गृहशोभा विशेष

लियो शेर जंगल का राजा नहीं बनना चाहता था, क्योंकि वह बहुत डरपोक था. ‘‘प्लीज पापा. मुझे जंगल का राजा नहीं बनना है,’’ वह हमेशा अपने पापा से कहता.

‘‘लेकिन बेटा. हम शेरों को ही इस जंगल का राजा बनना होता है. अब मेरी उम्र हो गई है. तुम्हें धीरेधीरे इस वन की जिम्मेदारी संभालनी होगी.’’ पापा शेरसिंह ने उसे प्यार से समझाया. लेकिन लियो तो इतना डरपोक था कि किसी भी हाल में राजा बनने को तैयार नहीं हुआ. ‘‘मैं पापा की बातें सुन कर पक गया हूं.’’ एक दिन उस ने खुद से कहा, ‘‘इस से अच्छा है कि मैं कहीं दूर छिप जाता हूं. वहां मुझे कोई परेशान नहीं करेगा.’’ फिर वह दूर झाडि़यों के पीछे छिप गया. उन झाडि़यों के पास ही आम का एक पेड़ था. उस पर कुछ बंदर रहते थे. उन्होंने लियो को वहां छिपते हुए देख लिया.

‘‘देखो, हमारे भविष्य का राजा यहां छिपा हुआ है.’’ एक लंबू बंदर ने अपने दोस्तों को इशारा करते हुए कहा. ‘‘अच्छा, चलो इस डरपोक को हम मजा चखाते हैं.’’ उन में से एक बंदर बोला. उस ने तुरंत कई आम तोड़े और अपने दोस्तों में बांट दिए.

‘‘चलो, शुरू हो आओ.’’ इतना कहते हुए उस ने एक आम लियो की

ओर फेंका. यह देखते ही सभी बंदर दनादन लियो पर आम

फेंकने लगे. ‘‘ओह.’’ अचानक हुए इस हमले से परेशान हो कर लियो वहां से भागा.

‘‘डरपोक…डरपोक…’’ बंदरों ने ताली बजाते हुए उसे चिढ़ाया. ‘इस जंगल के जानवर इतने बदतमीज हैं,’ लियो ने सोचा.

उसे बहुत बुरा लगा. लेकिन उसे गुस्सा नहीं आया. उसे डर लग रहा था कि कहीं बंदरों का झुंड उस पर फिर से हमला न कर दे. वह तुरंत वहां से भाग कर तालाब के पास चला गया.

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‘‘अरे देखो, हमारा भविष्य का राजा यहां आ कर छिपा हुआ?है.’’ वहां पानी पीने आए दो हाथियों के बच्चों ने कहा. ‘‘अगर यह इतना ही डरपोक रहा, तो हमें दुश्मनों से कौन बचाएगा?’’ वे आपस में बातें करने लगे.

‘‘बात तो तुम्हारी ठीक है. इस के होने और न होने से हमें क्या फर्क पड़ने वाला है?’’ दूसरे हाथी ने कहा. हाथियों को मजाक सूझा. उन्होंने अपनी सूंड़ में पानी भरे और छिपे लियो पर पानी की बौछार कर दी.

‘‘अगर छिप कर ही रहना है, तो तुम्हें नहला देते हैं. फिर खाने का भी इंतजाम कर देंगे.’’ यह कह कर दोनों हंसने लगे. अचानक भीग जाने से लियो को तो बहुत गुस्सा आया लेकिन उसे डर लग रहा था कि अगर उस ने कुछ किया तो हाथी उस के पीछे पड़ जाएंगे.

‘ओह, यहां से भी भागना पड़ेगा.’ यह सोचता हुआ वह तुरंत वहां से पहाड़ की ओर भागा. ‘‘डरपोक…डरपोक.’’ पीछे से हाथियों ने

उसे चिढ़ाया. लियो वहां से भागते हुए पहाड़ पर पहुंचा. वहां काफी शांति थी. वह एक पेड़ की घनी छांव के नीचे आराम से लेट गया.

‘यहां ठीक है. मुझे कोई परेशान नहीं करेगा.’ वह सोच रहा था. उसी पेड़ पर कौवों का एक झुंड रहता था. ‘‘अरे देखो, हमारे भविष्य का

राजा यहां आ कर छिपा हुआ है.’’ एक कौए ने लियो को देखते हुए कहा.

‘‘चलो, इस डरपोक को सबक सिखाते हैं.’’ इतना कहते हुए दूसरे कौए उस के पास पहुंच गए. अब शरारती कौए उसे परेशान करने लगे. कोई उस के कान के पास कांवकांव करने लगा, तो कुछ उसे चोंच मारने लगे.

‘‘क्या मुसीबत है?’’ लियो फिर परेशान हो गया. उसे कौए की हरकतों पर बहुत गुस्सा आ रहा था. जब उस के सब्र का बांध टूट गया, उस ने जोर से दहाड़ लगाई. उस की दहाड़ सुनते ही कौए डर के मारे वहां से उड़ गए.

‘‘अब डरने से काम नहीं चलेगा,’’ लियो ने खुद से कहा, ‘‘मैं शेर हूं और इस जंगल का राजा बनने वाला हूं. मुझे शेर की तरह ही हिम्मत दिखानी होगी.’’ उस ने

फिर दहाड़ लगाई और अपने घर की ओर लौटने लगा. ‘‘पापा, मैं राजा बनने को तैयार हूं.’’ लियो ने जब शेरसिंह से कहा तो उस ने उसे गले से लगा लिया.

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