गृहशोभा विशेष

मन्नू हिमाचल प्रदेश, कुल्लू के एक गांव में अपनी दादीमां के साथ रहता था. उस का गांव पर्वतों के ढलान पर था. गांव के आसपास का दृश्य बहुत सुंदर था लेकिन गांव में कई चीजों की कमी थी. दादी को चलनेफिरने में बहुत दिक्कत होती थी, फिर भी उन्हें ढलान से नीचे उतर कर लकडि़यां और जरूरी सामान लाना पड़ता था. वह किसी तरह उतर तो जाती थीं, लेकिन वापसी में ऊपर चढ़ना उन के लिए मुश्किल भरा काम था. मन्नू ने पंचायत के सहयोग से दादी के लिए एक टौयलेट तो बनवा लिया था, लेकिन दैनिक कामों में वह दादीमां का सहयोग नहीं कर पा रहा था. वे बकरी पालन कर किसी तरह अपनी जिंदगी गुजार रहे थे. सुबहसवेरे मन्नू बकरियों को ले कर पहाड़ी के ऊपर चला जाता और बकरियों को चरा कर वह शाम को घर लौटता.

मन्नू को दादीमां की बहुत चिंता रहती थी, लेकिन वह कुछ कर नहीं सकता था. एक रात एक बाघ आया और घर के बाहर बंधी एक बकरी को उठा कर ले गया. वे बहुत गरीब थे. एक बकरी को खो देने से उन पर भारी मुसीबत आ गई.

अब मन्नू बकरियों के साथ बाहर ही सोने लगा. वह अभी भी सवेरे बकरियों को चराने के लिए ले कर निकल जाता. कठिन मेहनत और कम सोने की वजह से वह कमजोर हो गया था. एक दिन सुबहसुबह हल्की बारिश हो रही थी. मन्नू बकरियों को ले कर जंगल की ओर चल पड़ा. जंगल में किसी के दर्द से चिल्लाने की आवाज सुनी. पहले तो मन्नू ने सोचा कि शायद बाघ ने किसी जानवर पर हमला कर दिया है. लेकिन उस ने साहस किया और आवाज की दिशा में बढ़ गया.

मन्नू ने देखा कि एक जंगली गधा झाडि़यों में गिरा हुआ है. उस पर शायद बाघ हमला कर भाग गया था. दादी ने उसे जड़ीबूटियों के बारे में बताया था. वह तुरंत कुछ जड़ीबूटी ले आया. फिर उस ने गधे के घाव को झरने के पानी से साफ किया, जड़ीबूटी लगा दी और उस पर कपड़े बांध दिए. गधे ने कराहना बंद कर दिया. मन्नू ने कुछ ताजी घास और पानी ला कर उस के सामने रख दिए. शाम होतेहोते गधा ठीक हो गया, लेकिन वह अभी भी बहुत कमजोर दिख रहा था.

मन्नू जानता था कि यदि उस ने गधे को यहां छोड़ दिया, तो बाघ उसे मार डालेगा. इसलिए उस ने बकरियों को इकट्ठा किया और गधे को अपने घर ले आया. घर पहुंचने पर उस ने दादी को सारी बात बताई. दादी बहुत खुश हुईं कि मन्नू ने एक जानवर की सहायता की. उन्होंने गधे के घाव पर फिर से कुछ जड़ीबूटी लगा दिए और कुछ खाने के लिए भी दिए.

वह गधा दादी और मन्नू की देखभाल और प्यार से बहुत खुश था. रात में खाना खा कर मन्नू फिर से घर के बाहर सोने आ गया. सुबह को मन्नू बकरियों को चराने के लिए निकला. उस ने गधे को थपथपाते हुए कहा, ‘‘तुम यहीं रुको और जल्दी से ठीक हो जाओ.’’ गधे ने यह महसूस किया कि दादी को चलनेफिरने में दिक्कत होती है. खास कर तब, जब दादी सामान ले कर चढ़ाई करती हैं. उसे मन्नू और दादीमां की हालत पर बहुत दया आती थी. उस ने सोच लिया कि वह किसी भी तरह इन की सहायता जरूर करेगा.

थोड़े ही दिनों में दादी और मन्नू के ध्यान रखने के कारण गधा पूरी तरह स्वस्थ हो गया. उसे नाम दिया गया, ‘भोला.’ मन्नू ने जब देखा कि भोला अब ठीक हो गया है, तो उस ने सोचा कि अब इसे जंगल में छोड़ देना चाहिए. भोला ने सिर हिला कर मना कर दिया. उस की आंखों में आंसू थे. मन्नू उसे बारबार ले जाना चाह रहा था, पर गधा बारबार सिर हिला कर मना कर रहा था.

दादी ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘यह नहीं जाना चाहता है, इसे यहीं रहने दो.’’ भोला ने सहमति में सिर हिला दिया. अब दादी जैसे ही पहाड़ी से उतरने को तैयार होती, गधा सामने आ कर बैठ जाता. दादी उस के ऊपर बैठ जाती. गधा उन्हें ले कर पहाडि़यों से नीचे जाता, फिर सामान सहित उन्हें बिठा कर ऊपर ले आता. मन्नू दादीमां की समस्या का हल देख कर बहुत खुश था.

एक रात मन्नू जब बकरियों की सुरक्षा के लिए बाहर था, अचानक भोला उसे घर के अंदर जाने का इशारा करने लगा. मन्नू उस के इशारे को समझ नहीं पा?रहा?था. तभी भोला ने उस के हाथ को अपने मुंह से पकड़ा और खींचता हुआ घर के अंदर डाल दिया. अब भोला रात में बकरियों की सुरक्षा करता और मन्नू घर के अंदर आराम से सोता.

एक दिन जब बाघ आया, तो भोला जोरजोर से चिल्लाने लगा. मन्नू और दादी टार्च जला कर बाहर निकले, तो बाघ भाग गया. पूरे गांव में बाघ का आतंक था. सर्दी का मौसम?था इसलिए लोग घर के अंदर सोते थे. बाघ आता और किसी जानवर को उठा कर भाग जाता.

एक रात मूसलाधार बारिश हो रही थी. तभी बाघ आ गया. गधा जोरजोर से चिल्लाने लगा लेकिन बारिश की तेज आवाज में मन्नू और दादी को उस की आवाज नहीं सुनाई दी. बाघ ने एक बकरी के ऊपर हमला कर दिया. भोला ने पूरी ताकत लगा कर उसे दुलत्ती मारी, तो बाघ पानी में फिसलते हुए सीधे गहरी घाटी में जा गिरा. बाघ मर गया.

दूसरे दिन सुबह मन्नू और दादी को बाघ के मरने का पता चला. मन्नू ने गौर से देखा तो बकरियों के आसपास बाघ के पंजों के निशान मिले. दोनों समझ गए कि इस का मतलब भोला ने ही इन बकरियों को बाघ से बचाया है.

अब बाघ का अंत हो चुका था और मन्नू की सारी समस्याएं भोला के आने से दूर हो गई थीं. दादी, मन्नू और भोला मजे से एक साथ रहने लगे.

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