मम्मी गौरैया बहुत खुश थी. उस के अंडों से चूजे निकलने वाले थे. ‘‘मैं अपने बच्चों को देखने का बेचैनी से इंतजार कर रही हूं,’’ उस ने खुद से कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि तुम्हारे पापा समय पर आ जाएंगे. वह जंगल के दूसरी ओर के गांव में कुछ दाने लाने के लिए गए हैं.’’

मम्मी गौरैया की सहायता करने के लिए बूढ़ी दादीमां उल्लू वहां आ गई थी. ‘‘चूजे अंडों को तोड़ कर कभी भी निकल सकते हैं,’’ वह अपने चश्मे से देखते हुए बोली.

दादीमां ने घोंसले से नीचे देखा पर वहां कोई नहीं था, जो पापा गौरैया तक उस के संदेश को पहुंचा सके. एक आलसी टेड मेढक वहां से कुछ दूर नदी की धारा में तैर रहा था. ‘‘मेरे पास एक आइडिया है,’’ उस ने मम्मी गौरैए से कहा. ‘‘तुम टेड मेढक से नदी के उस पार तक तैरने और किसी का पता लगाने के लिए कहो, ताकि वह पापा गौरैया तक संदेश पहुंचा दे.’’

‘‘लेकिन टेड तो बहुत आलसी है जैसे कि एक टोड होता है,’’ मम्मी गौरैया ने कहा. ‘‘हम तो सिर्फ इतना चाहते हैं कि वह संदेश किसी और को दे दे ताकि पूरे जंगल के रास्ते उसे जाना न पड़े,’’ दादीमां ने कहा.

मम्मी गौरैया ने एक मिनट के लिए सोचा और उस के बाद अपने अंडों को देखा. वह नदी के पास गई और टेड से कहा, ‘‘प्यारे टेड, क्या तुम मेरा एक संदेश पापा गौरैया तक पहुंचा दोगे? जो जंगल के दूसरी ओर एक गांव में हैं.’’ ‘‘ओह, गौरैया, मेरे पास आज का दिन आराम करने का है,’’ टेड ने कहा.

‘‘तुम्हें वहां जाने की जरूरत नहीं है. नदी के दूसरी ओर किसी को यह संदेश दे दो और उसे कह दो कि वह भी किसी और को यह संदेश दे, यह तब तक करता जाए जब तक कि पापा गौरैया तक संदेश न पहुंच जाए,’’ उस ने विस्तार से बताया तो टेड मान गया. ‘‘संदेश है, अंडों से चूजे जल्दी ही बाहर निकलने वाले हैं,’’ मम्मी गौरैया ने कहा.

टेड नदी के उस पार तैर कर गया और चारों ओर देखा कि कोई दिखे, जो संदेश को पापा गौरैया तक पहुंचा सके. उस ने मंगू बंदर को एक पेड़ पर सुस्ताते देखा. ‘‘मंगू , क्या तुम यहां आ सकते हो? मेरे पास मम्मी गौरैया का एक बहुत जरूरी संदेश है. क्या तुम इसे पापा गौरैया तक पहुंचा दोगे?’’ उस ने पूछा.

मंगू पेड़ से नीचे कूद कर आया और बोला, ‘‘ बहुत जरूरी संदेश? तुम मुझे संदेश आगे बढ़ाते हुए गिनती कर सकते हो. मैं इतना तेज हूं जैसे कि बिजली.’’kids stories

‘‘संदेश है, अंडों से….’’ तभी टेड टर्राया क्योंकि वह थका हुआ था. इस से पहले कि वह वाक्य पूरा कर पाता, मंगू तेजी से एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर कूदता हुआ दूर चला गया. लेकिन तभी उस ने एक बड़े पेड़ को देखा जो पके हुए नाशपातियों से भरा था. उस का पेट गुड़गुड़ाने लगा.

‘‘मैं ने केले खाए हैं,’’ उस ने कहा, ‘‘ मुझे किसी और को संदेश दे कर कुछ नाशपाती खाने चाहिए.’’ उस ने पास में ही डेजी हिरण को चरते हुए देखा. ‘‘अरे डेजी, मम्मी गौरैया का एक बहुत ही जरूरी संदेश पापा गौरैया के लिए है जो जंगल के दूसरे छोर पर हैं. क्या तुम उन तक संदेश पहुंचा दोगी?’’ उस ने डेजी से पूछा.

‘‘जरूर, मैं पहुंचा सकती हूं. संदेश क्या है?’’ उस ने पूछा.

‘‘अंडे टर्रा रहे हैं,’’ मंगू ने कहा और कुछ नाशपातियों को खाने के लिए कूदा. ‘अंडे टर्रा रहे हैं. यह तो बड़ा अनूठा संदेश है?’ डेजी ने सोचा. लेकिन उसे तो संदेश को आगे बढ़ाना था.

डेजी तेजी से दौड़ी लेकिन जब वह जंगल के बीच में थी, उस ने दहाड़ सुनी. उस ने चारों ओर देखा लेकिन वहां कोई नहीं था. ‘दहाड़ सुन कर सभी यहां से भाग गए होंगे,’ उस ने सोचा. वह वापस दौड़ने लगी. उस ने जिनी जिराफ और रूबी खरगोश को देखा, लेकिन वे भी सिंह की दहाड़ सुन कर भाग रहे थे.

