सीनू गिलहरी सुबह से ही काफी परेशान था. वह अपने स्कूल में होने जा रहे साइकिल रेस में भाग लेना चाहता था. लेकिन उस की साइकिल बहुत पुरानी और छोटी थी. इसलिए सीनू ने साइकिल अपने भाई मोनू को दे दी थी. रेस के विजेता के लिए तीन पुरस्कार थे. पहला पुरस्कार एक कलाई घड़ी थी. सीनू हमेशा सपने देखता था कि वह कलाई पर घड़ी बांध कर स्कूल जाए.

वह अकसर अपने पापा से कलाई घड़ी ला देने के बारे में कहा करता, तो पापा कहते, ‘‘मेरे प्यारे बेटे, मैथ के पेपर में पूरा नंबर लाने की कोशिश करो, तब मैं तुम्हें एक कलाई घड़ी ला दूंगा.’’ लेकिन ऐसा कभी नहीं हो पाया, क्योंकि सीनू मैथ में कई गलतियां कर जाता और उस के नंबर कम हो जाते थे.

‘ओह नो, अब मैं साइकिल कहां से लाऊं?’ सीनू बहुत परेशान हो कर सोच रहा?था. तभी उस की मम्मी ने पुकारा, ‘‘सीनू, दादी मां अपनी गैलरी और गराज साफ करना चाहती हैं. तुम जा कर उन की मदद क्यों नहीं करते?’’ ‘‘ओह, मम्मी, मुझे एक बहुत जरूरी काम है. मोनू को दादीमां के यहां भेज दो,’’ सीनू ने कहा.

‘‘मोनू छोटा है. तुम मोनू से लंबे हो. तुम गैलरी में चढ़ सकते हो और गंदगी साफ कर सकते हो. इसलिए ब्रेकफास्ट करने के बाद बस पकड़ो और दादीमां के यहां चले जाओ. वह अपना सारा काम खुद नहीं कर सकेंगी,’’ मम्मी ने कहा. ‘‘मम्मी, गैलरी क्या होती है?’’ सीनू ने उत्सुकता

से पूछा. ‘‘गैलरी सामान रखने की एक जगह होती है जो आमतौर पर रहने के स्थान से ठीक ऊपर बनाई जाती है,’’ मम्मी ने बताया.

सीनू के पास वहां जाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था. इसलिए उस ने ब्रेडटोस्ट खाए और दूध पी कर बस पकड़ने के लिए चल पड़ा. उस ने 10 मिनट तक बस का इंतजार किया. तभी उस का दोस्त बिंकू गिलहरी साइकिल चलाता हुआ वहां आया. ‘‘अरे, सीनू, क्या तुम रेस में

भाग नहीं ले रहे हो? देखो, मैं अभ्यास कर रहा हूं. तुम भी आ जाओ, बड़ा मजा आएगा.’’ कह कर उस ने हाथ हिलाया और चला गया. सीनू रेस के बारे में सोचने लगा. सीनू दादीमां के घर पहुंचा. रास्ते में उस ने उन के लिए कुछ अंगूर खरीद लिए थे. दादीमां को अंगूर काफी पसंद थे.

‘‘सीनू, मुझे बहुत खुशी हुई कि तुम आ गए. मेरी आंखें बहुत कमजोर हैं और मेरे पैरों में भी दम नहीं रहा. इसी लिए मैं ने तुम्हारी मम्मी से कहा था कि वह तुम्हें यहां भेज दे. मेरे साथ किचन में आओ.’’ वह सीनू को अपने साथ ले गईं. दिन भर सीनू किचन की शैल्फों को साफ करता रहा. पुरानी शीट्स को फेंका. पानी की टंकी को साफ किया और अन्य कामों में लगा रहा.

लंच के बाद सीनू की दादी ने उस से कहा, ‘‘सीनू, गराज में जाओ और सभी पुरानी चीजों को वहां से फेंक दो. यह रही गराज की चाबी.’’ सीनू गराज में गया. उस ने देखा कि गराज में धूल और मिट्टी भरी पड़ी है.

किसी तरह उस ने एक बड़ा सा टार्च जलाया और गराज साफ करने लगा. वह जोरजोर से छींकने लगा. उस ने सोचा, ‘आज मुझे सर्दी हो जाएगी.’ लेकिन तब उस के चेहरे पर खुशी आ गई जब उस ने एक बड़ी साइकिल वहां खड़ी देखी. हालांकि साइकिल की हालत खराब थी और वह बहुत पुरानी थी. इस की घंटी टूटी हुई थी. हैंडल में जंग लगा हुआ था. लेकिन साइकिल मजबूत थी. सीनू बहुत खुश था. उस ने गराज से साइकिल बाहर निकाली और एक कपड़े से इसे साफ किया. ‘‘मुझे इस की मरम्मत करानी होगी और पेंट भी कराना होगा, तब ये अच्छी हो जाएगी और मैं इस का उपयोग रेस में कर सकूंगा.’’

वह दादीमां के पास गया और बोला, ‘‘दादीमां, क्या मैं इस साइकिल को ले जा सकता हूं?’’ दादीमां मुसकराईं और बोलीं, ‘‘जरूर, सीनू, तुम इसे ले जा सकते हो. यह तुम्हारे दादाजी की साइकिल है. उन्होंने इसे गराज में रख दिया था जब उन्होंने इस का उपयोग करना छोड़ दिया था.’’

सीनू और दादीमां ने चाय पी और केक खाए. उस की दादीमां ने उसे कुछ रुपए दिए और कहा, ‘‘अपने लिए कुछ खरीद लेना. मम्मी को धन्यवाद कहना, प्यारे बच्चे.’’ सीनू रुपए और साइकिल ले कर घर आ गया. उस ने दादीमां के दिए रुपए से साइकिल की मरम्मत कराई. साइकिल अब बहुत अच्छी दिख रही थी. उस ने मन ही मन इस के लिए दादीमां को धन्यवाद दिया.

सीनू अब रेस के लिए साइकिल से अभ्यास करने लगा. अब वह खुश था कि वह रेस जीतेगा और उस का सपना पूरा होगा.