आह्नवी और शान्वी दो अच्छी सहेलिया थीं. दोनों नन्ही लड़कियां क्लास वन में एकसाथ पढ़ती थीं. तेज आंखों वाली आह्नवी पढ़ाई में बहुत ही अच्छी थी, जबकि क्रिएटिव शान्वी को पेंटिंग से बहुत प्यार था. उसे पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगता था. एक दिन उन की क्लास टीचर मिस सौरेंग ने

एक प्रश्नोत्तरी कराया. ‘‘इंद्रधनुष के विभिन्न रंगों को तुम में से कोई बता सकती है?’’

टीचर ने पूछा. आह्नवी ने तुरंत अपना हाथ उठाया. ‘‘वायलेट, इंडिगो, नीला, हरा, पीला, औरैंज और लाल,’’ उस ने कहा.

‘‘बिलकुल सही, आह्नवी, सामने आओ, प्लीज,’’ मिस सौरेंग ने कहा. सभी बच्चों ने ताली बजाई. सहीसही उत्तर देने के लिए टीचर ने आह्नवी को बधाई दी और उसे गले से लगा लिया. अब शान्वी जो यह सब कुछ देख रही थी, ईर्ष्या से भर गई. जब आह्नवी अपनी सीट पर आई, उस ने शान्वी को सुबकते देखा. इस से आह्नवी को हैरानी हुई.

‘‘क्या बात है, शान्वी?’’ उस ने पूछा. ‘‘आज के बाद मैं अपना लंच तुम से शेयर नहीं करूंगी,’’ रोते हुए शान्वी ने कहा, ‘‘कोई भी मुझे प्यार नहीं करता. तुम भी नहीं.’’ वह सिसकने लगी.

हैरानपरेशान आह्नवी बोली, ‘‘यह सच नहीं है. तुम मेरी सब से अच्छी दोस्त हो.’’ शान्वी रोती रही.

‘‘दुखी मत हो. प्लीज, रोओ मत, नहीं तो मैं भी रोने लगूंगी,’’ आह्नवी ने कहा. अब उस की आंखों में भी आंसू आ गए थे. लेकिन शान्वी ने उस की बातों पर ध्यान नहीं दिया. वह बोली, ‘‘हां, यह सच है, आखिर क्यों तुम परीक्षा के समय अपने उत्तर मुझे नहीं दिखाती हो?’’

आह्नवी समझ गई थी कि आखिर क्यों शान्वी दुखी थी. ‘‘ठीक है,’’ वह बोली, ‘‘इस बार मैं अपने सारे उत्तर तुम्हें दिखाऊंगी. यह वादा रहा. अब मुसकरा दो.’’ शान्वी चुप हो गई. दोनों लड़कियों ने आंसुओं से भरे एकदूसरे के चेहरे को देखा और हंसने लगीं. अब दोनों सब से अच्छी दोस्तों के बीच सब कुछ फिर से ठीक हो गया था.

सैकंड टर्म की परीक्षा निकट आती जा रही थी. इस बार परीक्षा की तैयारी में आह्नवी ने अपना पूरा जोर लगा दिया था. उस की मम्मी रीता अपनी बेटी को इतनी मेहनत करते देख कर बहुत खुश थीं. पर थोड़े ही दिनों में वह जान गईं कि आह्नवी का अतिरिक्त प्रयास अपनी दोस्त शान्वी के लिए था क्योंकि उसे उस ने आने वाली परीक्षा में मदद करने का वादा किया था. इस के ठीक विपरीत शान्वी को परीक्षा के लिए पढ़ाई करने की फिक्र नहीं थी. उस की मम्मी गीता अपनी बेटी की लापरवाही को देख कर बहुत ही अधिक चिंतित थीं.

