इस वर्ष कुक्कू कोयल ने संगीत प्रतियोगिता में भाग लेने का निश्चय किया और अपने घर के बाहर हर दिन अभ्यास करने लगी. कौआ जो उस के घर के पास रहता था, को पता चल गया कि कुक्कू प्रतियोगिता में भाग लेने जा रही है.

उस ने निश्चय किया कि वह जब गाएगी तब वह कानों को चुभने वाली आवाज में गा कर उसे परेशान करेगा.

‘‘कूहू, कूहू,’’ कुक्कू ने गाना शुरू किया. ‘‘कांवकांव,’’ कौआ चिल्लाया.

‘‘कूहू, कूहू,’’ कुक्कू गाती रही. ‘‘कांव, कांव, कांव,’’ कौआ अपनी आवाज से चिढ़ाता रहा.

‘‘कृपया कांवकांव करना बंद करो, क्या तुम नहीं देखते हो कि मैं अभ्यास कर रही हूं,’’ कुक्कू आगबबूला हो गई. ‘‘तुम्हें कौन रोक रहा है? प्रतियोगिता में मैं भी भाग ले रहा हूं, इसलिए मैं भी अभ्यास कर रहा हूं,’’ कौए ने एक मुसकान के साथ उत्तर दिया.

‘‘मैं जानती हूं, तुम झूठ बोल रहे हो,’’ कुक्कू ने कहा और गुस्से में अपने घर के अंदर चली गई. ‘‘क्या हुआ कुक्कू? तुम गुस्से में क्यों हो?’’ उस की दादी ने पूछा.

‘‘दादी, मैं उस कौए के कारण अभ्यास नहीं कर पा रही हूं,’’ रोती हुई कुक्कू बोली. ‘‘कुक्कू, तुम्हें अपने गाने पर ध्यान देना चाहिए, उसे नजरअंदाज करो,’’ दादी ने कहा.

अगले दिन जब कुक्कू गाने के लिए बाहर आई, कौआ भी कांवकांव करने लगा. वह गाना नहीं गा पाई.

तीसरे दिन उस ने निर्णय किया कि अभ्यास के लिए किसी और स्थान पर जाए. लेकिन कौआ वहां भी उस के पीछेपीछे उसे परेशान करने के लिए गया जितना कि वह कर सकता था. कुक्कू निराश हो गई. वह उदास चेहरा ले कर लौटी. ‘‘दादी, मैं सच में उस के कारण अभ्यास नहीं कर सकती.’’

‘‘कुक्कू, तुम्हें स्वयं पर ध्यान केंद्रित करना है. यह मत सोचो कि वह तुम्हें परेशान कर के गाने से रोक लेगा. तुम उसे नहीं बदल सकती,’’ दादी ने कहा. ‘‘लेकिन वह बहुत ही कर्कश आवाज में गाता है. मेरे लिए अभ्यास करना कठिन हो जाता है. मुझे नहीं लगता कि इस साल मैं जीत पाऊंगी,’’

कुक्कू ने कहा. ‘‘देखो कुक्कू, मैं जो कह रही हूं, वह सुनो,’’ दादी ने कहा, ‘‘हर समय तुम्हारे चारों ओर का वातावरण बिलकुल ही अच्छा नहीं हो सकता. अगर कल कोई तीसरी आवाज यहां परेशान करे तो तुम क्या करोगी?

‘‘आज तुम कौए को दोष दे रही हो, क्योंकि तुम ऐसा कर सकती हो. लेकिन तब क्या होगा, जब कोई सामने न हो जिस पर तुम दोष लगा सको? तुम क्या करोगी? उस चीज की चिंता मत करो जिसे तुम बदल नहीं सकती. उस पर ध्यान लगाओ जिसे तुम कर सकती हो.’’ कुक्कू ने दादी की बातों को ध्यान से सुना. दादी कहती रहीं, ‘‘कौए की आवाज को एक बाधा के रूप में मत सोचो. अपने गाने पर ध्यान लगाओ,

उस के चिल्लाने पर नहीं. इसे एक चुनौती के रूप में लो.’’

‘‘एक चुनौती के रुप में?’’ कुक्कू ने दोहराया. ‘‘हां, और इस के लिए तुम्हें शांत होना होगा. तभी तुम्हारा मन सिर्फ गाने पर केंद्रित हो सकेगा, चाहे बाहर से कोई भी आवाज क्यों न आ रही हो.

‘‘धीरेधीरे तुम उस आवाज को भूल जाओगी और तुम जान पाओगी कि कोई भी तुम्हें तंग नहीं कर सकता जब तक कि तुम्हारी इच्छा न हो,’’ दादी ने विस्तार से समझाया. कुक्कू ने उसे चुनौती देने का निश्चय किया.

अगले दिन जब वह अभ्यास करने के लिए बाहर आई, उस ने एक गहरी सांस खींची, अपने मन को शांत किया और अपनी आंखें बंद कर गाना शुरू किया. उस ने कौए के कांवकांव को सुना लेकिन इस बार वह रुकी नहीं, वह अपना गाना गाती रही. कौआ और जोर से कांवकांव करने लगा. लेकिन कुक्कू अब अपने गाने में पूरी तरह तल्लीन हो गई थी.

कुछ समय बाद उसे कौए की आवाज सुनाई नहीं पड़ रही थी. जो वह सुन सकती थी, उस की अपनी आवाज थी और एक लंबे समय तक वह गाती रही. कौआ तब लौट गया, जब उसे विश्वास हो गया कि वह उसे परेशान करने में असफल हो गया है. उस का गला जोरजोर से गाने के कारण दर्द कर रहा था.

वह पिछले 2-3 दिनों से उसे परेशान करता रहा?था लेकिन अब छोड़ दिया?था. कुक्कू ने महसूस किया कि जब से वह शांत हुई तो अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने लगी और अब कोई भी उसे परेशान नहीं कर सकता था.

कुक्कू ने वह प्रतियोगिता जीत ली और घर में ट्रौफी ले आई. उस ने इसे दादी के हाथों में देते हुए कहा, ‘‘दादी, यह आप के लिए है.’’ कुक्कू और दादी बहुत खुश थे.