का मौसम सब से ज्यादा पसंद है. फिर भी तुम घर में हो.’’ एनी चींटी दरवाजा खटखटाती हुई बोली.

फ्रैंकी की समझ में कुछ नहीं आया. वह बाहर निकला तो देखा कि जंगल के सारे जानवर बारिश का मजा ले रहे हैं.

‘‘मैं तो तुम सभी के लिए…’’ फ्रैंकी ने कहना चाहा.

‘‘हम सब जानते हैं.’’ गैली ने टोकते हुए कहा, ‘‘वैसे एक बात कहूं, बारिश का मौसम इतना भी बुरा नहीं है. हमें भीगने में बहुत मजा आ रहा है.’’

यह सुन कर फ्रैंकी खुशी से झूम उठा. वह भी पहली बारिश का मजा लेने लगा.