जंबो हाथी कूड़ागाड़ी खरीदने के लिए जंगल के जानवरों से रुपए जमा कर रहा था. वह नहीं चाहता था कि कोई अपने घर के सामने कूड़ा डाले. उस के बारबार समझाने के बाद भी भोलू भालू प्लास्टिक बैग में कूड़ा भरता और सड़क के बीचोंबीच डाल देता. जब भी क्लिओ और गैब्बी सांड सड़क से गुजरते तो कूड़े को खाना शुरू कर देते. पैदल चलने वालों को सड़क पर चलने में मुश्किल हो जाती. बदबू फैलने की वजह से जंबो को यह सब सही नहीं लग रहा था.

एक दिन उस ने भोलू को बुलाया और कहा, ‘‘भोलू, कृपया तुम अपने कूड़े के प्लास्टिक बैग को सड़क के बीच में मत डाला करो. तुम हमारे ‘स्वच्छ जंगल अभियान’ में सहायता नहीं कर रहे हो.’’ ‘‘तब मैं अपने कूड़े को प्लास्टिक बैग में डाल कर फेंकने के बजाय सड़क पर फैला दूंगा,’’ भोलू ने गुस्से से कहा.

‘‘ऐसा मत करो, भोलू. अपने कूड़े को कूड़ागाड़ी में डालो, जब यह तुम्हारे घर के सामने रुकती है.’’ भोलू सब कुछ सुन कर भी अनजान बना रहा. अगले दिन फिर भोलू ने 15 से 20 केले के छिलके सड़क पर फेंक दिए. थोड़ी देर बाद जब उसी रास्ते से लपटू लोमड़ निकला तो छिलके पर उस का पैर पड़ गया. वह फिसल गया और बुरी तरह घायल हो गया.

वह दर्द से चिल्लाने लगा, ‘‘ये छिलके किस ने फेंके हैं? मैं उसे नहीं छोड़ूंगा.’’ किसी ने कुछ नहीं कहा. भोलू पेड़ के पीछे से सब कुछ देख रहा?था और धीरेधीरे हंस रहा था. लपटू बहुत मुश्किल से खड़ा हुआ और लंगड़ाते हुए अपने घर चला गया.

अगले दिन न्यूजपेपर में एक नोटिस छपी थी, ‘‘प्लास्टिक बहुत ही जहरीला होता है, जहर के समान. प्लास्टिक बैग को खरीदना और बेचना निषेध है. सरकार उन सभी पर जुर्माना लगाएगी जो इस नियम को तोड़ेंगे.’’ लेकिन रंगीन प्लास्टिक का बैग अब भी बेचा जा

रहा था. जंबो ने इस बात को अपने दोस्त डमरू गधे से साझा किया, ‘‘ इस समस्या का समाधान तभी होगा अगर सरकार प्लास्टिक बैग के उत्पादन को बंद कर देगी.’’ डमरू ने कहा, ‘‘तब लोग अपनी चीजों को कैसे ढोएंगे? उत्पादकों को रोकना समस्या का हल नहीं है, बल्कि हमें एक वैकल्पिक प्लास्टिक ढूंढ़ना होगा. सभी प्लास्टिक खराब नहीं होते हैं.’’

न सिर्फ सरकार बल्कि जंगल के सभी नागरिक कूड़े और प्लास्टिक की समस्या का समाधान नहीं ढूंढ़ पा रहे थे. एक दिन क्लिओ और गैब्बी टहल रहे थे तो भोलू ने कूड़े से?भरा एक प्लास्टिक का बैग सड़क पर फेंका. क्लिओ बैग को देख कर खुश हुआ और उस ने बैग के साथ ही कूड़े को निगल लिया. गैब्बी उसे टकटकी लगा कर सिर्फ देखता रहा.

अगले दिन क्लिओ दर्द से चीख रहा?था. उसे पेट दर्द हो रहा?था. उस ने गैब्बी से कहा, ‘‘मैं इस दर्द को और ज्यादा नहीं झेल सकता. मुझे डाक्टर के पास ले चलो.’’

गैब्बी उसे डाक्टर शेरू सिंह के यहां ले गया. शेरू अपनी गुफा से बाहर आया और क्लिओ से जमीन पर लेट जाने को कहा. शेरू ने कहा, ‘‘लेट जाओ. मैं तुम्हारे पेट की जांच करूंगा.’’ क्लिओ लेट गया. शेरू ने एक अल्ट्रासाउंड मशीन से देखा, अंदर कूड़े से भरा एक प्लास्टिक बैग था. उस ने क्लिओ को दर्द से राहत के लिए कुछ गोलियां दीं. क्लिओ ने गोलियां खाने के बाद राहत महसूस की.

अगले दिन शेरू ने चंपकवन में एक बैठक बुलाई. उस ने प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल के खतरों के बारे में सभी को विस्तार से बताया. ‘‘हम सब प्लास्टिक का उपयोग नहीं करेंगे लेकिन हमें इसे बनने नहीं देना चाहिए,’’ गैब्बी ने कहा.

शेरू ने जंगल के हर मोड़ और नुक्कड़ पर खोज की लेकिन सब बेकार गया. वह प्लास्टिक बैग बनाने वाले का पता लगा नहीं सका. तभी उस ने एक मशीन के चलने की आवाज सुनी जो एक गुफा से आ रही थी. गुफा जंगल के अंतिम छोर पर था. वह गुफा के पास गया और झांक कर देखा. कुटकुट गिलहरी अपने सहायकों के साथ एक मशीन पर बैठी थी. एक बड़ी कड़ाही में जो मशीन के पास रखी थी, प्लास्टिक पिघलाया जा रहा था. हरमन लोमड़ एक मग को उस तरल पदार्थ से भरता और मशीन के एक छोर पर उसे डाल देता. मशीन के दूसरे छोर से प्लास्टिक का बैग निकल आता था.

शेरू ने तब जंगल के निवासियों की एक बैठक बुलाई. कुटकुट गिलहरी ने वादा किया कि अब वह प्लास्टिक बैग बनाना बंद कर देगी. कुटकुट के साथसाथ सभी जानवरों ने प्लास्टिक के वैकल्पिक उपयोग के बारे में जानने का वादा किया और इस को जल्दी से खत्म करने का उपाय ढूंढ़ने के बारे में सोचने की बात कही. जंबो जानवरों द्वारा उठाए गए इस कदम से खुश था. उसे पूरा विश्वास था कि अब जंगल का वातावरण सुधरेगा और सब कुछ स्वच्छ रहेगा.

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