गृहशोभा विशेष

बांबी बंदर आलसी और लापरवाह था. वह अपने कामों से जी चुराता. स्कूल जाने से पहले वह न तो ठीक से ब्रश करता, न ही नहाता. जल्दबाजी में इन कामों को निपटा लेता.

मम्मी उसे समझातीं तो कहता, ‘‘मम्मी, मैं ने अच्छे से ब्रश कर लिया. मुझे भूख लगी है. जल्दी से नाश्ता दो.’’

‘‘बांबी, सेहत के प्रति लापरवाही अच्छी आदत नहीं है. तुम्हें अच्छे से ब्रश करना चाहिए, नहाना चाहिए. तुम्हारे नाखून भी बड़े और गंदे हैं.’’ मम्मी अकसर उसे समझातीं.

मम्मी की डांट से बचने के लिए बांबी ने नया तरीका खोज लिया. अब हर सुबह वह काफी देर तक बाथरूम में बैठा रहता. आ कर झूठ बोल देता कि मम्मी, मैं ने अच्छे से ब्रश किया है. काफी देर तक नहाया भी है.

एक दिन बांबी स्कूल से लौटा तो उस के दांत में हलका दर्द हो रहा था. घर पहुंच कर बांबी स्कूल बैग रख कर सोफे पर लेट गया.

‘‘बांबी, जल्दी से फ्रैश हो जाओ. मैं खाना लगा देती हूं.’’ मम्मी ने किचन से आवाज दी.

‘‘मम्मी, मुझे भूख नहीं है. मैं ने स्कूल में ही खा लिया है. मेरे दोस्त रोहन का आज जन्मदिन था.’’ बांबी ने बहाना बनाया.

‘‘ठीक है, फिर कमरे में जा कर आराम कर लो,’’ मम्मी बोलीं.

बांबी कमरे में जा कर लेट गया. उस के दांत का दर्द बढ़ रहा था. शाम तक दर्द बरदाश्त के बाहर हो गया.

शाम को बांबी खेलने भी नहीं गया. मम्मी ने कमरे में आ कर कहा, ‘‘बांबी, थोड़ी देर खेलने चले जाओ. फिर आ कर होमवर्क कर लेना.’’

बांबी ने कोई जवाब नहीं दिया तो मम्मी ने उस के पास आ कर उस के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, ‘‘क्या बात है, तेरी तबीयत तो ठीक है?’’

बांबी की आंखों से आंसू टपकने लगे.

‘‘मम्मी, मेरे दांतों में दर्द हो रहा है,’’ बांबी ने कहा.

‘‘कब से दर्द हो रहा है?’’ मम्मी ने पूछा.

‘‘दोपहर से. मैं ने इसी वजह से स्कूल से लौट कर खाना भी नहीं खाया. मैं ने आप से झूठ कहा था कि आज मेरे दोस्त का जन्मदिन था.’’ बांबी ने रोतेरोते बताया.

मम्मी चिंतित हो उठीं. फिर बांबी को चुप कराते हुए बोलीं, ‘‘घबराओ मत, मैं अभी तुम्हें दांतों के डाक्टर के पास ले चलती हूं.’’

बांबी को ले कर मम्मी डाक्टर जंबो हाथी के क्लिनिक में पहुंचीं. वहां कुछ मरीज बैठे थे. मम्मी ने बांबी का नाम लिखवाया और बेंच पर बैठ गईं.

क्लिनिक की दीवार पर दांत के बड़े और अजीब फोटो टंगे थे. उन्हें देख कर बांबी डर गया. डाक्टर के कमरे के अंदर से डा. जंबो की आवाज साफ सुनाई दे रही थी.

‘‘डाक्टर, मुझे इंजेक्शन मत लगाइए.’’ कोई मरीज कह रहा था.

‘‘तुम्हारे कई दांत खराब हो चुके हैं. इंजेक्शन लगा कर ही उन्हें निकालने पड़ेंगे,’’ डा. जंबो ने कहा.

बांबी यह सब बातें सुन कर और भी डर गया. क्या उस के सारे दांत इंजेक्शन लगा कर निकाले जाएंगे? बिना दांत के वह खाना कैसे खाएगा? उस का चेहरा कैसा दिखेगा? ऐसे कई सवाल बांबी के मन में उठ रहे थे.

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आधे घंटे बाद बांबी का नंबर आया. मम्मी उसे ले कर अंदर गईं.

डा. जंबो ने बांबी के दांतो की जांच शुरू की. फिर बोले, ‘‘कितने दिनों से दांत में दर्द है?’’

‘‘आज दोपहर स्कूल से लौटने के बाद से ही दर्द शुरू हुआ है. दोपहर से इस ने कुछ खाया?भी नहीं.’’ मम्मी ने चिंतित हो कर कहा.

बांबी जोरजोर से रोने लगा, ‘‘डाक्टर अंकल, क्या मेरे दांत निकालने पड़ेंगे? बगैर दांत के मैं खाना कैसे खाऊंगा? मुझे इंजेक्शन से बहुत डर लगता है.’’

डा. जंबो मुसकराने लगे, ‘‘बांबी, घबराओ मत. तुम्हारे दांत नहीं निकालने पड़ेंगे. मैं अभी दांतों की सफाई कर कुछ दवाइयां लिख देता हूं. इन से आराम आ जाएगा.’’

‘‘डाक्टर, मेरे दांतों में दर्द क्यों हो रहा था?’’ बांबी ने पूछा.

डा. जंबो ने समझाया, ‘‘अच्छी तरह ब्रश नहीं करने की वजह से तुम्हारे दांतों में कैविटी बनने लगे हैं. आगे चल कर यह कैविटी बड़े हो जाएंगे. इस में खाना फंसने से दांतों में सड़न आ जाएगी. दांतों में दर्द रहेगा और ये खराब हो जाएंगे. फिर इन्हें निकालने पड़ेंगे.

‘‘रोजाना सही ढंग से ब्रश नहीं करने से यह समस्या किसी को भी हो सकती है. बच्चे अकसर ऐसी लापरवाही करते हैं.’’

‘‘डाक्टर अंकल, हमें कितनी बार ब्रश करनी चाहिए?’’ बांबी ने जानना चाहा.

‘‘किसी अच्छे टूथपेस्ट से दिन में हमें दो बार ब्रश करनी चाहिए. सुबह सो कर उठने के बाद और रात में सोने से पहले,’’ जंबो ने कहा.

‘‘मैं अब हर दिन दो बार अच्छी तरह टूथपेस्ट से ब्रश करूंगा. अपनी दांतों की साफसफाई का उचित खयाल रखूंगा. मम्मी को कभी शिकायत का मौका नहीं दूंगा.’’ बांबी ने वादा किया. बांबी में आए बदलाव को देख कर मम्मी भी मुसकरा उठीं.

 

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