खुशी को कद्दू और सीताफल खाना बिलकुल पसंद नहीं था. बल्कि उसे कोई भी सब्जी खाना पसंद नहीं था. वह जब भी खाती तो पनीर या आलू.

वह अपनी मम्मी के साथ जब शौपिंग के लिए निकलती तो टौफी, बिस्कुट, आइसक्रीम और जंकफूड के लिए जिद करती. जब मना किया जाता तो चीखनेचिल्लाने लगती.

मम्मीपापा उसे मौसमी फल और सब्जियां खाने को कहते. लेकिन वह नाराज हो कर खाने से साफ मना कर देती.

कभीकभी तो पूरे दिन वह भूखी रह जाती. थकहार कर मम्मीपापा उसे पनीर या आलू खाने को दे देते.

गरमी की छुट्टियों में खुशी की दादीमां आई थीं. खुशी की खुशी का ठिकाना नहीं था क्योंकि दादीमां रात को रोज उसे नई और मनोरंजक कहानियां सुनाया करती थीं.

जब दादीमां को पता चला कि खुशी को हरी सब्जी खाना पसंद नहीं है, तो दादी मां ने भी उसे समझाने का प्रयास किया.

‘‘खुशी, शरीर को स्वस्थ और मजबूत रखने के लिए सिर्फ प्रोटीन्स की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि इस के लिए फलों और सब्जियों में पाए जाने वाले विटामिन्स और मिनरल्स भी जरूरी होते हैं.’’ एक रात दादीमां ने समझाते हुए कहा.

दादीमां के समझाने के बाद खुशी कद्दू, पालक और भिंडी खाने को तो राजी हो गई लेकिन तोरी और करेला खाने से फिर भी मना कर दिया. इन सब्जियों के नाम सुनते ही उसे उल्टी आने लगती थी.

कुछ सब्जियों में खुशी की रुचि देख कर दादीमां ने मम्मी से तोरी की सब्जी बनाने के लिए कहा. यह सुन कर खुशी बहुत उदास हो गई.

‘‘नहीं दादीमां, स्कूल में कोई भी यह सब्जी नहीं लाता,’’ खुशी ने गुस्से से कहा. दादीमां ने कुछ नहीं कहा.

रात में जब खुशी सोने के लिए आई, तो उस ने अन्य दिनों की तरह दादीमां से कहानी सुनाने के लिए कहा.

दादीमां ने सिंह और खरगोश की कहानी सुनानी शुरू कर दी, ‘‘एक सिंह ने जानवरों को बारीबारी से अपनी गुफा में बुलाया और एकएक कर उन्हें खा गए. जब खरगोश की बारी आई, तो वह लेट से पहुंचा.

‘‘सिंह के पूछने पर उस ने बताया कि उसे दूसरे सिंह ने रोक लिया था. यह सुन कर सिंह को गुस्सा आ गया और वह दूसरे सिंह को मारने के लिए खरगोश के साथ चल पड़ा.

‘‘दूसरे सिंह को नहीं देख कर खरगोश ने कहा कि शायद वह सिंह इस कुएं में चला गया है.

‘‘इस के बाद सिंह ने कुएं में देखा, तो उसे अपनी परछाईं दिखाई दी. जब उस ने दहाड़ लगाई,

तो कुएं के अंदर से भी उसे दहाड़ की आवाज सुनाई दी.

‘‘गुस्से में सिंह कुएं के अंदर कूद गया और उस की मौत हो गई.’’ कह कर दादीमां चुप हो गईं.

‘‘दादीमां, मैं ने पहले भी यह कहानी सुनी थी,’’ खुशी ने कहा.

‘‘हां बेटी, लेकिन तुम ने पूरी कहानी नहीं सुनी,’’ दादीमां ने मुसकराते हुए कहा.

‘‘पहले भी तो आप ने यही कहा था कि वह सिंह मर गया और कहानी खत्म हो गई,’’ खुशी ने दादीमां

से कहा.

‘‘लेकिन अभी तो मैं यह कहना चाहती हूं कि खरगोश कितना बुद्धिमान था कि उस ने अपनी चालाकी से सिंह जैसे बड़े जानवर को मार दिया,’’ दादीमां ने कहा.

खुशी ने चौंकते हुए कहा, ‘‘दादीमां, मैं ने इस बारे में तो सोचा ही नहीं कि खरगोश को यह आइडिया कैसे आया.’’

दादीमां चुपचाप थीं. खुशी ने कहा, ‘‘प्लीज, दादीमां, बताओ न?’’

दादीमां ने धीरे से कहा, ‘‘खरगोश इसलिए बुद्धिमान था क्योंकि वह सभी मौसमी फल और सब्जियां खाता था. खासतौर से कद्दू और करेला.’’

कुछ देर रुक कर दादीमां बोलीं, ‘‘सिंह की गुफा में जाने से पहले उस ने ये सब्जियां खाई थीं.’’

‘‘लेकिन दादीमां, हमारे पड़ोसी का खरगोश तो सिर्फ गाजरें खाता है. यदि हम कद्दू या करेला देते हैं, तो उसे वह बगल में रख देता है.’’ खुशी ने कुछ सोचते हुए कहा.

‘‘हां, इसी लिए तो बिल्लियों को देख कर वह डर जाता है. यदि वह भी ये सब्जियां खाता, तो बिल्ली या अन्य किसी जानवरों से नहीं डरता,’’ दादीमां बोलीं.

‘‘जो बच्चे मौसमी हरी सब्जियां और फल खाते हैं, वे समझदार और बुद्धिमान होते हैं.

‘‘सब्जियां हमें फिट रखती हैं, अच्छा स्वास्थ्य देती हैं और सभी बीमारियों को दूर भगाती हैं,’’ दादीमां ने आगे बताया.

अब खुशी के चेहरे पर मुसकराहट आ गई थी. वह दादीमां से लिपट कर सो गई.

दूसरे दिन सुबह के नाश्ते के बाद खुशी ने कहा, ‘‘मम्मी, आज मेरे लिए कद्दू की कढ़ी बनाना.’’ यह सुन कर सभी हैरान रह गए.

मम्मीपापा ने दादीमां की ओर देखा. वे समझ गए कि यह दादीमां की कहानी का जादू है.