सूरज डूबा और अंधेरा हो गया. इसी के साथ सारे  पक्षी डालियों पर बने अपनेअपने घरों में लौटने लगे. चुनमुन चिडि़या भी खानापानी के साथ तेजी से  अपने बेटे के पास घर लौट आई.

चुनमुन चिडि़या अपने बेटे चुचु के साथ रहती थी. रात का खाना दोनों ने साथ में खाया और सोने की तैयारी करने लगे, तभी दरवाजे पर दस्तक हुई.

‘‘कौन है?’’ चुनमुन ने पूछा.

‘‘मैं टोटो, कृपया दरवाजा खोलिए.’’ बाहर से आवाज आई.

चुनमुन ने दरवाजा खोला, सामने एक अपरिचित पक्षी था.

‘‘जी कहिए, आप को क्या चाहिए?’’ चुनमुन ने पूछा.

‘‘मैं टोटो हूं, मेरी तबीयत खराब है, मुझे बुखार है. क्या मैं थोड़ी देर आप के घर आराम कर सकता हूं?’’ वह पक्षी कांपते हुए बोला.

‘‘जी आइए,’’ चुनमुन ने कहा तो उस का बेटा चुचु कान में फुसफुसाया, ‘‘मम्मी, यह आप क्या कर रही हैं, किसी अजनबी को घर के ?भीतर बुला लेना अच्छी बात नहीं.’’

‘‘बेटा, ये बीमार हैं. हमें इन की मदद करनी चाहिए,’’ चुनमुन बोली. फिर उस पक्षी को घर के अंदर बुला लिया.

टोटो घर में आया तो चुनमुन ने पूछा,

‘‘आप कुछ खाएंगे?’’

‘‘नहीं, मेरी कुछ भी खाने की इच्छा नहीं है,’’ टोटो बुखार से कांपते हुए बोला.

‘‘देखिए, मेरे पास बुखार की दवाई है, आप कुछ खा कर दवा खा लीजिए,’’ चुनमुन बोली.

चुनमुन बचा हुआ खाना और दवाई ले कर आई. टोटो ने थोड़ा सा खाना खाया और दवाई खा कर सो गया.

टोटो कुछ अजीब सा पक्षी था. इस के पहले चुनमुन और चुचु ने उसे यहां कभी नहीं देखा था. चुनमुन ने उसे घर में तो बुला लिया पर कुछ घबराई हुई थी. चुचु की भी नींद उड़ गई थी.

आधी रात बीत गई, चुचु ने देखा टोटो मजे से खर्राटे ले कर सो रहा था. मम्मी भी बैठेबैठे ऊंघ रही थीं.

चुचु को भी नींद आ रही थी लेकिन वह सोना नहीं चाहता था. उसे यह डर सता रहा था कि जैसे ही आंख लगी यह अजनबी घर के सारे सामान ले कर फुर्र हो जाएगा.

वह थोड़ी देर और बैठा रहा. तभी उसे एक तरकीब सूझी. उस ने एक लंबी रस्सी ली और चुपके से टोटो के एक पैर में एक छोर बांधा और फिर अपने पैर में दूसरा छोर बांध लिया.

‘‘अब ठीक है, यह जैसे ही रात उठेगा, मुझे पता चल जाएगा,’’ चुचु अपनी सूझबूझ पर मुसकराते हुए बोला और सो गया.

सुबह टोटो की आंखें खुलीं तो उसे बहुत अच्छा महसूस हुआ. तबीयत बिलकुल ठीक हो चुकी थी. वह पंखों को फड़फड़ाते हुए उठा, लेकिन अपने और चुचु के पैर में बंधी रस्सी को देख कर हैरान रह गया.

चुचु अभी तक गहरी नींद में सो रहा था. अचानक चुनमुन की आंखें खुल गईं. उस ने देखा टोटो पैर की रस्सी खोल रहा है.

