गृहशोभा विशेष

आयुष के जन्मदिन पर दादाजी भी आए थे. आयुष ने अपने सभी दोस्तों को जन्मदिन पर बुलाया था.

आयुष ने अपने दोस्तों से अपने दादाजी को मिलवाया. सभी बच्चे गेम्स खेल रहे थे. सभी हंसीखुशी बर्थडे मना कर अपनेअपने घर चले गए.

‘‘आयुष, तुम्हारे सभी दोस्तों ने तो पार्टी में खुशीखुशी भाग लिया लेकिन रोहन चुपचाप था.’’ दादाजी ने कमरे को साफ करते हुए आयुष से कहा.

‘‘दादाजी, रोहन के पापा आर्मी में कैप्टन थे. कारगिल युद्ध में उन की मौत हो गई थी. उस समय से रोहन बहुत उदास रहने लगा है,’’ आयुष ने बताया.

‘‘ओह,’’ दादाजी ने कहा. वे रोहन की उदासी का कारण समझ गए थे.

‘‘दादाजी, कारगिल युद्ध क्यों हुआ था?’’ आयुष ने बैठते हुए कहा.

‘‘कश्मीर के उत्तरी इलाके में हमारे पड़ोसी पाकिस्तान के साथ लाइन औफ कंट्रोल के पास कारगिल पर्वत है. वहीं 1999 में मई से जुलाई के बीच लाइन औफ कंट्रोल की रक्षा के लिए कारगिल युद्ध हुआ था. इस युद्ध में हमारे सिपाहियों ने बहुत बहादुरी से पाकिस्तान के सिपाहियों से 60 दिनों तक युद्ध किया और 26 जुलाई को आखिरकार अपने क्षेत्र को हासिल कर लिया. इस युद्ध में दोनों ओर के कई लोगों की जानें गईं.’’ दादाजी ने विस्तार से बताया.

उन्होंने आगे बताया, ‘‘इसलिए हर वर्ष 26 जुलाई को हम लोग अपने बहादुर सिपाहियों को श्रद्धांजलि देने के लिए कारगिल विजय दिवस मनाते हैं.’’

‘‘रोहन के पिताजी इसी युद्ध में मारे गए,’’

आयुष ने दुखी होते हुए कहा, ‘‘लेकिन दुख की बात यह है दादाजी कि उसी दिन रोहन का बर्थडे था. उस के बाद से रोहन कभी भी अपना बर्थडे नहीं मनाता है.’’

‘‘वह अभी बच्चा है. अपने पिता की याद और अपने जन्मदिन के बीच वह खुद कुछ सोच नहीं पा रहा होगा,’’ दादाजी ने कुछ सोचते हुए कहा.

‘‘हां, वह अपने पापा को बहुत याद करता है. उस की मम्मी भी जन्मदिन नहीं मनाना चाहती हैं,’’ आयुष बोला.

‘‘रोहन का जन्मदिन कब है?’’ अचानक दादाजी ने पूछा.

‘‘अगले सोमवार को, दादाजी,’’

आयुष ने कहा.

‘‘ठीक है. अब चलो अच्छी तरह सोते हैं. तुम भी बहुत थक गए होगे,’’ दादाजी ने कहा.

‘‘गुडनाइट दादाजी.’’ कह कर आयुष सोने चला गया.

सोमवार को रोहन के घर में उस की मम्मी उसे नए कपड़े पहनने के लिए कह रही थीं.

‘‘मैं नए कपड़े क्यों पहनूं, मम्मी? हम लोग जन्मदिन नहीं मना रहे हैं.’’ रोहन ने मम्मी की ओर देखते हुए कहा.

रोहन समझ नहीं पा रहा था कि क्या हो रहा है. उस ने मम्मी का कहना मानते हुए नए कपड़े पहन लिए. तभी दरवाजे की घंटी बजी. मम्मी ने रोहन से दरवाजा खोलने के लिए कहा. रोहन ने जब दरवाजा खोला तो सामने आयुष के दादाजी, आयुष और उस के दोस्त खड़े थे.

सभी के हाथों में बैलून्स, एक बड़ा सा केक और कई उपहार थे.

सभी बच्चे एक साथ बोल पड़े, ‘‘हैप्पी बर्थडे, रोहन.’’

रोहन समझ नहीं पा रहा था कि वह क्या बोले. वह पास में खड़ी मम्मी की ओर देखने लगा, जो मुसकरा रही थीं.

दादाजी ने बच्चों से कहा, ‘‘आओ, इस कमरे को बैलूनों से सजाना शुरू करते हैं.’’

बच्चों ने जल्दी ही उस कमरे को सजा दिया.

‘‘हैप्पी बर्थडे, रोहन?’’ दादाजी ने कहा.

‘‘लेकिन दादाजी, मैं अपना बर्थडे नहीं मनाता हूं,’’ रोहन बोला.

‘‘दादाजी ने तुम्हारी मम्मी से बात कर ली है और ये भी बता दिया है कि यदि तुम्हारे पापा होते तो तुम्हारा बर्थडे मना कर बहुत खुश होते.

‘‘इसलिए मेरे दादाजी और तुम्हारी मम्मी ने मिल कर यह सरप्राइज बर्थडे पार्टी मनाने की सोची,’’ आयुष बोला.

रोहन ने आंखों में आंसू भर कर अपनी मम्मी की ओर देखा. मम्मी ने कहा, ‘‘आओ, यह समय केक काटने का है.’’

रोहन के केक काटते ही कमरा फिर बच्चों की आवाज से गूंज उठा, ‘‘हैप्पी बर्थडे.’’

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