जब से जीतू बाघ ने जंगल को छोड़ा था, शांतिवन के सभी जानवर दुखी थे. जीतू शरारती था, मजाकिया और बातूनी था. वह बहादुर और हिम्मती भी था. वह जंगल के हीरो के रूप में जाना जाता था क्योंकि उस का दिमाग तेज था. उस की पीली, औरैंज कोट थी जिस पर खूबसूरत काली पट्टियां थीं. पिछले कुछ सप्ताह से जीतू जंगल में दिखाई नहीं दिया था. सभी उस की तलाश में लगे थे लेकिन अभी तक वे उसे ढूंढ़ नहीं पाए थे.

‘‘जीतू कहां चला गया? उस के बिना कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा,’’ भीखू भेडि़ए ने कहा. ‘‘जब किसी ने उस की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाई, फिर बिना कुछ कहे वह यहां से कैसे चला गया?’’ शेरूसिंह ने पूछा जो जंगल का राजा था.

कुछ महीनों तक जीतू के दोस्त उसे ढूंढ़ते रहे. ‘‘मुझे उम्मीद है कि जीतू को हम जल्दी ही ढूंढ़ लेंगे,’’ एक दिन आंखों में आंसू भरे नीलू सियार ने कहा. बिल्लू बिल्ली की आंखों में भी आंसू भरे थे. सभी को जीतू की कमी खल रही थी.

वे सभी उस समय कुछ सोच रहे थे, तभी उन्होंने मीकू बंदर को अपनी ओर भाग कर आते हुए देखा. वह हांफ रहा था लेकिन बहुत खुश लग रहा था. मीकू चिल्लाया, ‘‘तुम सभी के लिए मेरे पास एक अच्छी खबर है.’’

‘‘वह क्या है?’’ एक स्वर में सभी ने पूछा. ‘‘हमारा जीतू लौट आया है,’’ मीकू चिल्लाया.

‘‘सच में,’’ सभी चिल्लाए. हालांकि उन्हें इस खबर पर विश्वास नहीं हो रहा था. इस से पहले कि वे मीकू से कुछ और पूछ पाते, उन्होंने जीतू को अपनी ओर दौड़ कर आते

हुए देखा. उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था. वे सभी जीतू को टकटकी लगाए देख रहे थे.

शेरू ने कहा, ‘‘जीतू, तुम कहां चले गए थे? हम से कोई गलती हो गई क्या? अगर हम से कुछ गलत हुआ था तो तुम्हें हमें बताना चाहिए था, हम सुधार कर लेते.’’ शेरू की बातों से सहमत होते हुए सभी जानवरों ने अपना सिर हिलाया.

जीतू बोला, ‘‘नहीं, मुझे आप सभी से कोई दुख नहीं पहुंचा है और न ही मैं अपनी मरजी से यहां से गया था.’’

‘‘तो फिर तुम इतने दिनों तक कहां रहे?’’ नीलू ने पूछा.

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जीतू की आंखों से आंसू बहने लगे. ‘‘मैं जितने दिनों यहां से दूर रहा, मेरी जिंदगी के वे सब से बुरे दिन थे. उस दिन मैं अन्य दिनों की तरह नदी किनारे टहलने के लिए गया था. मैं ने एक पेड़ के निकट एक अजीब बात देखी. ‘‘उत्सुकता से मैं उसे देखने के लिए पास चला

गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, मैं एक जाल में फंस गया जो मेरे लिए बिछाया

गया था. इस तरह मैं पकड़ा गया.’’ ‘‘फिर क्या हुआ? क्या तुम ने खुद को छुड़ाने के लिए कुछ नहीं किया? तुम ने आजाद होने के लिए क्या किया?’’ जीतू की तकलीफ को महसूस करते हुए नीलू ने पूछा.

‘‘मैं ने पूरी कोशिश की. लेकिन मैं ने जितनी कोशिश की, उतना ही जाल में और फंसता चला गया. अंत में मैं ने हार मान ली और उस के बाद मैं बेहोश हो गया.’’ ‘‘तुम बेहोश हो गए? बड़ी विचित्र बात है. उस के बाद क्या हुआ?’’ उत्सुकता से बिल्लू ने पूछा.

जीतू बोला, ‘‘शिकारी ने मेरी पीठ में बेहोश करने वाली तीर मारी थी. मुझे गहरी नींद में सुला दिया था. वे चोरी से मुझे शहर ले गए और सर्कस वाले को बेच दिया. सर्कस का मैनेजर एक कठोर अधिकारी था जिस ने मुझे कई दिनों तक पिंजरे में बंद रखा. उस के बाद उस ने मुझे बाहर निकाला और सर्कस में परफौर्म करने के लिए कई करतब और स्टंट सिखाए. ‘‘मुझे करतब दिखाने से घृणा हो रही थी. बिना आजादी के रहना बहुत ही दुखद था और कई दिनों तक किसी के आदेश को मानना और उस के काबू में रहना मेरे लिए बहुत ही दर्दनाक था,’’ जीतू ने कहा.

