गृहशोभा विशेष

बैडी लोमड़ चंपकवन के सभी जानवरों को परेशान करता रहता था, इसलिए कोई भी जानवर उसे पसंद नहीं करता था. वह या तो किसी को धक्का मार कर भाग जाता था या फिर किसी के हाथ से चीजों को छीन लेता था. कभीकभी वह टिप्पणी भी करता था जैसे कि कौए गंदे होते हैं क्योंकि इन के रंग काले होते हैं और आवाज कर्कश होता है. या फिर जिराफ पर उस की लंबी टांगों की ओर इशारा करते हुए हंसा करता था. पिछले साल होली के समय जंपी बंदर ने बैडी लोमड़ को एक सबक सिखाया था. एक योजना के अनुसार जंपी ने जमीन पर एक गड्ढे को रंग से भर दिया और इसे घासपत्तियों से ढक दिया. फिर पेड़ पर सब से ऊपर बैठा और पिचकारी में रंगीन पानी ले कर बैडी पर रंग फेंकने लगा.

बैडी ने गुस्से से कहा, ‘‘तुम पेड़ के ऊपर बैठे हो इसी लिए मुझ पर रंगीन पानी डालने की हिम्मत कर रहे हो? नीचे आओ, तब मैं तुम्हें बताऊंगा कि होली कैसे खेली जाती है.’’ जंपी पेड़ से नीचे कूदा और बैडी के निकट आ गया. उस ने कहा, ‘‘अब मैं ठीक तुम्हारे सामने हूं. मुझ पर रंगीन पानी डालने की कोशिश करो.’’ जैसे ही बैडी आगे बढ़ा, जंपी गड्ढे की दिशा में तेजी से भागा. बैडी ने उस का पीछा किया. जंपी जब दौड़ रहा था तब लंबी छलांग भी लगा रहा था. गड्ढे के पास पहुंच कर जंपी ने एक बहुत बड़ी छलांग लगाई और गड्ढे के ऊपर से कूद गया. बैडी गड्ढे के बारे में नहीं जानता था इसलिए इस में गिर गया. वह पूरी तरह रंगीन पानी में डूब गया.

चंपकवन के पक्षी और जानवर जो वहां थे, बैडी को इस हालत में देख कर हंसने लगे. इस से बैडी को बहुत गुस्सा आया. होली फिर से आने वाली थी. पिछली बार होली में जंपी ने उस के साथ जो किया था उस का बदला लेने के लिए बैडी योजना बनाने में व्यस्त था.

एक दिन बैडी ने जंपी के दोस्त मीकू चूहे को देखा. मीकू जंपी से नाराज था. बैडी ने मीकू की गुस्से में बड़बड़ाने की आवाज सुन ली थी, ‘‘यह जंपी अपनेआप को समझता क्या है? उस ने एक दिन मेरे केले छीन लिए और खा लिए. किसी दिन मैं उसे ऐसा सबक सिखाऊंगा कि वह पूरी जिंदगी याद रखेगा.

‘‘मैं अभी तक नहीं समझ सका हूं कि वह अपनेआप को इतना होशियार क्यों समझता है? वह मुझे हमेशा दूसरों के सामने छोटा दिखाने की कोशिश करता रहता है,’’ मीकू ने बड़बड़ाते हुए कहा. बैडी मीकू के पास गया और बोला, ‘‘मेरे साथ हाथ मिला लो, मीकू. हम उसे होली के दिन सबक सिखाएंगे जिसे वह ??याद रखेगा.’’

‘‘क्या सच में तुम्हारे पास कोई योजना है, उसे सबक सिखाने के लिए? मैं तुम्हारे साथ हूं. मुझे जल्दी से बताओ, मुझे क्या करना चाहिए?’’ मीकू बैडी के साथ हो लिया. ‘‘हम काले रंग के पानी से एक बरतन को भरेंगे. इस में खुजली करने वाला पाउडर मिला देंगे और इसे तैयार रखेंगे. त्योहार वाले दिन हम इस काले रंग वाले पानी को जंपी पर डाल देंगे. इस बार हमारी बारी होगी हंसने और मजे करने की,’’ बैडी ने कहा.

‘‘लेकिन बैडी, इस से जंपी को बहुत तकलीफ होगी,’’ मीकू ने डरते हुए कहा. ‘‘बहुत ज्यादा तकलीफ नहीं होगी. वह सिर्फ 2-3 घंटे तक ही खुजली करेगा और वह जंगल में काले रंग में रंगा 5-6 दिन तक भटकेगा. उसे देखने में हमें मजा आएगा,’’ बैडी ने कहा.

