गृहशोभा विशेष

नीलगिरी वन में सभी जानवर मिलजुल कर रहते थे. वन के सभी बच्चे वन के स्कूल में पढ़ने जाते थे. स्कूल के टीचर जंबो हाथी से पढ़ने में सभी बच्चों को बहुत मजा आता था. वहीं चीकू खरगोश बहुत आलसी था. न तो उसे स्कूल जाने में अच्छा लगता था, न ही पढ़ने में उस का मन लगता था. वह दिनभर इधरउधर घूमता रहता और गाजरें खाता रहता. घर के कामों के साथसाथ अपना होमवर्क भी वह टालता रहता.

चीकू को पढ़ाई करने के बारे में सोचते ही चक्कर आने लगते और यदि मम्मी पढ़ाई के लिए कहतीं, तो वह इधरउधर की बातें करते हुए वहां से भाग जाता.

मम्मीपापा भी चीकू की इस आदत से बहुत परेशान थे. 7वीं क्लास में चले जाने के बाद भी चीकू न ठीक से लिख पाता था और न ही पढ़ पाता था. वह परीक्षा की तैयारी भी अपने दोस्तों की कापी या नोटबुक से देख कर ही करता था. उस के क्लास के दोस्त उस का मजाक उड़ाते. लेकिन चीकू पर उन की बातों का कोई असर नहीं पड़ता था.

चीकू ने अपनी फाइनल परीक्षा के बाद मामा के यहां जाने की योजना बनाई. उस ने अपने मम्मीपापा से कहा कि वह इन छुट्टियों में मामा के यहां जाना चाहता है. त्योहार का मौसम था. पापा के पास औफिस का बहुत सारा काम था इसलिए वे चीकू को पहुंचाने नहीं जा सकते थे. दादीमां बीमार थीं, इसलिए मम्मी का भी साथ में जाना मुश्किल था.

चीकू ने अकेला ही जाने का फैसला किया. उस ने मम्मीपापा से इस बात की इजाजत मांगी. मम्मीपापा ने अनुमति दे दी. चीकू की मम्मी उसे छोड़ने बसस्टैंड तक गईं.

बसस्टैंड पहुंचने पर चीकू ने देखा कि वहां बहुत सारी बसें खड़ी थीं. उस के मामा कजरीवन में रहते थे. वह ठीक से पढ़ नहीं सकता था इसलिए वहां मौजूद जानवरों से कजरीवन जाने वाली बस के बारे में पूछने लगा. सभी व्यस्त थे और सभी को यह लगता था कि चीकू भी पढ़ सकता है. उसे बहुत बुरा लग रहा था.

‘‘तुम तो अच्छेखासे पढ़ेलिखे लगते हो और बस के ऊपर क्या लिखा है, यह भी नहीं पढ़ सकते? क्या तुम्हें स्कूल में कुछ भी नहीं पढ़ाया गया?’’ बैडी लोमड़ ने पूछा. वहां मीकू चूहा अपने किसी रिश्तेदार को छोड़ने आया था. चीकू की हालत देख कर वह बहुत दुखी हुआ. उस ने बताया, ‘‘वह बस कजरीवन जा रही है.’’ चीकू ने मीकू को धन्यवाद दिया और भागते हुए उस बस में चढ़ गया.

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बस जैसे ही आगे बढ़ी, कंडक्टर ब्लैकी भालू ने चीकू के पास आ कर पूछा, ‘‘बेटे, तुम्हें कहां जाना है?’’ चीकू ने कहा, ‘‘मुझे कजरीवन का टिकट दे दीजिए.’’ उस ने अपना पर्स निकाल कर ब्लैकी को दे दिया और बोला, ‘‘टिकट के पैसे ले कर, बाकी मुझे वापस दे दीजिए.’’

ब्लैकी ने चीकू की ओर हैरानी से देखते हुए कहा, ‘‘बेटे, यह बस तो कजरीवन नहीं जा रही है. यह कजरीवन से आ रही है और चंपकवन होते हुए हरितवन जा रही है. तुम गलत बस में चढ़ गए हो.’’

आगे उस ने कहा, ‘‘और तुम्हें अपने सारे रुपए किसी को भी नहीं दे देने चाहिए. चोर और ठग घूमते रहते हैं. क्या तुम्हें पढ़ना और गिनती करनी नहीं आती?’’

चीकू शर्म से लाल हो गया. अब उस ने महसूस किया कि उसे स्कूल में पढ़नेलिखने पर ध्यान देना चाहिए था. यदि उस ने स्कूल में पढ़ना, लिखना और गिनती करना सीख लिया होता तो उसे आज ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता. आज कोई उस का मजाक नहीं बनाता. अब उसे रोने का मन हो रहा था. वह इस बात से भी घबड़ा रहा था कि वह गलत बस में चढ़ गया है और अब कंडक्टर पता नहीं उस के साथ कैसा व्यवहार करेगा.

उस ने ब्लैकी भालू से कहा कि वह सचमुच पढ़ना और लिखना नहीं जानता. वह आगे से पढ़नेलिखने पर ध्यान देगा. ब्लैकी भी दुखी था. उस ने बस रुकवाई और उतर कर कजरीवन जाने वाली बस में चीकू को बिठा दिया.

चीकू ने ब्लैकी को धन्यवाद दिया. जब वह मामा के घर पहुंचा तो सारी बातें बताईं. चीकू के मामा शेरसिंह एक टीचर थे. उन्होंने चीकू से कहा, ‘‘बेटे, जीवन में आगे बढ़ने के लिए पढ़ाई बहुत जरूरी है. आजकल हर क्षेत्र में पढ़ाई का आना बहुत जरूरी है. इसलिए कठिन मेहनत करो और पढ़ाई पर ध्यान दो.’’

चीकू जब वापस अपने घर पहुंचा तो स्कूल की पढ़ाई पर ध्यान देने लगा. स्कूल में मेहनत करने लगा. अब वह आलस नहीं करता था. उस ने अपनी मेहनत और परीक्षा के रिजल्ट से न सिर्फ मम्मीपापा और टीचर बल्कि अपने दोस्तों को हैरान कर दिया. अब कोई उसे आलसी और बुद्धू नहीं कह सकता था.