गृहशोभा विशेष

एक दिन चार्ली बंदर घूमतेघूमते वन से गांव की ओर निकल आया. गांव में हो रही चहलपहल

को देख कर जंपी एक पेड़ पर बैठ कर उधर ही देखने लगा. चार्ली ने देखा कि सड़क के किनारे कुछ व्यक्ति कतार में बैठे हुए थे. आतेजाते लोगों को देख कर उन की ओर हाथ बढ़ा रहे थे. आतेजाते लोगों में से कुछ लोग उन्हें रुपएपैसे और फल आदि दे रहे थे. यह देख कर चार्ली खुश हो गया.

‘वाह यह तो बढि़या है. मैं कड़ी मेहनत करता हूं फिर  भी मुझे अच्छे फल व पकवान खाने को नहीं मिलते और इन्हें बैठेबैठे अच्छेअच्छे स्वादिष्ठ पकवान और फल मिल रहे हैं. अब से मैं भी ऐसा ही करूंगा. लेकिन अगर मैं ऐसे ही बैठा तो लोग मुझे भगा देंगे. मुझे कुछ करना होगा?’ चार्ली ने मन में सोचा.

कुछ देर सोचने के बाद वह एक कंबल उठा लाया और उसे ओढ़ कर सड़क पर भिखारियों से दूर एक किनारे बैठ गया.

अब चार्ली भी आतेजाते लोगों को देख कर उन की ओर हाथ बढ़ाता. अगर कोई रुपएपैसे देता तो जंपी उसे इधरउधर फेंक देता और फल या कोई अन्य पकवान देता तो उसे मजे से खाता.

अब चार्ली के दिन आराम से कटने लगे. इधर चार्ली की टोली के अन्य बंदरों ने जब देखा कि चार्ली आजकल दिनभर गायब रहता है तो उन्हें बेहद हैरानी हुई.

एक दिन शाम को जब चार्ली वापस लौटा तो उस के साथी बंदर उस के पास आ गए. ‘‘चार्ली, आजकल तुम हमारे साथ बाग में अमरूद खाने भी नहीं जाते. आजकल तुम रहते कहां हो?’’ एक बंदर ने पूछा.

‘‘अरे, आजकल तो मेरे मजे हैं. मैं तो कहता हूं कि तुम सब भी मेरे साथ चलो.’’ चार्ली अपनी तोंद पर हाथ फेरते हुए बोला और उस ने सारी बात अपने साथियों को बता दी.

‘‘चार्ली, हम शरारती और नकलची हैं, लेकिन हम आलसी और कामचोर नहीं हैं, जो बैठेबैठे मुफ्त का भोजन करें. मैं तो कहता हूं कि तुम भी ऐसा करना छोड़ दो, भीख मांगना अच्छी बात नहीं है. अगर किसी दिन इंसानों को पता चल गया कि तुम उन्हें मूर्ख बना रहे हो तो वह तुम्हारी पिटाई कर देंगे.’’ एक बुजुर्ग बंदर ने समझाया.

‘‘अरे, किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. मैं पिछले एक महीने से ऐसा कर रहा हूं, किसी को कुछ पता चला क्या?’’ चार्ली ने हंसते हुए कहा.

अन्य बंदरों ने भी चार्ली को समझाने का प्रयास किया लेकिन चार्ली ने उन की एक नहीं सुनी.

ऐसे काफी दिन बीत गए. जंपी को रुपएपैसे न लेते देख सब लोग जंपी को और भी अधिक फल व खाने की चीजें देते. सोचते कि वह कोई ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें धन का कोई लोभ नहीं है.

चार्ली के कारण आसपास बैठने वाले भिखारियों को कम भीख मिलने लगी, इसलिए वह चार्ली से बेहद चिढ़ते थे, लेकिन वे कुछ भी नहीं कर पाते.

एक दिन जंपी रोज की तरह अपने स्थान पर बैठा आतेजाते व्यक्तियों को देख कर उन की ओर हाथ बढ़ा कर भीख मांग रहा था कि तभी तेज हवा चलने लगी.

तेज हवा चलते ही चार्ली घबरा गया और अपने ऊपर के कंबल को संभालने लगा. चार्ली ने कंबल को पकड़ कर रखने की काफी कोशिश की लेकिन तेज हवा के सामने वह असफल रहा और कंबल हवा के साथ उड़ गया.

कंबल के नीचे बंदर को देख आसपास बैठे भिखारी और अन्य लोग गुस्सा हो गए. ‘‘अरे, यह तो बंदर है, जो हमें इतने दिनों से मूर्ख बना रहा था,’’ सब चिल्लाए और जंपी को डंडे से मारने के लिए दौड़े.

लोगों को गुस्से में देख चार्ली जल्दी से भाग कर पास के पेड़ पर चढ़ गया तो लोग उस की ओर पत्थर फेंकने लगे. लोगों द्वारा फेंके गए पत्थरों से चार्ली को चोट लग गई. चार्ली ने किसी तरह वहां से भाग कर अपनी जान बचाई.

‘सब ठीक कहते थे, मगर मैं उन की बात मान लेता और मुफ्त के फल व पकवान का लोभ नहीं करता तो आज मेरी यह हालत नहीं होती.’ चार्ली लंगड़ाते हुए वन की ओर जाते हुए सोच रहा था.

उस दिन के बाद से चार्ली ने तय कर लिया कि अब वह कभी लालच नहीं करेगा.

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