चंचलवन में रेस की प्रतियोगिता हो रही थी. वन के सभी जानवर रेस देखने के लिए जमा थे. रेस में भाग लेने वाले घोड़े अपनेअपने ट्रैक में खड़े थे. सभी को लग रहा था कि वे ही जीतेंगे. सभी घोड़े एकदूसरे को प्रतिद्वंद्वी की तरह देख रहे थे. रेस अब शुरू ही होने वाली थी कि भोंदू गधा दौड़ता हुआ मैदान में आ धमका.

‘‘रुको भाइयो, मैं भी रेस में भाग लेना चाहता हूं.’’ भोंदू गधा आते ही चीखा. उस की बात सुन कर सभी हंस पड़े. पर यह देख कर भोंदू जरा भी हताश नहीं हुआ. बोला, ‘‘आप लोग सोच रहे हैं कि घोड़ों की रेस में भला गधा क्या दौड़ेगा? दोस्तो, मैं ने बहुत मेहनत की है और मैं एक घोड़े से ज्यादा तेज दौड़ सकता हूं, इसलिए मैं यहां इस रेस में भाग लेने के लिए आया हूं.’’

‘‘अच्छा, तो अब एक गधा हमें पछाड़ेगा?’’ सारे घोड़े एक साथ बोले. जहां अभी तक सारे घोड़े एकदूसरे को प्रतिद्वंद्वी की तरह देख मुंह चिढ़ा रहे थे, अब एक पाले में आ खड़े हुए. अब उन की नजर उस गधे पर टिक गई. अब किसी घोड़े को खुद के जीतने से मतलब नहीं था. मतलब था तो बस घोड़े के जीतने से, चाहे वह कोई भी हो. सवाल अब घोड़े प्रजाति की शान का था.

‘‘देखो, यह गधों के बस की बात नहीं है. हर कोई हमारी तरह काबिल नहीं होता और गधे तो बिलकुल ही नहीं. अगर तुम काबिल होते तो आज गधे न कहलाते,’’ हीरू घोड़े ने कहा, तो सभी हंसने लगे. ‘‘तुम्हारे लिए गठरी ढोने का काम ही ठीक है.

गठरी ढो कर खुद का मजाक बनवात??े रहो,’’ हीरू घोड़े ने फिर गर्व से कहा. सभी घोड़ों की हंसी फिर से गूंज उठी.

‘‘ठीक है, तो रेस लगा कर देख लो. हार गया तो हमेशा के लिए जंगल छोड़ कर चला जाऊंगा,’’ भोंदू ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा. बस फिर क्या था. पूरा चंचलवन रेस के मैदान में भोंदू और घोड़ों का अनोखा रेस देखने आ पहुंचा. रेस शुरू हुई और सारे घोड़े दौड़ पड़े और उन के साथ दौड़ा भोंदू गधा.

सभी की नजर भोंदू पर थी. सब की आंखें तब फटी की फटी रह गईं, जब भोंदू सारे घोड़ों को पछाड़ता हुआ सब से आगे निकल गया. हीरू घोड़े ने बहुत दम लगाया, पर भोंदू के मुकाबले न आ पाया. अंतत: भोंदू रेस जीत गया. भोंदू को इनाम में साइकिल मिली. भोंदू उसे ले कर बहुत खुश था. वह घोड़ों के पास जा कर बोला, ‘‘भाइयो, मैं गधा हूं तो क्या हुआ? कड़ी मेहनत और लगन से कोई भी सफल हो सकता है.’’

उस दिन के बाद से वह रेस चंचलवन में चर्चा का विषय बन गया था. सारे जानवर बस गधे और घोड़ों की बात करते. एक गधे ने सारे घोड़ों को मात दे दी, यह बात कर के सभी घोड़ों की खिल्ली उड़ा रहे थे. भोंदू बड़ा खुश था क्योंकि रेस जीतने के कारण अब कोई गधों को देख कर हंसता नहीं था. पर भोंदू इस बात से खुश नहीं था. ‘मैं रेस जीत गया, इसलिए हम गधों की तारीफ हो रही है यह ठीक है, मगर घोड़ों का मजाक नहीं बनाना चाहिए,’ वह सोच रहा था.

एक दिन भोंदू अपनी साइकिल पर बैठा कहीं जा रहा था, इतने में कई घोड़े उस के पास आ धमके. ‘‘बहुत दौड़ना जानते हो, तो चलो अब दौड़ कर दिखाओ,’’ एक घोड़े ने कहा.

‘‘देखिए, अभी मैं रेस लगाने के मूड में नहीं हूं,’’ भोंदू बोला. ‘‘हमारी नाक काट कर तू कहता है कि तुझे अभी रेस लगाने का मूड नहीं है.’’ कह कर हीरू घोड़े ने भोंदू को धक्का दे कर गिरा दिया. भोंदू उठ खड़ा हुआ. उसे यह समझते देर न लगी कि अब ये उस का बदला लेना चाहते हैं.

