मोंटू आज बहुत खुश था. मां ने उसे कुंभलगढ़ का किला घुमाने का वादा किया था. मोंटू उदयपुर में रहता था और कुंभलगढ़ वहां से 4 घंटे की दूरी पर था. ऊंचीनीची घाटियों, टेढ़ीमेढ़ी सड़कों, जंगलों से होते हुए वे पहुंचे पहाड़ की चोटी पर. सामने ही था, कुंभलगढ़ का किला. मां ने मोंटू को बताया कि पहाडि़यों पर बना यह किला समुद्रतल से 1100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. इसे महाराणा कुंभा ने अपने शिल्पी की देखरेख में पंद्रहवी शताब्दी में बनवाया था.

‘बहुत पुराना हो कर भी यह इतना मजबूत किला है.’ मोंटू सोच रहा था. वे टिकट काउंटर पर गए और एक गाइड के लिए कहा. गाइड आ गया. अभिवादन के बाद गाइड ने किला दिखाना शुरू किया. ‘‘कई पहाड़ों पर बने इस किले की चारदीवारी 36 किलोमीटर लंबी है और उस पर एक

साथ चार घुड़सवार आ सकते हैं.’’ गाइड ने बताया. मोंटू ने देखा किले की चारदीवारी काफी लंबी थी. ‘‘यह दुर्ग अपने स्थापत्य और विशालता के कारण कभी जीता नहीं जा सका. कितने ही दुश्मनों ने इस पर विजय पाने की कोशिश की पर यह दिल्ली, आमेर और मारवा की संयुक्त सेनाओं द्वारा सिर्फ एक ही बार जीता गया.’’

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मां और मोंटू इधरउधर देखते हुए चल रहे थे. किले के आसपास सैलानियों की भीड़ थी. हर कोई कैमरे से और मोबाइल फोन से फोटो खींचना चाह रहा था. गाइड ने बताया कि हाल ही में यूनैस्को द्वारा विश्व विरासत शृंखला में चुने जाने के बाद यह किला सब से लोकप्रिय जगह बन गया है. देशविदेश से पर्यटक यहां आते हैं. दिन में किला देखते हैं, कुंभलगढ़ सैंक्चुरी देखते हैं. रात को यहां लाइट एंड साउंड शो होता है जो कुंभलगढ़ के इतिहास पर प्रकाश डालता है.

इतिहास कुंभलगढ़ की दीवारों पर मानो सजीव हो उठा था. मोंटू को किला देख कर बहुत अच्छा लग रहा था. चलतेचलते वे सात दरवाजों में से पहले दरवाजे तक पहुंचे. यह था, ‘आरेठ पोल.’ यहां से डेढ़ किलोमीटर आगे था, ‘हल्ला पोल’ और फिर किले का मुख्य द्वार ‘हनुमान पोल’, जहां हनुमान जी की मूर्ति थी. कुछ देर बाद वे आगे बढ़े. ‘रामपोल,’ ‘भैरवपोल’, ‘फागरा पोल.’ ‘तोपखाना पोल’ और ‘निंबू पोल’ देखते हुए वे चले जा रहे थे.

मोंटू इन के नाम सुन कर और दरवाजों की ऊंचाई देख कर हैरान था. किले में झील, खेती की जमीन, मंदिर, कुंड, आवास सभी थे.

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गाइड मोंटू को किले के सब से ऊपरी भाग ‘बादल महल’ में ले गया. वह बेहद सुंदर था. इतनी ऊंचाई पर ऐसा लगता था जैसे वे बादलों के बीच हों. सुंदर चित्रकारी से कमरा सजा हुआ था. गाइड ने बताया कि इसी कमरे में ‘महाराणा प्रताप’ का जन्म हुआ था.? मोंटू को शूरवीर महाराणा प्रताप और उन के स्वामिभक्त घोडे़ चेतक की याद आ गई. यहां से नीचे का नजारा बहुत अच्छा दिख रहा था. कुंभलगढ़ की विशेषता यह भी थी कि इतनी ऊंचाई पर होने के बावजूद वह हरीभरी वादियों के कारण नीचे से नजर ही नहीं आता था. इस के बाद गाइड ने नीलकंठ मंदिर दिखाया. किले में लगभग 300 मंदिर थे.

‘‘आज 700 साल बाद?भी किला वैसे ही खड़ा है. इस का स्थापत्य बेजोड़ है.’’ गाइड ने महल का अंदरूनी भाग दिखाते हुए कहा. ‘‘कुंभलगढ़ के किले को मेवाड़ के शासकों द्वारा अकसर बचाव के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा. इस किले को भारतीय पुरातत्व विभाग की सुरक्षा प्राप्त है. विश्व विरासत शृंखला में नामांकित होने के बाद आसपास कई होटल बन गए हैं. जनसुविधाएं बेहतर हो गई हैं.’’ मां ने मोंटू को बताया कि कुंभलगढ़ में प्रतिवर्ष कुंभलगढ़ उत्सव का आयोजन होता है, जिस में रंगारंग समारोह में लोक कलाकार बेहतरीन कला का प्रदर्शन करते हैं.

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गाइड ने बचे हुए किले का भाग मोंटू को घुमाया. जगहजगह राजस्थानी चीजों की दुकानें भी लगी थीं. घर लौटते वक्त मां व मोंटू आपस में बातें कर रहे थे कि इतिहास को जानना चाहिए और अपने स्मारकों को सहेज कर रखने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि इस से हमें पुरानी चीजों की कई महत्त्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं.