ग्रैसी चिंपैंजी अपनी दादीमां के साथ अशोकवन में रहती थी. उस के मातापिता बचपन में ही गुजर गए थे. ग्रैसी ने मेहनत तो बहुत की लेकिन पढ़ाई में उस के नंबर अच्छे नहीं आए. उस के दोस्त टैडी भालू, हौर्नी गैंडा, नैन्सी और दूसरे दोस्तों के नंबर बहुत अच्छे आए थे. वे डाक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्रोफेसर बनने की बातें कर रहे थे. ग्रैसी चुपचाप थी.

हाईस्कूल से पास होने के बाद सभी छात्र कालेज में पढ़ने वन से बाहर चले गए. ग्रैसी को किसी कालेज में एडमिशन नहीं मिला, क्योंकि उस के नंबर कम थे. वह बहुत दुखी थी.

दादीमां ने पूछा, ‘‘मेरी प्यारी ग्रैसी, दुखी क्यों है?’’ ‘‘मेरे कुछ दोस्त आगे की पढ़ाई के लिए अशोकवन से चले गए, कुछ दोस्त अपने मम्मीपापा के व्यवसाय से जुड़ गए. मैं भी अपने जीवन में कुछ करना चाहती थी लेकिन कम नंबर की वजह से मेरा किसी कालेज में एडमिशन ही नहीं हुआ,’’ ग्रैसी ने आंखों में आंसू भर कर कहा.

‘‘कालेज में एडमिशन नहीं हुआ, तो क्या हुआ. तुम अपने लिए कोई दूसरा कैरियर भी चुन सकती हो, जो तुम्हारी योग्यता के अनुसार हो,’’ दादी मां ने कहा.

‘‘लेकिन मैं न तो कुछ जानती हूं, न ही कुछ कर सकती हूं.’’ दुखी ग्रैसी बोली.

‘‘ग्रैसी, तुम्हारे अंदर प्रतिभा छिपी हुई  है. उस के बारे में सोचो,’’ दादीमां ने उत्साह बढ़ाते हुए कहा, ‘‘याद करो, तुम्हें स्कूल में क्राफ्ट विषय में ए प्लस मिला था. तुम ने पुराने टुकड़ों से चटाई बनाई थी और टूटी हुई चूडि़यों पर पेंटिंग की थी. तुम्हारे द्वारा बनाए गए कागज के रंगीन फूलों

से पूरे स्कूल को सजाया गया?था. क्या तुम भूल गई?’’

‘‘लेकिन इन कामों में तो आप ने मेरी सहायता की थी,’’ ग्रैसी ने जवाब दिया.

‘‘बिलकुल. लेकिन डिजाइन तो तुम ने ही बनाए थे. मैं अब भी तुम्हारी सहायता के लिए तैयार हूं,’’ दादी बोलीं.

‘‘हम वही चीजें बनाते हैं,’’ ग्रैसी ने कहा.

बिना समय बरबाद किए, ग्रैसी ने अपने कामों की एक सूची बना ली. सब से पहले उस ने औनलाइन पता किया कि वह अपना काम कैसे शुरू कर सकती है.

इस के बाद वह अपने आर्ट और क्राफ्ट टीचर चिंपी बैबून से मिलने गई. चिंपी ग्रैसी को बहुत पसंद करती थी. जब ग्रैसी ने उसे बताया कि वह उन से पेंटिंग सीखना चाहती है तो चिंपी बहुत खुश हुई.

चिंपी बोली, ‘‘मैं शाम को 4 बजे से 6 बजे तक खाली रहती हूं. तुम इस समय आ कर मुझ से सीख सकती हो.’’

उस दिन ग्रैसी ने ‘फुलकारी,’ ‘चिनकंकरी’ के साथसाथ अलगअलग राज्यों की कशीदाकारी सीखी. शाम को वह फिर से चिंपी से पेंटिंग सीखने गई.

दोपहर में उस ने इंटरनैट से कपड़ों और कागज पर फूल बनाना सीखा. ग्रैसी मेहनती तो थी ही, वह समझदार भी थी. उसे इन सारी बातों को सीखने में ज्यादा समय नहीं लगा.

जल्दी ही ग्रैसी हैंडिक्राफ्ट्स की सभी चीजें बनाना सीख गई. वह कृत्रिम फूल, कला की चीजें बनाने लगी. पुरानी बोतलों पर चित्रकारी करने लगी. उस ने नारियल की जटाओं से झालर भी बनाए और आइसक्रीम की स्टिकें भी. वह घरघर जा कर ये चीजें बेचने लगी.

ग्रैसी ने स्टैचू बनाने की क्लास में भी जाना शुरू कर दिया. वह प्रतिदिन नईनई डिजाइनों की चीजें बनाने लगी.

उस की बनाई चीजों की मांग भी बढ़ने लगी. उस ने अपने काम में सहायता के लिए कुछ नए लोगों को भी रख लिया.

वन में ग्रैसी की बनाई चीजों की चर्चा होने लगी. एक दिन भूरी बंदरिया, शिल्पी भेडि़या और डिस्को बतखी उसे बाजार में मिलीं.

‘‘मुझे सीव्यू बहुत पसंद है. इसलिए मैं ने ग्रैसी से अपनी चादर पर सीव्यू पेंट करवाया,’’ शिल्पी बोली.

‘‘हां, मैं ने तो अपने दुपट्टे पर पहाड़ से गुजरती हुई नदी का चित्र बनवाया,’’ भूरी ने कहा.

‘‘इस में कोई शक नहीं कि यदि तुम्हें अपने घर को सजाना हो या फिर बिलकुल नए तरह का उपहार किसी को देना हो, तो उस के लिए ग्रैसी का स्टोर सब से अच्छा है,’’ डिस्को ने अपनी बात कही.

जल्दी ही ग्रैसी को अपने स्टोर को और बड़ा करना पड़ा, जिस की चर्चा पूरे वन में होने लगी. गरमी की छुट्टियां हो गई थीं. ग्रैसी के पुराने दोस्त अपनेअपने घर आए थे. उन्हें ग्रैसी के बारे में सुन कर बहुत हैरानी हुई.

‘‘तुम तो चमत्कारी हो, ग्रैसी. हमें अभी 2 साल और पढ़ाई करनी होगी, फिर नौकरी ढूंढ़नी होगी. लेकिन तुम ने तो इतने कम समय में बहुत कुछ हासिल कर लिया. तुम ने एक अच्छा व्यापार शुरू कर दिया.’’ ग्रैसी से मिलने वाला हर कोई उस से कहता.

थोड़े दिनों बाद ग्रैसी ने डिजाइन सिखाने वाले एक कालेज में एडमिशन ले लिया. यह पार्टटाइम कोर्स था.

दादीमां ने ग्रैसी से कहा, ‘‘तुम्हारा व्यापार तो अच्छाखासा चल पड़ा है फिर तुम्हें अब कुछ करने की आवश्यकता क्यों है?

‘‘मैं उच्च पढ़ाई करने के अपने सपने को पूरा करना चाहती हूं. अपने कैरियर में और नई तकनीक जोड़ना चाहती हूं. इस से मेरा काम और आगे बढ़ेगा,’’ ग्रैसी ने जवाब दिया.

दादीमां बहुत खुश थी कि ग्रैसी ने अपने सपने को साकार करने का अच्छा तरीका ढूंढ़ लिया है.