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भोंदू उठा और सरपट भागा. काफी दूर भागने के बाद भोंदू बुरी तरह थक गया. पर घोड़ों को तो दौड़ने की आदत थी. वे अब भी उसी स्पीड से उसे दौड़ा रहे थे.

भोंदू इतना थक गया कि उसे चक्कर आने लगे थे. उस ने सामने के गड्ढे को नहीं देखा और उस में गिर गया. वह बेहोश हो गया था. भोंदू को बेहोश देख कर घोड़े चले गए. भोंदू को होश आया तो वह कराहने लगा. कोई नजर भी नहीं आ रहा?था, जिस से वह मदद की गुहार लगा सके. काफी देर बाद उसे आसमान में नन्ही चिडि़या उड़ती नजर आई. वह मिनी थी. भोंदू ने उसे अपनी आपबीती सुनाई. ‘‘मैं ने उन का कुछ भी नहीं बिगाड़ा, फिर भी उन्होंने मुझे परेशान कर दिया. क्या रेस जीतना इतनी बड़ी गलती है?’’ भोंदू कराहता हुआ बोला. भोंदू परेशान था. मिनी बोली, ‘‘तुम्हें क्या लगता है, रेस के मैदान में किसी को ललकार देने के बाद वह मामला सिर्फ रेस के मैदान तक रह जाता है. तुम ने पुरानी परंपरा तोड़ी है. वह अपनी दुश्मनी तो निकालेंगे ही.’’ उस ने आगे कहा, ‘‘देखो, सभी जानते हैं कि गधे तेज नहीं होते, इसलिए उन का लोग मजाक उड़ाते हैं. वहीं घोड़े राजा की तरह होते हैं, लोग उन को सजातेसंवारते हैं. वे बड़े और तुम लोग छोटे कहलाते हो. तुम ने रेस में घोड़ों को हरा कर इस पूरी मानसिकता को ही बदल दी. वे तुम्हें सिर्फ रेस के मैदान में ही नहीं, वास्तविक जिंदगी में भी हराने की कोशिश करेंगे.’’

‘‘यानी मैं ने उन से दुश्मनी मोल ले ली. अब वे मुझे हमेशा परेशान करेंगे?’’ भोंदू डरता हुआ बोला. ‘‘यह तो तुम्हें रेस में भाग लेने के पहले सोचना चाहिए था.’’ कह कर मिनी हंस पड़ी.

‘‘पर मैं ने तो इतनी गहराई से सोचा ही नहीं था.’’ भोंदू चिंतित था. ‘‘वाह, रेस के विजेता हो कर तुम अपने बारे में सोच कर डर रहे हो? तुम्हें इस बात कि खुशी नहीं हो रही कि तुम ने अपनी पूरी प्रजाति की पहचान बदल दी है. क्या यह गलत नहीं था कि तुम्हें छोटी निगाह से देखा जाता था. अब कोई गधों को देख कर हंसता भी नहीं है,’’ मिनी बोली.

‘‘नहीं, नहीं, मिनी बहना, मुझे बहुत खुशी है. मगर..’’ मिनी ने उसे बीच में रोकते हुए कहा, ‘‘अगर तुम्हें बहुत खुशी है, तो डर क्यों रहे हो? तुम्हें तो अब यह सोचना चाहिए कि जिस तरह रेस के मैदान में उन्हें पछाड़ कर तुम ने अपनी जातियों की पहचान बनाई है, उसी तरह इन से डर कर नहीं, लड़ कर अपनेआप को बचाना है ताकि ये किसी और गधे के हौसले को तोड़ न सकें. जब हम किसी को पछाड़ते हैं तो हमें चाहिए कि हम हिम्मत रखें कि उसे हर जगह पछाड़ सकें. वरना वह हमें परेशान करने के लिए कोई न कोई रास्ता ढूंढ़ता ही रहेगा. आई बात समझ में.’’

‘‘हां मिनी, तुम्हारी बात समझ में आ गई. अब मुझे घोड़ों से लड़ने के लिए तैयार रहना होगा,’’ भोंदू बोला, ‘‘क्या यहां से बाहर निकलने में मेरी मदद करोगी?’’

‘‘मैं सहायता करूंगी,’’ इतना कह कर मिनी उड़ गई. अपने साथ कुछ साथियों को ला कर उस ने भोंदू को बाहर निकलने में मदद की. भोंदू ने मिनी को धन्यवाद दिया. ‘‘प्यारे दोस्त, जीवन एक संघर्ष है,

इसे खुल कर जीना है तो हर कदम पर तैयार रहना होगा. हिम्मत से ही हम आजाद जिंदगी जी सकते हैं,’’ मिनी बोली. भोंदू ने अपनी पहचान बनाए रखने का वादा किया. फिर दोनों अपनेअपने घरों की ओर चल पड़े.