गृहशोभा विशेष

हर साल की तरह इस साल भी कोको और जोजो खरगोश होली में कुछ नया करना चाहते थे.

वे बहुत देर से इस बारे में सोच रहे थे लेकिन कुछ नया समझ में नहीं आ रहा?था. अचानक कोको उछलते हुए बोला, ‘‘मुझे एक नया आइडिया मिल गया.’’

जोजो घूमते हुए रुक गया और बोला, ‘‘मुझे भी जल्दी से बताओ अपना आइडिया.’’

‘‘जोजो, मेरे दोस्त, कई सालों से हम हार्लो खरगोश को रंग लगाने की सोच रहे हैं लेकिन हर बार वह अपनी चालाकी से बच निकलता है,’’ कोको बोला. ‘‘हां, सभी जानते हैं कि हार्लो कितना चालाक है,’’ जोजो बोला.

‘‘लेकिन इस बार हम उसे रंगों में नहला कर छोड़ेंगे,’’ कोको ने आत्मविश्वास से कहा.

जोजो को विश्वास नहीं हो रहा था. ‘‘लेकिन कैसे?’’ उस ने पूछा.

‘‘अब जरा ध्यानपूर्वक मेरी योजना सुनो,’’ कोको ने विस्तार से बताना शुरू किया, ‘‘शिकारी लोग जानवरों को पकड़ने के लिए एक गड्ढा बना कर, उस के ऊपर घासपत्तियां डाल देते हैं ताकि वह समतल जमीन लगे.

‘‘जब जानवर अनजाने में उस के ऊपर से गुजरते  हैं तो घासपत्तियां उन का भार नहीं सह पाती हैं और जानवर ऐसे गड्ढों में गिर जाते हैं.’’

‘‘सही कहा,’’ जोजो ने सहमति जताई.

‘‘हम हार्लो को रंगने के लिए भी यही तकनीक अपनाएंगे,’’ कोको बोला. ‘‘होली से एक दिन पहले हम एक गड्ढा बना लेंगे और उसे रंगीन पानी से?भर देंगे. फिर उसे घासपत्तियों से ढंक देंगे.

‘‘होली वाले दिन हार्लो को बातों में उलझा कर यहां ले आएंगे. हार्लो इस गड्ढे में गिरेगा और वह पूरी तरह रंगों से सराबोर हो जाएगा. वाह, कितना मजेदार सीन होगा,’’ दोनों उस दृश्य की कल्पना कर के खुश हो रहे थे.

आखिकार होली आ गई. सबकुछ योजना के अनुसार किया जाने लगा. गड्ढा बना कर, उसे घासपत्तियों से ढंक दिया गया ताकि वह समतल जमीन लगे. कोई सोच भी नहीं सकता था कि वहां रंगों से?भरा कोई गड्ढा है.

उस दिन कोको और जोजो जब घर से बाहर निकले तो चारों ओर होली की मस्ती छाई हुई थी. तभी सामने से हार्लो खरगोश आता हुआ दिखाई दे गया, बिलकुल साफसुथरा, सफेद. वह मुसकराया.

कोको और जोजो आगे बढ़ कर हार्लो को उस गड्ढे की तरफ ले जाने लगे.

अभी वे कुछ ही कदम चले थे कि ठिठक गए. तेज बाघ उसी ओर आ रहा था.

‘‘अब क्या होगा?’’ दोनों चिल्लाए.

‘‘कोको भाई,’’ जोजो फुसफुसाया, ‘‘यदि तेज ने हमें होली की खुशी में गले लगाया, तो हम उस का भोजन भी बन जाएंगे. मुझे पता है उस ने जितने भी खरगोश को गले से लगाया, कोई जिंदा नहीं बचा. भागो कोको, भागो.’’

लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. तेज बहुत नजदीक आ चुका था. तेज बोला, ‘‘अरे कोको और जोजो, अभी जाने की इतनी जल्दी क्यों है. होली के अवसर पर आओ, गले लग जाओ.’’

‘‘ओह सर,’’ कोको ने स्थिति संभालने की कोशिश करते हुए कहा, ‘‘गले मिलना तो बराबर वालों के बीच होना चाहिए. आप राजा हैं और हम छोटे प्राणी.’’

‘‘इस उत्सव में ऊंचनीच या बड़ेछोटे का भेद नहीं होना चाहिए. सभी बराबर हैं. आओ, हम लोग प्रेम से गले मिलते हैं,’’ तेज बाघ ने अपनी चाल तेज करते हुए कहा.

कोको और जोजो ने आंखें बंद कीं और वहां से भाग खड़े हुए. अचानक उन्हें लगा कि उन के नीचे से जमीन खिसक गई और वे धड़ाम से एक गड्ढे में गिर गए.

तेज उन के ऊपर छलांग मारते हुए आगे निकल गया. वे थोड़ी देर तक शांति से बैठे रहे.

कुछ देर बाद जब दोनों ने एकदूसरे को गौर से देखा, तो हैरान रह गए. उन का उजला स्किन पूरी तरह से नीला हो चुका था.

वे दोनों उसी गड्ढे में गिरे थे, जो गड्ढा उन्होंने हार्लो के लिए खोदा था. चूंकि वे घासपत्तियों में छिप गए थे इसलिए तेज उन्हें नहीं देख पाया और चला गया.

‘‘जोजो, हमारे टीचर ठीक ही कहते थे कि जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वह स्वयं उसी में गिरता है. हम अपने ही रंगों में रंग गए. शिकारी खुद शिकार हो गया,’’ कोको ने कहा और दोनों जोरजोर से हंसने लगे.

तभी ऊपर से जोरजोर से आवाज आने लगी, ‘‘हैप्पी होली, दोस्तो.’’

दोनों ने ऊपर देखा, गड्ढे के किनारे खड़ा हार्लो मुसकरा रहा था. कोको और जोजो ने मुसकराने की कोशिश की.

एक बार फिर हार्लो बच गया था. लेकिन दोनों खुश थे कि इस गड्ढे की वजह से दोनों तेज बाघ से बच पाए थे.

दोनों चिल्लाए, ‘‘हुर्रे, हैप्पी होली.’’ और एकदूसरे पर गड्ढे का रंगों वाला पानी फेंकने लगे.

आप इस लेख को सोशल मीडिया पर भी शेयर कर सकते हैं