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‘‘जहां तक करतब की बात है तो मैं सच में उन में से एक करतब से डरा हुआ रहता था.’’

कह कर जीतू कांपने लगा क्योंकि उसे ट्रेनिंग की याद आ गई. ‘‘वह करतब क्या था?’’ मीकू ने पूछा.

‘‘एक आग के छल्ले से हो कर कूदना. तुम सभी को तो पता ही है कि मैं आग से कितना

डरता हूं. मैं ने ट्रेनर से विनती की कि मुझ से आग को दूर रखें और इस के लिए मैं ने कई बार इशारे कर उसे बताना चाहा फिर भी ट्रेनर ने मुझे नजरअंदाज किया. ‘‘कई बार मैं करतब दिखाते हुए आग से

जल भी गया जिस के निशान मेरे शरीर पर रह गए हैं.’’

‘‘क्या तुम्हारे इशारे को ट्रेनर समझ नहीं सका था?’’ भीखू ने पूछा. ‘‘वह मेरे इशारे को समझता था लेकिन मेरी भावनाओं को उस ने नजरअंदाज किया. इस करतब को देखने के लिए सर्कस में बड़ी भीड़ आती थी. यह करतब बहुत आकर्षक होता था. सर्कस को खूब रुपए मिलते थे,’’ जीतू ने कहा.

‘‘ओह, वे अपनी जरूरतों के लिए लगातार तुम्हें चोट पहुंचाते रहे. क्या वे तुम्हें कुछ खाने के लिए भी देते थे? तुम बहुत ही कमजोर दिख रहे हो,’’ कालू ने पूछा. ‘‘ज्यादा कुछ नहीं,’’ जीतू ने कहा, ‘‘मुझे हर

दिन बासी मीट के कुछ टुकड़ों पर जिंदा रहना पड़ रहा?था और मुझे एक गंदे गड्ढे से पानी पीना पड़ता था. ज्यादा समय तो मैं भूखा ही रहता था. मुझे बहुत ही सख्त पहरेदारी में रखा जा रहा था.’’ ‘‘तब तुम वहां से भागने में सफल कैसे हुए?’’ जीतू के दर्द को महसूस करते हुए मीकू ने पूछा.

‘‘एक दिन जब शो चल रहा था. एक लड़की जो झूले पर थी, नीचे गिर गई. सर्कस के सभी व्यक्ति उस की देखभाल में व्यस्त हो गए. मेरा प्रदर्शन उस लड़की के प्रदर्शन के बाद था और मैं पिंजरे से बाहर था. मैं मौका देख कर भाग निकला क्योंकि मुझे कोई देख भी नहीं रहा था.’’ ‘‘बहुत अच्छा हुआ कि तुम भाग निकले, नहीं तो हमेशा के लिए पिंजरे में डाल दिए जाते. एक कैदी की जिंदगी जीने से बुरा कुछ और नहीं हो सकता. मुझे भी वर्षों पहले एक शिकारी ने पकड़ लिया था. वह मेरे पैरों में जंजीरें डाल देता था और बाहर ले जाता था,’’ कालू ने कहा. उस की आंखों में गुस्सा और आंसू भरे थे.

सब को सुनने के बाद शेरू ने कहा, ‘‘मनुष्यों को भी हमारी भावनाओं को समझना चाहिए. तभी वे हमारे साथ हो रही क्रूरता को रोक सकेंगे. बहुत से जानवरों और पक्षियों की संख्या बड़ी तेजी से कम हुई हैं, इस के लिए मनुष्यों के बुरे व्यवहार ही जिम्मेवार हैं. कम होने वाले जानवरों और पक्षियों के न तो भाई बचे हैं और न ही बहन. जीतू के साथ भी ऐसा ही है. चूंकि जीतू को छोड़ कर और कोई जिंदा नहीं बचा है, इसलिए हमें इस की खास देखभाल करनी होगी.’’ ‘‘हां, जरूर, हम सभी मिल कर अपना हाथ जीतू को बचाने के लिए मिलाते हैं. हम उस की देखभाल करेंगे,’’ सभी ने एक स्वर में कहा.

शेरू ने कहा, ‘‘जीतू, तुम वास्तव में असली हीरो हो. हम सभी जंगल में वापस आने के लिए तुम्हारा स्वागत करते हैं और एक पार्टी का आयोजन करते हैं. तुम्हारा घर यहां हैं, हम सभी के साथ.’’ सभी जानवर उत्साहित थे. पार्टी की बात सुन कर और अधिक उत्साह से भर गए. वे सभी जल्दी से पार्टी की तैयारियों में लग गए.

जीतू भी अपने पुराने घर और दोस्तों के बीच आ कर बहुत खुश था. उस की आंखों में खुशी के आंसू थे.