किट्टी गिलहरी बरगद के पेड़ की एक डाल पर रहती थी. वह बहुत मेहनती थी. सुबह होते ही भोजन की तलाश में वह वन की ओर निकल जाती और शाम होतेहोते वापस घर लौटती. अच्छी जिंदगी जीते हुए भी किट्टी उदास रहती थी. छोटी होने की वजह से वह खुद को कोसती रहती. वह सोचती रहती कि उस में एक भी विशेष गुण नहीं है. एक दिन तंग आ कर किट्टी ने सोच लिया कि वह नदी में कूद कर जान दे देगी.

भारी मन से वह नदी की ओर चल पड़ी. रास्ते में उस ने देखा कि कई खरगोश छिपने के लिए इधरउधर जगह ढूंढ़ रहे हैं. ‘‘तुम दौड़ क्यों रहे हो?’’ किट्टी ने एक खरगोश से पूछा.

‘‘हमें छिपने के लिए कोई सुरक्षित जगह चाहिए,’’ खरगोश ने कहा. ‘‘एक भेडि़या हमारे पीछे पड़ा है. यदि उस ने हमें पकड़ लिया तो हमारी जान चली जाएगी.’’ ‘‘हमारे दांत नुकीले नहीं हैं और न ही तेज पंजे हैं, जिस से हम लड़ सकें. तुम्हारी तरह हम पेड़ पर भी नहीं चढ़ सकते, ताकि पेड़ पर चढ़ कर अपनी जान बचा सकें.’’ कह कर सारे खरगोश झाडि़यों में गायब हो गए.

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खरगोश की बातें सुन कर किट्टी हैरान रह गई कि उस में कुछ विशेष गुण हैं. खुद को बचाने के लिए कम से कम पेड़ पर तो वह चढ़ ही सकती है. लेकिन जल्दी ही वह फिर से उदास हो गई और नदी की ओर चल पड़ी. नदी के किनारे पहुंचने पर किट्टी ने देखा कि एक चट्टान पर समूह में बैठे हुए कई मेढक डर से

सहमे हुए हैं. किट्टी ने पास जा कर पूछा, ‘‘तुम सभी यहां क्यों बैठे हो? जाओ, उछलो, कूदो, सूरज स्नान का आनंद लो.’’ ‘‘एक मगरमच्छ पानी के ऊपरी हिस्से में आ गया है. हम सभी उस के गहरे पानी में जाने का इंतजार कर रहे हैं. उस ने कई मछलियों और हमारे कुछ दोस्तों को भी खा लिया है, जो नदी के किनारे धूप सेंक रहे थे,’’ एक बूढ़े मेढक ने कहा.

‘‘लेकिन तुम्हारे दोस्तों और मछलियों ने भाग कर अपनी जान क्यों नहीं बचाई?’’

किट्टी ने पूछा. बूढे़ मेढक ने विस्तार से बताया, ‘‘मछलियां दौड़ नहीं सकतीं, न ही जमीन पर रह सकती हैं. वे असहाय हैं क्योंकि सिर्फ पानी में तैर सकती हैं. उन्होंने तैर कर भागने की कोशिश की, लेकिन मगरमच्छ उन से अधिक तेज भाग सकता था.’’

‘‘हम जमीन और पानी दोनों जगह रह सकते हैं. लेकिन जमीन पर हम दौड़ नहीं सकते, केवल उछल सकते हैं. पानी में तैर सकते हैं लेकिन मगरमच्छ जितना तेज नहीं. हम में से कुछ जो बच गए, वे इस चट्टान पर बैठ कर उस मगरमच्छ के जाने का इंतजार कर रहे हैं,’’ मेढक ने उदास स्वर में कहा. किट्टी सोच में पड़ गई. उस ने खरगोश और मेढक से हुई बातचीत पर विचार करना शुरू किया.

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‘एक खरगोश पेड़ पर नहीं चढ़ सकता. एक मछली जमीन पर नहीं रह सकती और एक मेढक दौड़ नहीं सकता. ये सभी जीव अपने ऊपर खतरा आने पर कुछ भी नहीं कर सकते,’ किट्टी ने सोचा, ‘जबकि मैं पेड़ पर चढ़ सकती हूं, तेज दौड़ सकती हूं और अपने छोटे साइज के कारण मैं छोटे बिलों, पेड़ की टहनियों और जमीन के बिलों में भी आराम से रह सकती हूं.’ अचानक उसे लगा कि उस में तो कई विशेष गुण हैं. दूसरों के पास क्या है, यह न सोच कर जो खुद के पास है उस पर गर्व करना चाहिए.

अपने जीवन को समाप्त करने की योजना पर वह खुद ही हंस पड़ी और खुशी और आत्मविश्वास से भरी वह वापस अपने घर लौट गई.