वह नदी के पास ऐड्डी हाथी से मिली. वह अपनी सूंड़ में पानी भर रहा था. ‘‘क्या तुम नहाने वाले हो ऐड्डी?’’ डेजी ने पूछा. ऐड्डी ने अपनी सूंड़ को उठाया और हिला कर पानी बाहर फेंक दिया. ‘‘नहीं, डेजी, खाना खा लेने के बाद मैं सिर्फ गरारे कर रहा था,’’ ऐड्डी ने कहा.kids stories

‘‘क्या तुम पापा गौरैया तक जो जंगल के उस पार हैं, एक संदेश पहुंचा दोगे? यह मम्मी गौरैया का संदेश है और बहुत जरूरी संदेश है. तुम नदी के पार जा सकते हो. इस रास्ते से गांव भी निकट है,’’ डेजी ने कहा, तभी उस ने फिर एक दहाड़ सुनी. ‘‘मेरे लिए अच्छा है कि भाग जाऊं. संदेश है, अंडे गरज रहे हैं.’’ उस ने कहा और तेजी से भागी जितना तेज वह भाग सकती थी.

‘‘अंडे गरज रहे हैं, यह तो सच में बड़ा अजूबा संदेश है,’’ ऐड्डी ने स्वयं से कहा, ‘‘लेकिन मुझे संदेश को आगे बढ़ा देना चाहिए.’’ वह पैर पटक कर नदी पार करने लगा. जब वह नदी के बीच में था, उस का पैर किसी चीज से अटक गया और वह आगे नहीं बढ़ सका. ‘यह घास हो सकती है. मुझे इसे हटाना होगा. लेकिन इस में कुछ समय लगेगा. मुझे संदेश आगे बढ़ाने के लिए कुछ करना चाहिए,’ उस ने सोचा.

उस ने एक मछली को तैरते हुए देखा. मछली को पास बुला कर उस ने कहा कि उसे डेजी ने एक संदेश दिया है जो आगे बढ़ाना है. कृपया, मेरे संदेश को पापा गौरैया तक पहुंचा दो. ‘‘जरूर, संदेश क्या है?’’ नन्ही मछली ने पूछा.

‘‘अंडे…’’ उस ने कहना शुरू किया ही था कि उस ने अपने पैर में खुजली महसूस की और कहा, ‘‘अंडे दर्द कर रहे हैं.’’ और अपनी सूंड़ से घासों को हटाने लग गया. ‘अंडे दर्द कर रहे हैं. अजूबा संदेश है. लेकिन मुझे तो जल्दी से संदेश पहुंचाना है और अंधेरा होने के पहले लौट जाना है,’ सोचते हुए मछली तेजी से तैरने लगी.

जब वह नदी के दूसरे किनारे पर थी, उस ने ढोल की आवाज सुनी. वह डर गई और जल्दी से लौटने लगी. उस ने वहां बल्लू भालू को नाचते हुए देखा. ‘‘अरे बल्लू, तुम क्या कर रहे हो?’’ मछली ने पूछा. ‘‘नहाने के बाद मैं खुद को सुखा रहा हूं,’’ बल्लू ने नाचते हुए कहा.

मछली ने बल्लू से कहा कि क्या वह पापा गौरैया तक एक संदेश पहुंचा देगा. ‘‘संदेश क्या है?’’ बल्लू ने पूछा. मछली को फिर ढोल की आवाज सुनाई दी. ‘‘अंडे बज रहे हैं,’’ मछली ने कहा और तैरती हुई वापस भाग गई.

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‘अंडे बज रहे हैं. बहुत मजेदार,’ बल्लू ने सोचा. ‘‘मेरे पैर हवा के सुर के साथ थिरक रहे हैं,’’ वह गाना गाने लगा और रास्ते में नाचते हुए चलने लगा. जब वह जंगल के किनारे पहुंचा, उस ने एक गधे को कुछ पत्तियां चबाते हुए देखा.

‘वह पत्तियों को खाने के लिए अपने मालिक के यहां से चुपके से भाग आया होगा,’ उस ने सोचा. ‘‘क्या तुम पापा गौरैया को एक संदेश पहुंचा दोगे?’’ गधे ने बल्लू की आवाज सुन कर सिर उठाया.

‘‘जरूर, संदेश क्या है?’’ उस ने पूछा. बल्लू ने एक मिनट तक सोचा, उस के गाने ने उस संदेश का घालमेल कर दिया था. ‘‘गिरियां तीखी हैं,’’ उस ने कहा.

गधे की एक बुरी आदत थी. उसे कुछ याद नहीं रहता था. इसलिए रास्ते भर संदेश को रटता हुआ चलने लगा, ‘‘गिरियां तीखी हैं.’’ एक बंदर कूद रहा था और उस के मालिक ने उसे जो ट्रिक सिखाया था, वही कर रहा था.

‘‘बंदर कूद रहे हैं,’’ गधे ने दोहराया. एक मुर्गी अपने नन्हे चूजों के साथ दौड़ती जा रही थी. ‘कितने सुंदर बच्चे हैं,’ गधे ने सोचा.

‘‘बच्चे कूद रहे हैं,’’ उस ने दोहराया. उस के बाद उस ने एक आदमी को अपने टट्टू को मारते और जोर से चिल्लाते हुए देखा. उस ने पापा गौरैया को एक पेड़ पर बैठे देखा.

‘‘हैलो, पापा गौरैया, मम्मी गौरैया का आप के लिए एक संदेश है,’’ उस ने कहा. ‘‘क्या है?’’ पापा गौरैया ने हैरानी से पूछा.

‘‘बच्चे रो रहे हैं,’’ गधे ने कहा. ‘ओह, इस का मतलब है कि अंडे फूट गए हैं और चूजे निकल आए हैं,’ पापा गौरैया ने सोचते हुए स्वयं से कहा. उस ने गधे को धन्यवाद दिया और तेजी से जंगल के पार अपने घोसले में पहुंचने के लिए उड़ गया, ताकि समय पर अंडों को तोड़ कर निकल आए चूजों की देखभाल कर सके.

VIDEO : ट्रांइगुलर स्ट्रिप्स नेल आर्ट

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