जंबो एक छोटा और शरारती हाथी था. वह पढ़ाई में प्रथम आता था और कुश्ती में भी. वह हर मामले में अच्छा था, लेकिन फिर भी उसे कोई दोस्त बनाना पसंद नहीं करता था. क्योंकि वह बहुत घमंडी था और दूसरों की भावनाओं को नहीं समझता था. जंबो के पिता शंभु न्यायवन में जज थे. वे अपने जजमैंट के लिए बहुत प्रसिद्ध थे. राजा गबरू उन की बहुत प्रशंसा करते थे.

दिनप्रतिदिन जंबो की शरारतें बढ़ती जा रही थीं. अब तो टीचर भी परेशान होने लगे थे. वह अपने पिता के पद के नाम पर दूसरों को धमकाने भी लगा था. वह छात्रों के बीच झूठी बातें और अफवाहें फैलाने लगा था. जंबो को बोलने पर नियंत्रण नहीं था, इस के कारण उस के कई जानवरों से लड़ाई भी हो जाती. छोटीछोटी बातों पर जंबो अपना आपा खो देता और दूसरों पर हमला कर देता. किसी की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह शक्तिशाली जंबो के खिलाफ लड़ने का साहस कर सके.

जंबो दूसरों को अपने सामने कमजोर और असहाय साबित कर बहुत खुश होता. अपनी सफलता और नाम के लिए वह गलत काम किए जा रहा था. धीरेधीरे छात्रों ने उस से बातें करनी छोड़ दीं. कोई भी स्कूल के अंदर या बाहर उस के साथ नहीं रहना चाहता. जंबो दोस्ती के लिए भी धमकाता, पर कोई उस पर ध्यान नहीं देता.

बंटी भालू ने एक बार धमकाते हुए कहा भी कि वह इन हरकतों को छोड़ दे, वरना वह अपनी टीम के साथ पूरी ताकत से उस पर हमला कर देगा. पर उस के ऊपर कोई असर नहीं हुआ. अब स्कूल के सभी बच्यों ने जंबो को अकेला छोड़ दिया था. टीचर भी कुछ नहीं कहते थे. शुरू में तो जंबो को अकेला रहने में बुरा नहीं लगा, लेकिन थोड़े ही दिनों में वह परेशान रहने लगा. उस ने सभी छात्रों के बीच झूठ बोल कर एकदूसरे के बीच फूट डालनी चाही, लेकिन सभी छात्र एकजुट थे. अब जंबो से कोई बात नहीं करता था. वह किसी से लड़ भी नहीं सकता था. न ही कोई उस के साथ रहना चाहता?था.

धीरेधीरे जंबो ने पढ़ाई और कुश्ती में मन लगाना छोड़ दिया. उस ने स्कूल जाना भी छोड़ दिया. उस के पिता शंभु ने बेटे से कुछ कहे बिना उस के बदले व्यवहार के बारे में जानने की कोशिश की. शंभु जंबो के स्कूल जा कर टीचर और छात्रों से मिले. सभी से जंबो के बुरे व्यवहार के बारे में जान कर शंभु को बहुत दुख हुआ. कुछ योजना बनाते हुए वे घर लौटे.

उन्होंने देखा जंबो एक पेड़ के नीचे उदास हो कर बैठा है. शंभु उस के बगल में बैठ गए और प्यार से उसे सहलाने लगे. ‘‘मेरे प्यारे बेटे को क्या हो गया?’’ शंभु ने पूछा.

अचानक जंबो जोरजोर से रोने लगा. उस के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे. ‘‘पापा, मैं अकेला हो गया हूं. मुझे अब घुटन होने लगी है,’’ जंबो ने पापा के गले से लगते हुए कहा.

शंभु ने जंबो को प्यार किया. ‘‘तुम अपने क्लास में टौपर थे. तुम ने कुश्ती और अन्य खेलों में कई तरह के पुरस्कार जीते. तुम शक्तिशाली हो. इतने सारे अच्छे गुणों के बाद भी तुम अकेले क्यों हो?’’ शंभु ने पूछा.

जंबो बिना कुछ बोले पापा से चिपका रहा. ‘‘तुम तीन बातों की वजह से हार गए, मेरे बेटे,’’ शंभु ने कहा.

‘‘तीन बातें? कौन सी तीन बातें?’’ जंबो ने पूछा. ‘‘हां, तुम तीन बातों यानी अपने बोलने पर, अपने गुस्से पर और अपने लालच पर कंट्रोल नहीं कर पाए,’’ शंभु ने कहा.

‘‘अपने पद, पैसे, पावर और प्रभाव के बाद भी मैं इन तीनों चीजों पर कंट्रोल रखता हूं. यदि किसी ने इन का दुरुपयोग किया, तो उस की सफलता और आत्मसम्मान पर रोक लग जाती है. तुम्हारे बोलने के गलत तरीके से तुम्हारे संबंध टूट सकते हैं. इसी तरह गुस्से और लालच को भी कंट्रोल में रखना बहुत जरूरी होता है. यदि इन पर कंट्रोल रखोगे तो सफल भी रहोगे और सब से अच्छे संबंध रहेंगे.’’ शंभु ने विस्तार से बताया. ‘‘मुझे माफ कर दें, पापा,’’ जंबो अपने आंसू पोंछते हुए बोला, ‘‘मैं अपनी गलती को महसूस कर रहा हूं. मैं इतने पुरस्कार जीतने के बाद भी, दूसरों के दिल नहीं जीत पाया.’’

जंबो अपने प्यारे और समझदार पापा से बात कर के राहत महसूस कर रहा था. दूसरे दिन जंबो खुशीखुशी स्कूल गया. उस ने तीन बातों को दिमाग में बिठा रखा था. उस ने सभी से माफी मांगी. सभी उस के दोस्त बन गए. अब वह अपनी शक्ति का इस्तेमाल सभी की सहायता के लिए करने लगा.