‘‘ये आप के पैर को किस ने बांधा,’’ चुनमुन ने टोटो से पूछा.

‘‘लगता है यह छोटू की शरारत है,’’ टोटो ने चुचु की ओर इशारा किया, ‘‘देखिए, उस ने अपने पैर को भी बांध रखा है.’’

चुनमुन बहुत शर्मिंदा हुई. उस ने चुचु को जगा कर उस से पूछा, ‘‘यह क्या बदतमीजी है, चुचु? तुम ने अपने और अंकल के पैर को क्यों बांधा?’’

‘‘सौरी मम्मी, मुझे लगा था कि अंकल चोर हैं,’’ और फिर चुचु ने सब बता दिया.

यह सुन कर टोटो हंस पड़ा. वह बोला, ‘‘बेटा, मैं रात को ही अपने बारे में आप लोगों को बताने वाला था, लेकिन तेज बुखार के कारण मुझे ज्यादा बोलने की हिम्मत नहीं हुई.

‘‘वह तो भला हो तुम्हारी मां का जिस ने मुझे खाना दिया और दवाई दी, जिस की बदौलत मैं अब बिलकुल ठीक हूं और उड़ने के लिए तैयार हूं. मैं एक प्रवासी पक्षी साइबेरियन क्रेन हूं.’’

‘‘प्रवासी पक्षी? कहां से आए हैं, आप? चुनमुन ने पूछा.

‘‘मैं रूस के साइबेरिया से आया हूं और करीबकरीब 5000 किलोमीटर की दूरी तय कर के यहां पहुंचा हूं.

‘‘मेरे ही जैसे ग्रेटर फ्लेमिंगो, रफ, ब्लैक वग्स्टिल्टि, कौमन टील, कौमन ग्रीन शैक, नौरदर्न पनिटेल, रोजी वूडसैंडपाइपर, स्पौटेड सैंडपाइपर, यूरेसयिनवजिन ब्लैकटेल डगौडविट, स्पौटेड रैड शैंक, स्टारलिंग, ब्लू थ्रोट आदि पक्षी भी प्रवासी पक्षी हैं. ये सब भी दूरदूर देशों से यहां आए हैं.’’

‘‘ये सब यहां क्यों आए हैं?’’ चुचु ने उत्सुकता से पूछा.

‘‘जाड़े में हम जैसे प्रवासी पक्षियों के यहां बर्फ जम जाती है और ऐसी कंपकंपाने वाली ठंड के कारण हम पक्षियों का आहार बनने वाले जीव या तो मर जाते हैं या जमीन में दुबक कर शीतनिंद्रा में चले जाते हैं जिस से वे सर्दिंयों के खत्म होने के बाद ही जागते हैं ऐसी स्थिति में हम पक्षियों लिए आहार ढूंढ़ना और जिंदा रहना मुश्किल हो जाता है, इसलिए हम गरम देशों में चले आते हैं, जहां बर्फ नहीं जमती और हमें खाना भी अच्छा मिल जाता है,’’ टोटो ने बताया.

‘‘अच्छा है, इस बहाने आप लोगों को देशविदेश घूमने का मौका मिल जाता है,’’ चुचु बोला.

‘‘अच्छा, अब मैं चलूंगा, मुझे अपने देश लौटना है तबीयत खराब होने से रात को मैं झुंड से बिछड़ गया. मुझे तेजी से उड़ कर उन तक पहुंचना है.

मुझे आप लोगों के साथ समय बिता कर बहुत अच्छा लगा. ‘‘अगले साल आया तो आप लोगों से मिलने जरूर आऊंगा. धन्यवाद, मेरा इतना अच्छा खयाल रखने के लिए,’’ टोटो ने उन दोनों को धन्यवाद दिया और उड़ गया.

‘‘बाय अंकल,’’ चुचु बोला और टोटो को तब तक देखता रहा जब तक वह आंखों से ओझल न हो गया.