‘‘इस का मतलब यह हुआ कि जंपी एक बंदर से बैबून में बदल जाएगा? मैं भी इस खेल में तुम्हारे साथ शामिल हो रहा हूं. लेकिन जब मैं पानी फेंकूंगा तब तुम्हें भी वहां रहना होगा क्योंकि यह तभी अच्छा लगेगा जब हम दोनों हंसें और उसे उस की शरारत की सजा भुगतते देख कर हम साथ में एंजौय करें,’’ मीकू ने कहा. ‘‘जरूर, क्यों नहीं? मुझे छिपने के लिए एक जगह दिखाओ जहां से मैं पूरे खेल को देख सकूंगा,’’ बैडी ने कहा.

‘‘तुम जंपी के घर के सामने के उस पेड़ के तने के पीछे छिप सकते हो,’’ मीकू ने कहा. ‘‘ओके, होली के एक दिन पहले मैं काले रंग का गाढ़ा घोल बना कर अपने साथ ले आऊंगा,’’ बैडी ने कहा और चला गया.

बैडी ने एक बरतन में काले रंग का गाढ़ा घोल बनाया. होली वाले दिन सुबह में ही बैडी ने इसे मीकू को दे दिया. मीकू जंपी के घर के आगे के पेड़ पर बरतन के साथ चढ़ गया. जंपी के घर के आगे के पेड़ के पीछे बैडी छिप गया.

थोड़ी देर के बाद बैडी जोर से चीखा. वह छिपने वाली जगह से बाहर निकल आया था और खुद को खरोंच रहा था. वह भी काले रंग में सराबोर था. चंपकवन के जानवरों और पक्षियों की योजना में पिछले साल की तरह, अनजान बैडी, इस बार भी फंस गया था. सभी पक्षी और जानवर पहले से ही चारों ओर छिपे हुए थे और इस खेल का मजा ले रहे थे. बैडी को देखते ही सभी बाहर आ कर हंसने लगे. वे एक साथ जोर से चिल्ला कर बोले, ‘‘दिल पर इसे मत लेना. आज होली है, रंगों का त्योहार. आज के दिन सब कुछ माफ है.’’

कौए ने मजाक उड़ाते हुए कहा, ‘‘नहीं, नहीं, यह कालीकलूटी होली है. यह कौन अजनबी जानवर यहां हमारे जंगल में खड़ा है? उस का रंग तो एक बैबून की तरह है, लेकिन इस की पूंछ इतनी छोटी कैसे हो गई. ओह, मुझे काला कह कर चिढ़ाने वाले का ये क्या हाल हो गया?’’ बैडी समझ नहीं पाया कि वह जंपी की जगह कैसे रंग गया. बैडी ने उस पेड़ को देखा जिस पर मीकू बैठा था. मीकू नहीं था. मीकू पहले ही उतर आया था. उस के बाद मीकू चुपके से उस पेड़ पर चढ़ गया था जिस के नीचे बैडी छिपा था और गाढ़े काले घोल को उस ने पूरा खाली कर दिया.

मीकू ने कहा, ‘‘हम जान गए थे कि इस होली में तुम निश्चित ही जंपी से बदला लेने के लिए एक योजना बनाओगे. इसी कारण मैं ने जंपी से झगड़ने का ढोंग किया था और तुम्हारे साथ हाथ मिला लिया, ताकि तुम अपनी योजना के बारे में मुझे बता सको.’’ उस के बाद डाक्टर जंबो हाथी आए और बोले, ‘‘चंपकवन में यह सब क्या हो रहा है? होली रंगों का त्योहार है. आनंद और खुशियों का पर्व है. होली शांति और भाईचारे का प्रतीक है. तुम सभी को अपनी बुरी आदतें और विचार छोड़ देनी चाहिए ताकि हम सभी समस्याओं को आसानी से एकसाथ मिल कर हल कर सकें.’’

चंपकवन के सभी जानवरों ने एकसाथ मिल कर बैडी को साफ पानी से नहाने में मदद की. डाक्टर जंबो के द्वारा दी गई दवा को लगाने से बैडी को आराम मिला. इस घटना ने बैडी को बिलकुल ही बदल दिया. उस दिन के बाद से वह सभी पक्षियों और जानवरों के साथ अच्छा व्यवहार करने लगा. चंपकवन के सभी जानवर भाईचारे के साथ रहने के अर्थ को समझ गए थे. अब चारों ओर खुशियां ही खुशियां थीं.

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