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परीक्षा का दिन आ गया. दोनों लड़कियां परीक्षा हौल में पहुंच गईं. मिस सौरेंग ने प्रश्नपत्र बांट दिए. जैसे ही आह्नवी ने इसे देखा, वह खुशियों से भर गई. वह सभी प्रश्नों के उत्तर जानती थी. खुशी से वह जल्दीजल्दी उत्तर लिखने लगी. लेकिन आह्नवी ने शान्वी से वादा किया था कि वह उस की मदद करेगी और शान्वी बहुत धीरे लिखने वाली लड़की थी. जल्दी ही शान्वी उसे ‘‘धीरे चलो,’’ बोल कर बाधा उत्पन्न करने लगी, क्योंकि उसे तेजी से लिखने में कठिनाई हो रही थी.

अंतिम घंटी बजी. परीक्षा खत्म हो गई. सभी छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिका जमा करा दिए. चूंकि आह्नवी लिखने में पीछे हो गई थी ताकि शान्वी उस की नकल कर सके, उस ने अपना कीमती समय खो दिया. कठिन मेहनत करने वाली लड़की शान्वी अपने पेपर को पूरा नहीं कर पाई. दो प्रश्नों के उत्तर वह नहीं दे पाई.

आह्नवी रोने लगी. वह बुझे मन से अपने घर गई. जबकि दूसरी ओर शान्वी बहुत खुश थी. उस ने आह्नवी के सारे किए उत्तरों को उतार लिया था. उसे पूरा विश्वास था कि वह अच्छा रैंक लाएगी. आखिरकार, परीक्षा का रिजल्ट आ गया. दोनों की मम्मी रीता और गीता को अपनेअपने बच्चों के रिपोर्टकार्ड लेने के लिए बुलाया गया.

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रीता यह जान कर हैरान हुईं कि उन की टौपर बेटी आह्नवी परीक्षा में किसी तरह तीसरा स्थान पा सकी थी. जबकि शान्वी की मम्मी गीता यह जान कर हैरान थीं कि बिना किसी मेहनत के भी उन की बेटी आह्नवी के साथ तीसरा स्थान पाई थी. दोनों मांएं जो अच्छी पड़ोसी भी थीं, बातचीत करने लगीं. तुरंत ही वे समझ गईं कि क्या हुआ था. उन्होंने आह्नवी को बुलाया, जो अपने खराब रिजल्ट के कारण रो रही थी. थोड़ा सा समझाने पर उस ने पूरी बात बता दी. अब गीता ने अपनी बेटी को वहां बुला कर कहा, ‘‘आह्नवी से क्षमा मांगो. तुम ने जो किया, वह गलत था.’’

उस के बाद वह आंसुओं में डूबी आह्नवी की ओर मुड़ीं, ‘‘मेरी बच्ची, ऐसा फिर कभी मत करना. चीटिंग करना अपराध है और दूसरे को चीटिंग करने देना भी एक अपराध है. ‘‘तुम्हारा काम, उसे सफल बनाने के बजाय जीवन में असफल ही बनाएगा. वह कभी भी अपनी कमजोरियों को नहीं जान पाएगी और कभी भी कठिन मेहनत नहीं करेगी और न ही खुद को सुधार सकेगी. इस तरह का तुम्हारा अंधा प्यार उसे दूसरों पर निर्भर बना देगा. वह पूरा जीवन ऐसी ही बनी रहेगी. इस से वह कुछ भी नहीं कर पाएगी. अगर तुम सच में अपने दोस्त को प्यार करती हो तो अपनी किताबें, नोट्स, अन्य चीजें उसे दो, लेकिन परीक्षा के पहले.’’ आंटी गीता ने उसे समझाया.

वह आगे बोलीं, ‘‘जीवन में दृढ़ बनो आह्नवी और सही रास्ते से कभी भटको मत.’’ रीता, जो यह सबकुछ सुन रही थीं, उन की आंखो में आंसू भर गए.

लड़कियों ने अपनी गलतियों को महसूस किया. वे एकदूसरे के गले लग गईं. उस दिन के बाद से आह्नवी और शान्वी दोनों अपनी पढ़ाई में एकसाथ कठिन मेहनत करने लगीं. दोनों के मन में एकदूसरे के लिए कोई शिकायत?? नहीं रह गई थी. दोनों की मांएं भी उन को एकसाथ मेहनत करते हुए देख कर खुश थीं.