एक दिन सोनू क्रिकेट खेल रहा था. बैटिंग करते हुए उस ने बौल में शौट मारी. बौल सामने वाले घर की खिड़की में लगी और शीशा चकनाचूर हो गया.

वह घर एक गुस्सैल धनी व्यक्ति का था. खिड़की के शीशे बहुत ही खूबसूरत थे. वह प्राय: शीशे में से सड़क की ओर देखता रहता.

वह अकेला ही रहता था. नौकरानी आ कर खाना बना जाती और नौकर बाजार से सामान ला देता. इस तरह वह व्यक्ति सीधासादा जीवन बिता रहा था. उम्र के हिसाब से उसे सुनाई भी कम देता था. उसे बहुत जल्दी गुस्सा भी आ जाता और सहायता के लिए वह जोरजोर से चिल्लाता.

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उस के घरेलू नौकर ने यह अफवाह फैला दी थी कि उस व्यक्ति का दिमाग ठीक नहीं है. जो भी उस के पास जाएगा उसे वह मारेगा, लड़ाई करेगा. इसलिए पड़ोसी भी उस व्यक्ति से दूरदूर ही रहते.

उस के घर के शीशे टूटने से सभी बच्चे बहुत डर गए. वे चिल्लाए, ‘‘भाग, सोनू भाग, यदि उस गुस्सैल व्यक्ति को यह पता चल गया कि हम ने उस के शीशे तोड़े हैं तो वह हमें छोड़ेगा नहीं.’’

सोनू वहां से तो भाग आया, पर मन में शांति नहीं थी. वह उदास सा घर पहुंचा. मां ने कारण पूछा तो सोनू ने सारी बात बता दी. उसी शाम सोनू अपने पापा के साथ उस व्यक्ति के घर पहुंचा. दरवाजा खटखटाया, तो अंदर से पैर घिसटने की आवाज आई.

उस व्यक्ति ने दरवाजा खोला और उन्हें अंदर आने को कहा. ‘‘अंकल, मुझे माफ कर दें. गलती से आप के घर का शीशा मेरे द्वारा टूट गया. लेकिन आप नाराज न हों, कल शीशा लग जाएगा.’’ सोनू  एक ही सांस में बोल गया.

उस अंकल ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘कोई बात नहीं, पहले बैठो तो सही.’’ सोनू और उस के पिताजी को ऐसे व्यवहार की उम्मीद नहीं थी. वे देर तक बैठ कर बातें करते रहे. जब सोनू और उस के पिताजी लौटने के लिए खड़े हुए तो उस बूढ़े व्यक्ति की आंखें भर आईं. उन्होंने कहा, ‘‘बेटे सोनू, कभीकभी तुम मेरे पास आ जाया करो. तुम सच्चे बच्चे हो. मुझे बहुत खुशी होगी. मैं तुम्हें अपने बचपन की कहानियां और अपने देश के इतिहास के बारे में बताऊंगा.’’ सिर हिला कर सोनू पिताजी के साथ घर चला आया.

दूसरे दिन सोनू की मम्मी ने हलवा और पूरी बना कर अंकल को भेजी. लौटते समय सोनू का थैला आमों से भरा था, जो अंकल के बगीचे के थे.

मां ने समझाया, ‘‘अंकल का चिड़चिड़ापन और गुस्से वाला स्वभाव एकांत में रहने के कारण होगा. सभी की तरह वे भी किसी का साथ चाहते हैं. यदि कोई उन्हें साथ दे फिर देखना उन का व्यवहार कितना अच्छा हो जाएगा.’’ सोनू प्रतिदिन कुछ देर के लिए अंकल के पास जाने लगा. जल्दी ही गुस्सैल अंकल ने गुस्सा करना छोड़ दिया.